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अक्षय तृतीया पर बाल विवाह किया तो खैर नहीं
Updated Sun, 15 Apr 2018 01:52 AM IST
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बागपत।
बाल विवाह की कुरीति के खिलाफ न्यायपीठ बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने कमर कस ली है और 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर बाल विवाह की आशंका पर लोगों को सतर्क किया है। न्यायपीठ ने पुलिस और विभिन्न सामाजिक संगठनों को अक्षय तृतीया पर किसी भी दशा में बाल विवाह नहीं होने देने की हिदायत दी है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैसाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पूरे देश मेें अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है और बड़ी संख्या में विवाह संस्कार आयोजित किए जाते हैं। इस दिन बाल विवाह होने की आशंका भी बनी रहती है। न्यायपीठ बाल कल्याण समिति बागपत के न्याय प्राधिकारी डॉ. कुलदीप त्यागी ने बताया कि 2018 में अक्षय तृतीया की तिथि 18 अप्रैल को पड़ रही है। बाल विवाह की आशंका पर न्यायपीठ सीडब्लूसी ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह करना व कराना कानूनी अपराध है। शादी के समय लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। इससे कम उम्र में शादी करने और कराने वाले को दो साल तक की सजा, एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है। दुर्भाग्य से यह कुप्रथा अभी भी समाज में व्याप्त है। अक्षय तृतीया पर बाल विवाह की आशंका को देखकर पुलिस और 181 महिला हेल्प लाइन टीम को सतर्क किया।
सामाजिक संगठनों के लोगों को भी दिया जिम्मा
डॉ. कुलदीप त्यागी ने बताया कि बाल विवाह की कुप्रथा को रोकने के लिए सामाजिक संगठनों को भी जागरूक किया। सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों को अक्षय तृतीया पर गांवों और कस्बों में होने वाले बाल विवाह पर निगाह रखने को कहा है। इसके साथ विवाह कराने वाले पंडितों, बैंक्वेटहाल मालिकों, बैंडबाजा संचालकों को भी बाल विवाह की सूचना तत्काल पुलिस, सीडब्लूसी, 181 महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड लाइन 1098 पर देने के निर्देश दिए हैं।
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बाल विवाह की कुरीति के खिलाफ न्यायपीठ बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने कमर कस ली है और 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर बाल विवाह की आशंका पर लोगों को सतर्क किया है। न्यायपीठ ने पुलिस और विभिन्न सामाजिक संगठनों को अक्षय तृतीया पर किसी भी दशा में बाल विवाह नहीं होने देने की हिदायत दी है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैसाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पूरे देश मेें अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है और बड़ी संख्या में विवाह संस्कार आयोजित किए जाते हैं। इस दिन बाल विवाह होने की आशंका भी बनी रहती है। न्यायपीठ बाल कल्याण समिति बागपत के न्याय प्राधिकारी डॉ. कुलदीप त्यागी ने बताया कि 2018 में अक्षय तृतीया की तिथि 18 अप्रैल को पड़ रही है। बाल विवाह की आशंका पर न्यायपीठ सीडब्लूसी ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह करना व कराना कानूनी अपराध है। शादी के समय लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। इससे कम उम्र में शादी करने और कराने वाले को दो साल तक की सजा, एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है। दुर्भाग्य से यह कुप्रथा अभी भी समाज में व्याप्त है। अक्षय तृतीया पर बाल विवाह की आशंका को देखकर पुलिस और 181 महिला हेल्प लाइन टीम को सतर्क किया।
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सामाजिक संगठनों के लोगों को भी दिया जिम्मा
डॉ. कुलदीप त्यागी ने बताया कि बाल विवाह की कुप्रथा को रोकने के लिए सामाजिक संगठनों को भी जागरूक किया। सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों को अक्षय तृतीया पर गांवों और कस्बों में होने वाले बाल विवाह पर निगाह रखने को कहा है। इसके साथ विवाह कराने वाले पंडितों, बैंक्वेटहाल मालिकों, बैंडबाजा संचालकों को भी बाल विवाह की सूचना तत्काल पुलिस, सीडब्लूसी, 181 महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड लाइन 1098 पर देने के निर्देश दिए हैं।
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