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जिला अस्पताल में बिजली-पानी सप्लाई ठप, मचा हा-हाकार
Updated Mon, 14 May 2018 01:04 AM IST
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बागपत। जिला अस्पताल में बिजली और पानी की सप्लाई ठप होने से मरीजों में हाहाकार मच गया। गर्मी से परेशान तीमारदार और मरीज बरामदे और पेड़ों के नीचे जमीन पर बैैठने को मजबूर रहे। गर्मी से बच्चे काफी परेशान दिखे। तीमारदार हाथों के पंखों से हवा करते दिखाई दिए। बिजली नहीं आने के कारण मरीज तीन घंटे तक गर्मी में बेहाल रहे।
जिला अस्पताल में रविवार को प्रात: 11 बजे बिजली चली गई। इससे अस्पताल के पंखे बंद हो गए। गर्मी के कारण मरीज बेहाल हो गए। गर्मी के कारण बच्चे रोने लगे। तीमारदार हाथ के पंखे से मरीजों को हवा करते रहे। कुछ तीमारदार अपने बच्चों को अस्पताल के बाहर पेड़ों के नीचे लेकर पहुंच गए। अस्पताल में भर्ती निवाड़ा के जुबेर ने बताया कि उसका हर्निया का आपरेशन हुआ है। जिला अस्पताल में दो घंटे से बिजली नहीं है। गर्मी अधिक लग रही है। वह स्वयं ही हाथ के पंखे से हवा कर रहा था। बड़ौत निवासी सायरा का आपरेशन हुआ है। उसे छोटा बच्चा हवा कर रहा था। ऊन निवासी पांच साल का बच्चा मोनिस बुखार से पीड़ित है। उसकी मां हवा कर रही थी। चमरावल निवासी पवन ने बताया कि अस्पताल में 11 बजे से बिजली और पानी नहीं है। स्टाफ को समस्या के बारे में बताया, लेकिन पंखे नहीं चलाए। मरीज बिजली और पानी को तरस गए। करीब तीन घंटे बत्ती गुल होने से परेशानी हुई।
बासौद निवासी राहत बुखार की मरीज है। बिजली नहीं आने के कारण वह अस्पताल के बाहर पेड़ के नीचे बैठी हुई थी। उसने बताया कि बिजली जाने के बाद स्टाफ का कोई भी कर्मचारी उनका हाल पूछने नहीं आया। पेड़ के नीचे गर्मी से कुछ राहत मिली है। सरूरपुर निवासी सात वर्षीय नर्गिंस और निवाड़ा निवासी सालिब को उनके परिजन पेड़ की छांव में लिए हुए बैठे थे। दोनों को बुखार से पीड़ित हैं। महिला वार्ड में भर्ती बिलौचपुरा निवासी कमल जहां को उसका भतीजा अरहान हाथ के पंखे से हवा कर रहा था। मरीजों ने बताया कि रात में भी बिजली गई । वार्ड में अंधेरा छा गया था। जनरेटर होते हुए भी नहीं चलाया जाता है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. बीएलएस कुशवाहा ने बताया कि अस्पताल में बिजली और पानी की ठीक व्यवस्था है। कुछ देर के लिए बिजली चली गई होगी। इस कारण मरीजों को परेशानी हुई है।
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मरीज पंखे की हवा को तरसे
बागपत। जिला अस्पताल में चिकित्सकों और स्टाफ के कक्ष में एसी लगे हैं, लेकिन मरीजों को पंखे की हवा तक नहीं मिल रही है। कूलर में न घास है, न पानी। बिजली नहीं होने के कारण पंखे भी बंद रहते हैं। वर्तमान समय में जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी है। इस कारण महिला और पुरुष वार्ड में जगह नहीं है।
मरीज के ऊपर नहीं लगा पंखा
बागपत। कमाला गांव निवासी अमित कई दिन से जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में भर्ती है। अमित बुखार से पीड़ित है। उसे ऐसी जगह बेड दिया हुआ है, जहां पर पंखा नहीं है। उसने बताया गर्मी में पंखा नहीं होने के कारण काफी परेशानी होती है।
गर्मी में रोने लगे नवजात बच्चे
बागपत। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में तीन नवजात बच्चे भर्ती हैं। तीनों को 104 से 105 बुखार बताया जा रहा है। बदरपुर निवासी इरशाद की डेढ़ साल की बेटी नेहा भर्ती है। वह गर्मी में बेहाल रही। सीएनसीयू में भर्ती पांच दिन के नवजात बच्चे को उसकी मां पूनम निवासी ढिकौली खिड़की के पास लेकर खड़ी हुई थी। गर्मी के कारण बच्चा रोता रहा। खिड़की से हवा आने के कारण बच्चा चुप हो जाता था।
अव्यवस्थाओं का बोल बाला
बागपत। जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोल बाला है। रविवार को छुट्टी के दिन मरीज भगवान भरोसे रहते हैं। चिकित्सक भर्ती मरीजों को देखने तक नहीं आते हैं। चिकित्सकों की लापरवाही के कारण कई बार मरीजों की मौत भी हो जाती है। जिला अस्पताल के ज्यादातर चिकित्सक बाहर रहते हैं। सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल में तैनात अधिकांश चिकित्सक मेरठ या दिल्ली चले जाते हैं। अधिकांश चिकित्सकों के शहर से बाहर रहने के कारण ओपीडी भी निर्धारित समय से शुरू नहीं हो पाती है। जिला अस्पताल में रात्रि के समय एक भी चिकित्सक नहीं रुकता। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को रात के समय परेशानी उठानी पड़ती है।
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जिला अस्पताल में रविवार को प्रात: 11 बजे बिजली चली गई। इससे अस्पताल के पंखे बंद हो गए। गर्मी के कारण मरीज बेहाल हो गए। गर्मी के कारण बच्चे रोने लगे। तीमारदार हाथ के पंखे से मरीजों को हवा करते रहे। कुछ तीमारदार अपने बच्चों को अस्पताल के बाहर पेड़ों के नीचे लेकर पहुंच गए। अस्पताल में भर्ती निवाड़ा के जुबेर ने बताया कि उसका हर्निया का आपरेशन हुआ है। जिला अस्पताल में दो घंटे से बिजली नहीं है। गर्मी अधिक लग रही है। वह स्वयं ही हाथ के पंखे से हवा कर रहा था। बड़ौत निवासी सायरा का आपरेशन हुआ है। उसे छोटा बच्चा हवा कर रहा था। ऊन निवासी पांच साल का बच्चा मोनिस बुखार से पीड़ित है। उसकी मां हवा कर रही थी। चमरावल निवासी पवन ने बताया कि अस्पताल में 11 बजे से बिजली और पानी नहीं है। स्टाफ को समस्या के बारे में बताया, लेकिन पंखे नहीं चलाए। मरीज बिजली और पानी को तरस गए। करीब तीन घंटे बत्ती गुल होने से परेशानी हुई।
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बासौद निवासी राहत बुखार की मरीज है। बिजली नहीं आने के कारण वह अस्पताल के बाहर पेड़ के नीचे बैठी हुई थी। उसने बताया कि बिजली जाने के बाद स्टाफ का कोई भी कर्मचारी उनका हाल पूछने नहीं आया। पेड़ के नीचे गर्मी से कुछ राहत मिली है। सरूरपुर निवासी सात वर्षीय नर्गिंस और निवाड़ा निवासी सालिब को उनके परिजन पेड़ की छांव में लिए हुए बैठे थे। दोनों को बुखार से पीड़ित हैं। महिला वार्ड में भर्ती बिलौचपुरा निवासी कमल जहां को उसका भतीजा अरहान हाथ के पंखे से हवा कर रहा था। मरीजों ने बताया कि रात में भी बिजली गई । वार्ड में अंधेरा छा गया था। जनरेटर होते हुए भी नहीं चलाया जाता है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. बीएलएस कुशवाहा ने बताया कि अस्पताल में बिजली और पानी की ठीक व्यवस्था है। कुछ देर के लिए बिजली चली गई होगी। इस कारण मरीजों को परेशानी हुई है।
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मरीज पंखे की हवा को तरसे
बागपत। जिला अस्पताल में चिकित्सकों और स्टाफ के कक्ष में एसी लगे हैं, लेकिन मरीजों को पंखे की हवा तक नहीं मिल रही है। कूलर में न घास है, न पानी। बिजली नहीं होने के कारण पंखे भी बंद रहते हैं। वर्तमान समय में जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी है। इस कारण महिला और पुरुष वार्ड में जगह नहीं है।
मरीज के ऊपर नहीं लगा पंखा
बागपत। कमाला गांव निवासी अमित कई दिन से जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में भर्ती है। अमित बुखार से पीड़ित है। उसे ऐसी जगह बेड दिया हुआ है, जहां पर पंखा नहीं है। उसने बताया गर्मी में पंखा नहीं होने के कारण काफी परेशानी होती है।
गर्मी में रोने लगे नवजात बच्चे
बागपत। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में तीन नवजात बच्चे भर्ती हैं। तीनों को 104 से 105 बुखार बताया जा रहा है। बदरपुर निवासी इरशाद की डेढ़ साल की बेटी नेहा भर्ती है। वह गर्मी में बेहाल रही। सीएनसीयू में भर्ती पांच दिन के नवजात बच्चे को उसकी मां पूनम निवासी ढिकौली खिड़की के पास लेकर खड़ी हुई थी। गर्मी के कारण बच्चा रोता रहा। खिड़की से हवा आने के कारण बच्चा चुप हो जाता था।
अव्यवस्थाओं का बोल बाला
बागपत। जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोल बाला है। रविवार को छुट्टी के दिन मरीज भगवान भरोसे रहते हैं। चिकित्सक भर्ती मरीजों को देखने तक नहीं आते हैं। चिकित्सकों की लापरवाही के कारण कई बार मरीजों की मौत भी हो जाती है। जिला अस्पताल के ज्यादातर चिकित्सक बाहर रहते हैं। सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल में तैनात अधिकांश चिकित्सक मेरठ या दिल्ली चले जाते हैं। अधिकांश चिकित्सकों के शहर से बाहर रहने के कारण ओपीडी भी निर्धारित समय से शुरू नहीं हो पाती है। जिला अस्पताल में रात्रि के समय एक भी चिकित्सक नहीं रुकता। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को रात के समय परेशानी उठानी पड़ती है।