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भक्तों ने उपवास रखकर शैल पुत्री की पूजा की
Updated Fri, 22 Sep 2017 01:11 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
नवरात्र के पहले दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर मंदिर में शैल पुत्री की पूजा की। कई मंदिरों में हवन और पुजारियों ने भक्तों को शैल पुत्री की कथाएं सुनाई।
बृहस्पतिवार को नवरात्र के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने उपवास रखे और शैल पुत्री की पूजा की। श्रद्धालुओं ने अपने घरों में दुर्गा की मूर्तियां स्थापित की। वहीं नगर के पंचवटी मंदिर, दुर्गा मंदिर रेलवे स्टेशन, पंचमुखी मंदिर, ठाकुरद्वारा शिव मंदिर, पट्टी चौधरान शिवालय, पंजाबी क्वार्टर, पट्टी मेहर विश्वकर्मा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रही। रेलवे स्टेशन स्थित दुर्गा मंदिर में पुजारी पंडित आकाश भारद्वाज और पंचवटी मंदिर में कुंदन शर्मा ने मंदिर में यज्ञ किया और शैलपुत्री की कथा सुनाते हुये कहा कि माता का यह रूप अनेकानेक नामी सती, पार्वती, दुर्गा, गौरी आदि से प्रसिद्ध है। पर्वतराज की पुत्री होने के कारण इस प्रथम रूप का नाम शैलपुत्री पड़ा। मंदिरों में दुर्गा की मूर्तियों को चुनरी से सजाया और फल-फूल भी चढ़ाए।
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नवरात्र के पहले दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर मंदिर में शैल पुत्री की पूजा की। कई मंदिरों में हवन और पुजारियों ने भक्तों को शैल पुत्री की कथाएं सुनाई।
बृहस्पतिवार को नवरात्र के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने उपवास रखे और शैल पुत्री की पूजा की। श्रद्धालुओं ने अपने घरों में दुर्गा की मूर्तियां स्थापित की। वहीं नगर के पंचवटी मंदिर, दुर्गा मंदिर रेलवे स्टेशन, पंचमुखी मंदिर, ठाकुरद्वारा शिव मंदिर, पट्टी चौधरान शिवालय, पंजाबी क्वार्टर, पट्टी मेहर विश्वकर्मा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रही। रेलवे स्टेशन स्थित दुर्गा मंदिर में पुजारी पंडित आकाश भारद्वाज और पंचवटी मंदिर में कुंदन शर्मा ने मंदिर में यज्ञ किया और शैलपुत्री की कथा सुनाते हुये कहा कि माता का यह रूप अनेकानेक नामी सती, पार्वती, दुर्गा, गौरी आदि से प्रसिद्ध है। पर्वतराज की पुत्री होने के कारण इस प्रथम रूप का नाम शैलपुत्री पड़ा। मंदिरों में दुर्गा की मूर्तियों को चुनरी से सजाया और फल-फूल भी चढ़ाए।
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