{"_id":"5a639bce4f1c1b8b268b5851","slug":"61516477390-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन में श्रेष्ठ विचारों को अपनाने का संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवन में श्रेष्ठ विचारों को अपनाने का संदेश
Updated Sun, 21 Jan 2018 01:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीवन में श्रेष्ठ विचारों को अपनाने का संदेश
बिनौली (बागपत)। सिद्ध गुरु पीठ नीलकंठ आश्रम, जिवाना में चल रहे यजुर्वेद पारायण महायज्ञ के तीसरे दिन सिद्ध गुरु महाराज ने श्रद्धालुओं को उपदेश देते हुए कहा कि सादगी के साथ सद्विचारों को जीवन में धारण करने वाला मनुष्य श्रेष्ठ होता है।
नीलकंठ आश्रम के पीठाधीश सिद्ध गुरु महाराज ने कहा वर्तमान समय में मनुष्य विलासिता की वस्तुओं में लिप्त है। इससे वह परमात्मा की भक्ति से भी दूर जा रहा है। उसके घर परिवार में परेशानी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि कुरीतियां बढ़ने से समाज में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य सद्गुरु के सानिध्य में रहकर नियमित रूप से परमात्मा की भक्ति करता है तो उसका जीवन सुखमय हो जाता है। आचार्य अमित शास्त्री ने यज्ञ की क्रियाएं कराईं। श्रद्धालुओं ने दैनिक यज्ञ करने का संकल्प कराया। आचार्य अंकुर भारद्वाज ने भजन गाए और सस्वर वेद मंत्रों का उच्चारण किया। मुंबई से आए प्रकाश धीरूभाई डोडिया और उनकी पत्नी नैना यज्ञमान रहे।
विज्ञापन
बिनौली (बागपत)। सिद्ध गुरु पीठ नीलकंठ आश्रम, जिवाना में चल रहे यजुर्वेद पारायण महायज्ञ के तीसरे दिन सिद्ध गुरु महाराज ने श्रद्धालुओं को उपदेश देते हुए कहा कि सादगी के साथ सद्विचारों को जीवन में धारण करने वाला मनुष्य श्रेष्ठ होता है।
नीलकंठ आश्रम के पीठाधीश सिद्ध गुरु महाराज ने कहा वर्तमान समय में मनुष्य विलासिता की वस्तुओं में लिप्त है। इससे वह परमात्मा की भक्ति से भी दूर जा रहा है। उसके घर परिवार में परेशानी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि कुरीतियां बढ़ने से समाज में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य सद्गुरु के सानिध्य में रहकर नियमित रूप से परमात्मा की भक्ति करता है तो उसका जीवन सुखमय हो जाता है। आचार्य अमित शास्त्री ने यज्ञ की क्रियाएं कराईं। श्रद्धालुओं ने दैनिक यज्ञ करने का संकल्प कराया। आचार्य अंकुर भारद्वाज ने भजन गाए और सस्वर वेद मंत्रों का उच्चारण किया। मुंबई से आए प्रकाश धीरूभाई डोडिया और उनकी पत्नी नैना यज्ञमान रहे।
विज्ञापन