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भक्त की पग-पग पर रक्षा करते हैं भगवान -राधा
Updated Wed, 19 Sep 2018 01:40 AM IST
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बिनौली (बागपत)।
धनौरा सिल्वरनगर के शिव मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन राजा परीक्षित की कथा सुनाते हुए महामंडलेश्वर श्री भैया दास की धर्म बेटी बाल साध्वी राधा देवी कहा जो भगवान के लिए पूर्ण समर्पित हो जाता है। भगवान उसकी सदैव पग-पग पर रक्षा करते हैं।
भगवान पर पूर्ण विश्वास ही जीव को भवसागर से पार कराता है। इसलिए सभी श्रद्धालु भक्तों का कर्तव्य बनता है कि भगवान की कथा को प्रेम से श्रवण करें और दूसरों को भी हरि नाम की चर्चा मैं लेकर आयें। क्योंकि भगवान की कथा जीवन की व्यथा दूर करने वाली होती है। जितने श्रद्धालु भरकर आपके साथ कथा में आएंगे उसका फल भी आपको ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिस समय राजा परीक्षित को श्राप लग गया कि सात दिन में तुम्हें सांप डस लेगा, जब राजा परीक्षित को मालूम हुआ कि मेरे ही पाप के कारण मुझे ऋषि पुत्र ने श्राप दे दिया है कि सातवें दिन वही सांप डस लेगा तो राजा परीक्षित संतों से प्रार्थना करने लगे कि मुझे अब कौन सा उपाय करना चाहिए जो मैं मुक्त हो जाऊ। संतों ने आदेश दिया कि हे राजन आप सुखदेव मुनि श्रीमद भागवत कथा शुरू करें, कथा ही आपको निर्भय कर सकती है। कथा श्रवण करें। संतों की बात सुनकर राजा परीक्षित ने सुखदेव मुनि से कथा सुनीं और मुक्त हो गए।
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धनौरा सिल्वरनगर के शिव मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन राजा परीक्षित की कथा सुनाते हुए महामंडलेश्वर श्री भैया दास की धर्म बेटी बाल साध्वी राधा देवी कहा जो भगवान के लिए पूर्ण समर्पित हो जाता है। भगवान उसकी सदैव पग-पग पर रक्षा करते हैं।
भगवान पर पूर्ण विश्वास ही जीव को भवसागर से पार कराता है। इसलिए सभी श्रद्धालु भक्तों का कर्तव्य बनता है कि भगवान की कथा को प्रेम से श्रवण करें और दूसरों को भी हरि नाम की चर्चा मैं लेकर आयें। क्योंकि भगवान की कथा जीवन की व्यथा दूर करने वाली होती है। जितने श्रद्धालु भरकर आपके साथ कथा में आएंगे उसका फल भी आपको ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिस समय राजा परीक्षित को श्राप लग गया कि सात दिन में तुम्हें सांप डस लेगा, जब राजा परीक्षित को मालूम हुआ कि मेरे ही पाप के कारण मुझे ऋषि पुत्र ने श्राप दे दिया है कि सातवें दिन वही सांप डस लेगा तो राजा परीक्षित संतों से प्रार्थना करने लगे कि मुझे अब कौन सा उपाय करना चाहिए जो मैं मुक्त हो जाऊ। संतों ने आदेश दिया कि हे राजन आप सुखदेव मुनि श्रीमद भागवत कथा शुरू करें, कथा ही आपको निर्भय कर सकती है। कथा श्रवण करें। संतों की बात सुनकर राजा परीक्षित ने सुखदेव मुनि से कथा सुनीं और मुक्त हो गए।
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