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आवारा और जंगली जानवर दे रहे किसानों को टेंशन
Updated Sun, 30 Sep 2018 01:08 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
जनपद के नगरीय और देहात क्षेत्र के गांवों में आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। प्रतिवर्ष लाखों रुपये की फसल पशुओं द्वारा बर्बाद की जा रही है। इससे निजात पाने के लिए किसानों को भीषण गर्मी व कड़ाके की ठंड में रात्रि में शेडयूल के मुताबिक किसानों को खेतों में पहरेदारी करनी पड़ रही है, इसके बाद भी छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। तीन माह पूर्व क्षेत्र के किसानों ने काफी संख्या मेें आवारा पशुओं को तहसील में बांधकर धरना भी दिया, लेकिन किसान सैकड़ों शिकायतें इस संबंध में कर थक चुके है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इससे किसानों मेें आक्रोश पनपता जा रहा है।
क्षेत्र के हजारों किसान जहां आज बकाया गन्ना भुगतान और बढ़ी विद्युत दरों की समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहीं नगर और क्षेत्र में आवारा और जंगली जानवरों की बढ़ती संख्या अब परेशानियों का सबब बन चुकी है। एक तो पहले से बकाया गन्ना भुगतान न होने से किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, ऊपर से आवारा पशुओं द्वारा तबाह की जा रही फसलों से वर्तमान मेें आय का स्त्रोत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आलम यह है कि प्रशासनिक और जन प्रतिनिधियों से शिकायत करने के बाद भी हल न होने पर अब किसानों को मजबूरी में पिछले एक साल से भीषण गर्मी व कड़ाके की ठंड मेें फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए रात्रि में शेडयूल के मुताबिक पहरेदारी करनी पड़ रही हैं।
किरठल गांव के किसान पुष्पेंद्र चौहान, बड़ौली के ओमपाल, हरेंद्र, गुराना गांव के उधम सहित क्षेत्र के किरण सिंह, सत्यवीर, ब्रह्मपाल, सुरेंद्र, महीपाल, विनोद, तेजपाल व ओमवीर का कहना है कि क्षेत्र में किसानों के खेतों में आए दिन जंगली जानवरों व आवारा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। जो काफी मात्रा में फसल को नुकसान पहुंचाते है। दुखी होते हुए किसानों ने बताया कि रात्रि में परिवार की महिलाओं व बेटियों को अकेले घर पर छोड़कर खेतों में आवारा पशुओं के कारण पहरेदारी करनी पड़ती है। कई बार तो खूंखार जंगली जानवरों किसानों पर हमला बोल देते हैं। इस संबंध में एसडीएम आशीष कुमार का कहना था कि इस संबंध में शिकायत मिल रही है। सीएम के आदेशानुसार जल्द ही तहसील क्षेत्र मेें कई गांवों में गोशाला का निर्माण कराया जाएगा, ताकि किसानों को इससे निजात मिल सके।
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कई बार हो चुका है खून खराबा
बड़ौत। आवारा पशुओं की समस्या इतनी भीषण हो गई कि जब कोई किसान अपने खेत से आवारा पशुओं को निकाला है तो आवारा पशु दूसरे खेतों में घुसने का प्रयास करते हैं, इस दौरान वहां पर पहुंचे खेत मालिक से दूसरे किसान के साथ नोकझोंक, मारपीट तक हो जाती है। मलकपुर, दोघट, बामनौली, जौनमाना, बिजरौल आदि गांवों में किसानों के बीच आवारा पशुओं को लेकर कई बार मारपीट की घटनाएं हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
भूखमरी की कगार पर पहुंचे कई किसान के परिवार
बड़ौत। मलकपुर चीनी मिल से जुडे़ मलकपुर, ढ़िकाना, बावली, बड़ौली गांव में एक दर्जन से अधिक ऐसे परिवार हैं जो आवारा पशुओं के चलते भूखमरी की कगार पर पहुंच गए है। मलकपुर गांव के इंद्रपाल के पास 10 बीघा जमीन है। उसने छह बीघा में ईख की फसल बोयी थी। बाकी में ज्वार, धान व सरसों। गन्ना का बकाया गन्ना भुगतान मिल दबाएं बैठा है। पिछले डेढ़ साल से कोई भुगतान नहीं है। जैसे-तैसे कर किसान ने बाकी दो बीघा में ज्वार बोई तो उसे आवारा पशु खा गए। इससे घर में बंधे पशुओं को भी चारा की व्यवस्था को लेकर परेशानी हुई। सरसों बोई तो उसे भी आवारा पशुओं ने नष्ट कर दिया। फिलहाल इंद्रपाल भूखमरी की कगार पर है। उसके तीन बेटी और एक बेटा है, उनका पालन करने में परेशानी हो रही है। यह तो एक उदाहरण मात्र है, ऐसे क्षेत्र में सैकड़ों किसान हैं जो आवारा पशुओं और बकाया गन्ना भुगतान की वजह से भूखमरी की कगार पर पहुंचे गए हैं।
आए दिन हो रहे हादसे
बड़ौत। आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या से किसान ही नहीं सड़कों पर चलने वाले राहगीर, बाइक सवार व अन्य वाहन चालक भी है। चारे की तलाश में आवारा पशु अचानक सड़क पर आ जाते है। यह कारण है कि प्रतिदिन लोगों के साथ दुघर्टना हो रही है।
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जनपद के नगरीय और देहात क्षेत्र के गांवों में आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। प्रतिवर्ष लाखों रुपये की फसल पशुओं द्वारा बर्बाद की जा रही है। इससे निजात पाने के लिए किसानों को भीषण गर्मी व कड़ाके की ठंड में रात्रि में शेडयूल के मुताबिक किसानों को खेतों में पहरेदारी करनी पड़ रही है, इसके बाद भी छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। तीन माह पूर्व क्षेत्र के किसानों ने काफी संख्या मेें आवारा पशुओं को तहसील में बांधकर धरना भी दिया, लेकिन किसान सैकड़ों शिकायतें इस संबंध में कर थक चुके है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इससे किसानों मेें आक्रोश पनपता जा रहा है।
क्षेत्र के हजारों किसान जहां आज बकाया गन्ना भुगतान और बढ़ी विद्युत दरों की समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहीं नगर और क्षेत्र में आवारा और जंगली जानवरों की बढ़ती संख्या अब परेशानियों का सबब बन चुकी है। एक तो पहले से बकाया गन्ना भुगतान न होने से किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, ऊपर से आवारा पशुओं द्वारा तबाह की जा रही फसलों से वर्तमान मेें आय का स्त्रोत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आलम यह है कि प्रशासनिक और जन प्रतिनिधियों से शिकायत करने के बाद भी हल न होने पर अब किसानों को मजबूरी में पिछले एक साल से भीषण गर्मी व कड़ाके की ठंड मेें फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए रात्रि में शेडयूल के मुताबिक पहरेदारी करनी पड़ रही हैं।
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किरठल गांव के किसान पुष्पेंद्र चौहान, बड़ौली के ओमपाल, हरेंद्र, गुराना गांव के उधम सहित क्षेत्र के किरण सिंह, सत्यवीर, ब्रह्मपाल, सुरेंद्र, महीपाल, विनोद, तेजपाल व ओमवीर का कहना है कि क्षेत्र में किसानों के खेतों में आए दिन जंगली जानवरों व आवारा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। जो काफी मात्रा में फसल को नुकसान पहुंचाते है। दुखी होते हुए किसानों ने बताया कि रात्रि में परिवार की महिलाओं व बेटियों को अकेले घर पर छोड़कर खेतों में आवारा पशुओं के कारण पहरेदारी करनी पड़ती है। कई बार तो खूंखार जंगली जानवरों किसानों पर हमला बोल देते हैं। इस संबंध में एसडीएम आशीष कुमार का कहना था कि इस संबंध में शिकायत मिल रही है। सीएम के आदेशानुसार जल्द ही तहसील क्षेत्र मेें कई गांवों में गोशाला का निर्माण कराया जाएगा, ताकि किसानों को इससे निजात मिल सके।
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कई बार हो चुका है खून खराबा
बड़ौत। आवारा पशुओं की समस्या इतनी भीषण हो गई कि जब कोई किसान अपने खेत से आवारा पशुओं को निकाला है तो आवारा पशु दूसरे खेतों में घुसने का प्रयास करते हैं, इस दौरान वहां पर पहुंचे खेत मालिक से दूसरे किसान के साथ नोकझोंक, मारपीट तक हो जाती है। मलकपुर, दोघट, बामनौली, जौनमाना, बिजरौल आदि गांवों में किसानों के बीच आवारा पशुओं को लेकर कई बार मारपीट की घटनाएं हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
भूखमरी की कगार पर पहुंचे कई किसान के परिवार
बड़ौत। मलकपुर चीनी मिल से जुडे़ मलकपुर, ढ़िकाना, बावली, बड़ौली गांव में एक दर्जन से अधिक ऐसे परिवार हैं जो आवारा पशुओं के चलते भूखमरी की कगार पर पहुंच गए है। मलकपुर गांव के इंद्रपाल के पास 10 बीघा जमीन है। उसने छह बीघा में ईख की फसल बोयी थी। बाकी में ज्वार, धान व सरसों। गन्ना का बकाया गन्ना भुगतान मिल दबाएं बैठा है। पिछले डेढ़ साल से कोई भुगतान नहीं है। जैसे-तैसे कर किसान ने बाकी दो बीघा में ज्वार बोई तो उसे आवारा पशु खा गए। इससे घर में बंधे पशुओं को भी चारा की व्यवस्था को लेकर परेशानी हुई। सरसों बोई तो उसे भी आवारा पशुओं ने नष्ट कर दिया। फिलहाल इंद्रपाल भूखमरी की कगार पर है। उसके तीन बेटी और एक बेटा है, उनका पालन करने में परेशानी हो रही है। यह तो एक उदाहरण मात्र है, ऐसे क्षेत्र में सैकड़ों किसान हैं जो आवारा पशुओं और बकाया गन्ना भुगतान की वजह से भूखमरी की कगार पर पहुंचे गए हैं।
आए दिन हो रहे हादसे
बड़ौत। आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या से किसान ही नहीं सड़कों पर चलने वाले राहगीर, बाइक सवार व अन्य वाहन चालक भी है। चारे की तलाश में आवारा पशु अचानक सड़क पर आ जाते है। यह कारण है कि प्रतिदिन लोगों के साथ दुघर्टना हो रही है।