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Baghpat News: वीआईपी नंबर लेने के फेर में 29 वाहन मालिकों के फंस गए 3.97 लाख
Thu, 25 Sep 2025 03:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Thu, 25 Sep 2025 03:39 AM IST
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सहारनपुर। वाहनों के लिए वीआईपी नंबर लेने का क्रेज बढ़ रहा है। जिले के 29 वाहन मालिक ऐसे हैं, जिन्होंने वीआईपी नंबरों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। उन्हें वीआईपी नंबर तो मिला नहीं, लेकिन इसके एवज में अदा की गई मोटी रकम भी अटक गई। अब एसओपी जारी होने के बाद बैंक से सत्यापन कराकर रिफंड वापस की प्रक्रिया शुरू हो गई।
400 से अधिक ऐसे वीआईपी नंबर हैं, इनके लिए वाहन मालिकों को बोली लगानी पड़ती है। इसमें 0001, 0002, 0786 जैसे नंबर मुख्य हैं।
इन वीआईपी नंबरों के लिए वाहन मालिकों को नीलामी में हिस्सा लेना पड़ता है। सर्वाधिक बोली लगाने वाले को नंबर आवंटित कर दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है।
जिन्हें नंबर आवंटित नहीं होते उनका रिफंड खातों में वापस आ जाता है। इस प्रक्रिया में करीब एक महीना लग जाता है। पिछले दिनों आरबीआई की गाइडलाइन आने से रिफंड रुक गया था। इसमें जिले से 29 आवेदक शामिल थे।
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इन्हें आवेदन करने के बाद भी वीआईपी नंबर नहीं मिला था। इनके करीब 3.97 लाख रुपये फंस गए थे। आवेदकों ने कार्यालय के चक्कर लगाने शुरू किए। अब नई एसओपी तैयार हो गई है। इसमें एक फार्म आवेदक को भरना होगा। उसे अधिकारी सत्यापित करेंगे। एक फार्म को बैंक सत्यापन करेगा।
फिर बैंक से सत्यापन होने के बाद अधिकारी लखनऊ भेजेंगे। इससे आवेदकों को राहत मिली है। विभाग ने बैंक से सत्यापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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400 से अधिक ऐसे वीआईपी नंबर हैं, इनके लिए वाहन मालिकों को बोली लगानी पड़ती है। इसमें 0001, 0002, 0786 जैसे नंबर मुख्य हैं।
इन वीआईपी नंबरों के लिए वाहन मालिकों को नीलामी में हिस्सा लेना पड़ता है। सर्वाधिक बोली लगाने वाले को नंबर आवंटित कर दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है।
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जिन्हें नंबर आवंटित नहीं होते उनका रिफंड खातों में वापस आ जाता है। इस प्रक्रिया में करीब एक महीना लग जाता है। पिछले दिनों आरबीआई की गाइडलाइन आने से रिफंड रुक गया था। इसमें जिले से 29 आवेदक शामिल थे।
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इन्हें आवेदन करने के बाद भी वीआईपी नंबर नहीं मिला था। इनके करीब 3.97 लाख रुपये फंस गए थे। आवेदकों ने कार्यालय के चक्कर लगाने शुरू किए। अब नई एसओपी तैयार हो गई है। इसमें एक फार्म आवेदक को भरना होगा। उसे अधिकारी सत्यापित करेंगे। एक फार्म को बैंक सत्यापन करेगा।
फिर बैंक से सत्यापन होने के बाद अधिकारी लखनऊ भेजेंगे। इससे आवेदकों को राहत मिली है। विभाग ने बैंक से सत्यापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।