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वेद मंत्रों के उच्चारण से पवित्र होती है आत्मा- जयवीर दत
Updated Wed, 07 Feb 2018 01:17 AM IST
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दोघट (बागपत)। गुरुकुल बरनावा के आचार्य जयवीर दत्त ने कहा वेद मंत्रों के उच्चारण से मन आत्मा पवित्र होती है।
मंगलवार को आजमपुर मुलसम में चल रहे चतुर्वेद पारायण महायज्ञ के तीसरे दिन ब्रह्मा पद से बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संत महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर उनके आदर्शों और विचारों को जीवन में धारण कर आत्मसात करने पर मनुष्य का कल्याण हो सकता है। वेद मंत्रों के उच्चारण से मन आत्मा पवित्र होती है। भौतिक यज्ञ को आध्यात्मिक यज्ञ में परिवर्तित करने पर ही मानव का कल्याण संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि बुद्धि ज्ञान से तथा मन सत्य से पवित्र होता है। मन पवित्र होगा, तो कर्म भी श्रेष्ठ होगा। परमात्मा की स्तुति भी सफल होगी। यज्ञ के ब्रह्मा योगाचार्य अरविंद कुमार शास्त्री ने वेदोपदेश में कहा कि परमात्मा निराकार है, परमात्मा ने मानव कल्याण के लिए ब्रह्मांड की रचना की और कई औषधियों के बारे में बताया। इसमें वेद पाठी अंकुर शास्त्री, रोहित शास्त्री, सुनील शास्त्री, ब्रह्मुनि, ऋषि, सत्यवेश, जयकृष्ण, मोहित, शुभ आदि रहे। यज्ञमान रविंद्र, अनिल, नवीन, संजय, कपिल सपत्नीक रहे। इसमें सुभाष, संजीव कुमार, कृष्णपाल, हरेंद्र, सतेंद्र, ब्रह्मचारी आदि रहे।
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मंगलवार को आजमपुर मुलसम में चल रहे चतुर्वेद पारायण महायज्ञ के तीसरे दिन ब्रह्मा पद से बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संत महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर उनके आदर्शों और विचारों को जीवन में धारण कर आत्मसात करने पर मनुष्य का कल्याण हो सकता है। वेद मंत्रों के उच्चारण से मन आत्मा पवित्र होती है। भौतिक यज्ञ को आध्यात्मिक यज्ञ में परिवर्तित करने पर ही मानव का कल्याण संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि बुद्धि ज्ञान से तथा मन सत्य से पवित्र होता है। मन पवित्र होगा, तो कर्म भी श्रेष्ठ होगा। परमात्मा की स्तुति भी सफल होगी। यज्ञ के ब्रह्मा योगाचार्य अरविंद कुमार शास्त्री ने वेदोपदेश में कहा कि परमात्मा निराकार है, परमात्मा ने मानव कल्याण के लिए ब्रह्मांड की रचना की और कई औषधियों के बारे में बताया। इसमें वेद पाठी अंकुर शास्त्री, रोहित शास्त्री, सुनील शास्त्री, ब्रह्मुनि, ऋषि, सत्यवेश, जयकृष्ण, मोहित, शुभ आदि रहे। यज्ञमान रविंद्र, अनिल, नवीन, संजय, कपिल सपत्नीक रहे। इसमें सुभाष, संजीव कुमार, कृष्णपाल, हरेंद्र, सतेंद्र, ब्रह्मचारी आदि रहे।