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Baghpat News: यमुना में पानी बढ़ा तो किसानों की 500 बीघा फसल डूबी

Sat, 03 Jun 2023 11:41 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jun 2023 11:41 PM IST
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500 bigha crop of farmers drowned when water increased in Yamuna
- हथिनीकुंड बैराज से यमुना में छोड़ा गया पानी शुक्रवार रात में बागपत पहुंचने पर बढ़ी किसानों की परेशानी
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- लोकी, तोरई, खरबूजा, तरबूज की फसल डूबी, यमुना में शनिवार को दस हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया
फोटो 2 व 2ए
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में बृहस्पतिवार व शुक्रवार को छोड़ा गया बागपत में पहुंच गया। जिससे यमुना में पानी बढ़ने से उसके अंदर बोई गई करीब 500 बीघा फसल डूब गई। जबकि शनिवार को यमुना में करीब दस हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस तरह पानी बढऩे से किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
पहाड़ों पर बारिश होने के बाद हथिनीकुंड बैराज से बृहस्पतिवार से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। जहां बृहस्पतिवार को 75 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, वहीं शुक्रवार को करीब 42 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इतना पानी छोड़ा जाने के बाद शुक्रवार रात को यहां पहुंच गया था और वह शनिवार तक बढ़ता रहा। जिससे यमुना के अंदर बोई गई किसानों की करीब 500 बीघा फसल डूब गई।
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बागपत में अनवर की लोकी, मीरहसन की लोकी, इशाकी की खरबूजा व तरबूज, रामपाल की खरबूजा व तरबूज, रतन की खरबूजा व तरबूज, रामप्रसाद की खरबूजा व ज्वार समेत अन्य काफी किसानों की फसल डूब गई। ऐसे में यमुना के अंदर पानी बढ़ने से फसल की कटाई भी नहीं हो सकती है। जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं जिस तरह से अभी तक हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़ा गया है, उससे खतरे की कोई बात नहीं है। इसके बावजूद जिले में यमुना नदी किनारे पर बनाई गई 11 बाढ़ चौकियों को अलर्ट जारी किया गया है।
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इन गावों की फसल को हो सकता है नुकसान
जिले में यमुना नदी किनारे 18 गांव बसे हुए है। जिनमें टांडा, कोताना, ककौरकलां, जागोस, सिसाना, नैथला, खेड़ा इस्लामपुर, सुल्तानपुर हटाना, बदरखा, पाली, काठा, सुभानपुर समेत अन्य गांव शामिल है। इन गांवों के किसानों की यमुना खादर में जमीन है। जहां वह खेती करते है। जिनकी जमीन यमुना से बाहर है, उनकी फसल अभी बची हुई है। वहीं यमुना के अंदर की जमीन पर बोई गई फसल डूब गई है।

वर्जन-
हथनीकुंड बैराज से यमुना नदी में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। उस पानी से अभी तक खतरे वाली कोई बात नहीं है। यमुना में पानी छोड़ने को लेकर पूरा ध्यान रखा जा रहा है कि यहां किसी तरह का नुकसान नहीं हो सके। उत्कर्ष भारद्वाज, नोडल अधिकारी बाढ़ राहत नियंत्रण।
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