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जहरीली होती नदियों को बचाने के लिए आज 42 गांव में मंथन
Updated Wed, 27 Jun 2018 01:01 AM IST
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बागपत। हिंडन के खोए हुए स्वरूप से बचाने के लिए जनता से विचार मंथन होगा। किन कारणों से नदियां दूषित और जहरीली हो रही है, इसका पता लगाकर समाप्त किया जाएगा। बुधवार को पिलाना विकास खंड के 42 गांवों में मंथन होगा। नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी ।
डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने बताया हिंडन और सहायक नदियां अपना स्वरूप खो चुकी है। इसका खामियाजा आम जन को भुगतना पड़ रहा है। प्रधानों से आह्वान किया कि वह आने वाली पीढ़ी की विरासत को नष्ट होने से बचाने के लिए आगे आए। जिन कारणों से हमारी ये पवित्र नदी जहरीली और गंदी हो गई है, उन कारणों को समाप्त करें। पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है, जिसमें जीवन को संभालने की क्षमता है। जिन नदियों ने हमें जीवनदान दिया, उन नदियों में हम प्रतिदिन किसी न किसी रूप में जहर घोल रहे हैं। गांवों का मलमूत्र, गोबर और अन्य कचरा नाली-नालों में डालते हैं जो नदियों में पहुंच रहा है। तालाब गंदगी से अटे है। दुर्गंध और जहरीले पदार्थ मिलकर गांव का जीवन नारकीय बना रहे हैं। प्रधानों से अपील की कि नदियों को निर्मल, स्वच्छ एवं अविरल बनने में सहयोग करें। निर्मल हिंडन के हित में आवश्यक कार्यों की रूप रेखा और लक्ष्य निर्धारित करेंगे। डीएम ने बताया हरित खेती, ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन, तालाबों का पुनर्जीवन, सहभागिता पर विचार मंथन होगा।
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डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने बताया हिंडन और सहायक नदियां अपना स्वरूप खो चुकी है। इसका खामियाजा आम जन को भुगतना पड़ रहा है। प्रधानों से आह्वान किया कि वह आने वाली पीढ़ी की विरासत को नष्ट होने से बचाने के लिए आगे आए। जिन कारणों से हमारी ये पवित्र नदी जहरीली और गंदी हो गई है, उन कारणों को समाप्त करें। पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है, जिसमें जीवन को संभालने की क्षमता है। जिन नदियों ने हमें जीवनदान दिया, उन नदियों में हम प्रतिदिन किसी न किसी रूप में जहर घोल रहे हैं। गांवों का मलमूत्र, गोबर और अन्य कचरा नाली-नालों में डालते हैं जो नदियों में पहुंच रहा है। तालाब गंदगी से अटे है। दुर्गंध और जहरीले पदार्थ मिलकर गांव का जीवन नारकीय बना रहे हैं। प्रधानों से अपील की कि नदियों को निर्मल, स्वच्छ एवं अविरल बनने में सहयोग करें। निर्मल हिंडन के हित में आवश्यक कार्यों की रूप रेखा और लक्ष्य निर्धारित करेंगे। डीएम ने बताया हरित खेती, ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन, तालाबों का पुनर्जीवन, सहभागिता पर विचार मंथन होगा।
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