{"_id":"5a4bdfe84f1c1b36198b483d","slug":"191514921960-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरूकुल हमारी प्राचीन संस्कृति- विराग सागर महाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरूकुल हमारी प्राचीन संस्कृति- विराग सागर महाराज
Updated Wed, 03 Jan 2018 01:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरुकुल हमारी प्राचीन संस्कृति : विराग सागर महाराज
बिनौली (बागपत)। जैन संत आचार्य विराग सागर महाराज ससंघ मंगलवार को बिनौली से पद विहार कर बरनावा पहुंचे। जैन समाज के लोगों ने उनका बैंडबाजों और फूलों की वर्षा कर भव्य स्वागत किया।
ज्ञान सागर गुरुकुल में हुई धर्म सभा में आचार्य विराग सागर महाराज ने कहा कि गुरुकुल हमारी प्राचीन संस्कृति है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुलों में विद्या अध्य्यन करते थे। गुरुकुलों में विद्या अध्ययन का अर्थ ये नहीं कि केवल वहां मौखिक शिक्षा दी जाती थी, बल्कि विभिन्न विद्याओं के प्रैक्टिकल भी कराए जाते थे। गुरुकुलों में अच्छे संस्कार मिलते हैं। जीवन जीने की कला सीखने को मिलती है।
उन्होंने कहा गुरुकुल के बच्चे भविष्य के निर्माता बने तथा समाज सृजन और राष्ट्र निर्माण में सहभागिता करें। जैन संत विहर्ष सागर महाराज एवं विहसंत सागर महाराज ने भी विचार व्यक्त किये। इसके उपरांत जैन संत ससंघ चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। वहां जैन संतों की आरती उतारी गई। संतों ने मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद संतों का संघ लाक्षागृह पहुंचा। वहां उन्होंने प्राचीन अवशेष देखे। इस अवसर पर ब्रह्मचारी अतुल भैय्या, राकेश जैन, श्रवण जैन, गौतमचंद जैन, वीरेंद्र जैन, अवनीश जैन नीटू, फूलचंद जैन, मनोज जैन, विशाल जैन, पंकज जैन, संदीप जैन, अरुण जैन, देवेंद्र जैन, मोहित जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिनौली (बागपत)। जैन संत आचार्य विराग सागर महाराज ससंघ मंगलवार को बिनौली से पद विहार कर बरनावा पहुंचे। जैन समाज के लोगों ने उनका बैंडबाजों और फूलों की वर्षा कर भव्य स्वागत किया।
ज्ञान सागर गुरुकुल में हुई धर्म सभा में आचार्य विराग सागर महाराज ने कहा कि गुरुकुल हमारी प्राचीन संस्कृति है। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुलों में विद्या अध्य्यन करते थे। गुरुकुलों में विद्या अध्ययन का अर्थ ये नहीं कि केवल वहां मौखिक शिक्षा दी जाती थी, बल्कि विभिन्न विद्याओं के प्रैक्टिकल भी कराए जाते थे। गुरुकुलों में अच्छे संस्कार मिलते हैं। जीवन जीने की कला सीखने को मिलती है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा गुरुकुल के बच्चे भविष्य के निर्माता बने तथा समाज सृजन और राष्ट्र निर्माण में सहभागिता करें। जैन संत विहर्ष सागर महाराज एवं विहसंत सागर महाराज ने भी विचार व्यक्त किये। इसके उपरांत जैन संत ससंघ चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। वहां जैन संतों की आरती उतारी गई। संतों ने मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद संतों का संघ लाक्षागृह पहुंचा। वहां उन्होंने प्राचीन अवशेष देखे। इस अवसर पर ब्रह्मचारी अतुल भैय्या, राकेश जैन, श्रवण जैन, गौतमचंद जैन, वीरेंद्र जैन, अवनीश जैन नीटू, फूलचंद जैन, मनोज जैन, विशाल जैन, पंकज जैन, संदीप जैन, अरुण जैन, देवेंद्र जैन, मोहित जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन