{"_id":"67f421b4cf458acfc90bfa7a","slug":"2000-years-old-wheat-variety-sona-moti-crop-is-ready-baghpat-news-c-28-1-bpt1002-129356-2025-04-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Baghpat News: 2000 साल पुरानी गेहूं की किस्म सोना-मोती की फसल तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baghpat News: 2000 साल पुरानी गेहूं की किस्म सोना-मोती की फसल तैयार
Tue, 08 Apr 2025 12:34 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Tue, 08 Apr 2025 12:34 AM IST
विज्ञापन
बागपत में 2000 साल पुरानी गेहूं की किस्म सोना-मोती की फसल तैयार की खबर से संबंधित फोटो। बागपत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत। किसान अब फसलों की पुरानी किस्मों की तरफ रुख करने लगे हैं। यहां सिसाना गांव में किसान सुनील चौहान ने इसके लिए कदम बढ़ाते हुए दो हजार साल पुरानी गेहूं की किस्म सोना-मोती की ढाई बीघा में बुवाई की। फसल अब तैयार हो रही हैं और बंपर पैदावार की उम्मीद है। सोना-मोती डायबिटीज व हृदय रोगी के लिए लाभकारी है और बाजार में इसका दाम 80 से 150 रुपये किलो है।
सिसाना गांव के सुनील चौहान फसलों की नई किस्मों की बुवाई करके प्रयोग करते रहते हैं। उन्होंने पिछले साल धान की कई नई किस्मों की बुवाई की थी। वहीं अब दो हजार साल पुराने सोना-मोती गेहूं की फसल की ढाई बीघा में बुवाई की। इसका बीज देहरादून में एक पूर्व वैज्ञानिक के यहां से लेकर आए। उन्होंने बताया कि ढाई बीघा में 15 क्विंटल के करीब गेहूं का उत्पादन होता है और यहां भी इतनी ही पैदवार की उम्मीद है।
बताया कि यह प्रजाति न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह हड़प्पा सभ्यता काल की किस्म भी मानी जाती है। यह प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों का अच्छा स्रोत है। सोना मोती गेहूं में ग्लूटेन और ग्लाइसेमिक सूचकांक कम होने के कारण यह मधुमेह और हृदय की पीड़ितों के लिए काफी लाभकारी है। इसमें रोग लगने का खतरा कम होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सिसाना गांव के सुनील चौहान फसलों की नई किस्मों की बुवाई करके प्रयोग करते रहते हैं। उन्होंने पिछले साल धान की कई नई किस्मों की बुवाई की थी। वहीं अब दो हजार साल पुराने सोना-मोती गेहूं की फसल की ढाई बीघा में बुवाई की। इसका बीज देहरादून में एक पूर्व वैज्ञानिक के यहां से लेकर आए। उन्होंने बताया कि ढाई बीघा में 15 क्विंटल के करीब गेहूं का उत्पादन होता है और यहां भी इतनी ही पैदवार की उम्मीद है।
विज्ञापन
बताया कि यह प्रजाति न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह हड़प्पा सभ्यता काल की किस्म भी मानी जाती है। यह प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों का अच्छा स्रोत है। सोना मोती गेहूं में ग्लूटेन और ग्लाइसेमिक सूचकांक कम होने के कारण यह मधुमेह और हृदय की पीड़ितों के लिए काफी लाभकारी है। इसमें रोग लगने का खतरा कम होता है।
विज्ञापन