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गठबंधन की तर्ज पर बागपत सीट छोड़ सकती है कांग्रेस
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बागपत। रालोद के खाते की सीटों का आधिकारिक एलान हो चुका है। देश के सभी राजनीतिक दलों ने लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी तेज कर दी है। बसपा, रालोद और सपा के गठबंधन ने जिस तरह अमेठी और रायबरेली की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी, उसी तर्ज पर अब कांग्रेस भी एक या दो महत्वपूर्ण सीटों को छोड़ सकती है। रालोद के गढ़ बागपत लोकसभा सीट को लेकर भी ऐसी ही चर्चा चल रही है। यदि कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी मैदान में उतारा भी गया तो मुस्लिम के बजाए ब्राह्मण, त्यागी या गुर्जर चेहरे को टिकट देने की अधिक संभावना हैं। हाईकमान कई बार बागपत के चुनाव को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं से फीड बैक ले चुका है।
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और कांग्रेस नेताओं के बीच सियासी तालमेल के अलावा राजनीतिक ताल्लुक रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह लंबे समय तक कांग्रेस में रहे। खुद चौधरी अजित सिंह पिछली कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे। उत्तर प्रदेश में बसपा, सपा और रालोद के गठबंधन का एलान हो चुका है। तीनों राजनीतिक दलों की सीटों का फैसला हो चुका है। सियासी गलियारों में नई चर्चा यह है कि गठबंधन ने जिस तरह अमेठी और रायबरेली की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी, सूत्रों के अनुसार उसी तर्ज पर कांग्रेस भी यूपी में दो सीट गठबंधन के लिए छोड़ने पर विचार कर रही है। इनमें एक सीट बागपत भी हो सकती है। इसकी वजह यह है कि बागपत रालोद का गढ़ है और चौधरी अजित सिंह के कांग्रेस से नजदीकी ताल्लुकात रहे हैं।
कांग्रेस के लिए एक चर्चा यह भी
बागपत। भाजपा और गठबंधन के बीच बागपत में सीधा मुकाबला माना जा रहा है। कांग्रेस के अगले कदम पर सबकी निगाह टिकी है। कई मुस्लिम उम्मीदवार टिकट पर दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन सियासी चर्चा यह भी है कि कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदवार के बजाए बागपत लोकसभा सीट से ब्राह्मण, त्यागी या गुर्जर उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी।
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सपा ने रालोद से गठबंधन पर जताई खुशी
बागपत। लखनऊ में गठबंधन में सीटों के एलान के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने खुशी मनाई। सपा ने कहा कि बसपा, बसपा और रालोद मिलकर भाजपा को हराने का काम करेंगे। सपा नेता शोकेंद्र तोमर ने कहा कि सपा और रालोद ने मजबूत गठबंधन किया है। भाजपा को हराने के लिए यह जरूरी था। बागपत लोकसभा सीट से रालोद के लिए सपा नेता ताकत झोंकने का काम करेंगे।
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रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और कांग्रेस नेताओं के बीच सियासी तालमेल के अलावा राजनीतिक ताल्लुक रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह लंबे समय तक कांग्रेस में रहे। खुद चौधरी अजित सिंह पिछली कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे। उत्तर प्रदेश में बसपा, सपा और रालोद के गठबंधन का एलान हो चुका है। तीनों राजनीतिक दलों की सीटों का फैसला हो चुका है। सियासी गलियारों में नई चर्चा यह है कि गठबंधन ने जिस तरह अमेठी और रायबरेली की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी, सूत्रों के अनुसार उसी तर्ज पर कांग्रेस भी यूपी में दो सीट गठबंधन के लिए छोड़ने पर विचार कर रही है। इनमें एक सीट बागपत भी हो सकती है। इसकी वजह यह है कि बागपत रालोद का गढ़ है और चौधरी अजित सिंह के कांग्रेस से नजदीकी ताल्लुकात रहे हैं।
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कांग्रेस के लिए एक चर्चा यह भी
बागपत। भाजपा और गठबंधन के बीच बागपत में सीधा मुकाबला माना जा रहा है। कांग्रेस के अगले कदम पर सबकी निगाह टिकी है। कई मुस्लिम उम्मीदवार टिकट पर दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन सियासी चर्चा यह भी है कि कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदवार के बजाए बागपत लोकसभा सीट से ब्राह्मण, त्यागी या गुर्जर उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी।
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सपा ने रालोद से गठबंधन पर जताई खुशी
बागपत। लखनऊ में गठबंधन में सीटों के एलान के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने खुशी मनाई। सपा ने कहा कि बसपा, बसपा और रालोद मिलकर भाजपा को हराने का काम करेंगे। सपा नेता शोकेंद्र तोमर ने कहा कि सपा और रालोद ने मजबूत गठबंधन किया है। भाजपा को हराने के लिए यह जरूरी था। बागपत लोकसभा सीट से रालोद के लिए सपा नेता ताकत झोंकने का काम करेंगे।