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किसान संगठनों ने मिलकर बनाया किसान समन्वय मंच
Updated Mon, 25 Sep 2017 01:15 AM IST
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दोघट (बागपत)। सीबीएसएम पब्लिक स्कूल, भड़ल में किसान अधिकार आंदोलन के तत्वावधान में किसानों की समस्याओं को लेकर चल रहे दो दिवसीय विचार मंथन कार्यक्रम का समापन हुआ। इसमें सभी किसान संगठनों ने मिलकर किसान अधिकार समन्वय मंच की स्थापना की।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा सांसद के एक माह के वेतन और भत्ते के बराबर किसान की वार्षिक आय सुनिश्चित होनी चाहिए। किसानों की भूमि अधिग्रहण नहीं होनी चाहिए। किसानों के कर्ज पूर्ण रूप से माफ होने चाहिए। 60 वर्ष से ऊपर के किसानों की पेंशन होनी चाहिए। शिक्षित युवाओं को रोजगार गारंटी के तहत रोजगार मिलना चाहिए। स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं होनी चाहिए। यह किसान विरोधी है।
इसमें यूपी, हरियाणा, दिल्ली एवं राजस्थान से आए किसान संगठनों के नेताओं ने किसानों की समस्याओं को उठाने के लिए किसान अधिकार समन्वय मंच की स्थापना की। इसके संयोजक चौधरी नरेंद्र राणा को बनाया । इस मंच के माध्यम से पूरे भारत के किसानों की समस्याओं को उठाया जाएगा। इसकी आगामी बैठक 23 और 24 अक्तूबर को गोंडा में होगी। इसकी अध्यक्षता शिवाजी राय देवरिया ने की। संचालन जिया लाल हरियाणा ने किया। इसमें नरेंद्र राणा, ईश्वर सिंह चहल हरियाणा, रणधीर सिंह हरियाणा, अनिरुद्ध मुखिया, संजय कुमार अमेठी, उमेश मिश्रा लखनऊ, सतेंद्र बालियान, महेश सिंह गोंडा, रमनदीप सिंह मान दिल्ली, कृष्णपाल दिल्ली, दीवान सिंह दिल्ली आदि ने विचार व्यक्त किए।
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कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा सांसद के एक माह के वेतन और भत्ते के बराबर किसान की वार्षिक आय सुनिश्चित होनी चाहिए। किसानों की भूमि अधिग्रहण नहीं होनी चाहिए। किसानों के कर्ज पूर्ण रूप से माफ होने चाहिए। 60 वर्ष से ऊपर के किसानों की पेंशन होनी चाहिए। शिक्षित युवाओं को रोजगार गारंटी के तहत रोजगार मिलना चाहिए। स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं होनी चाहिए। यह किसान विरोधी है।
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इसमें यूपी, हरियाणा, दिल्ली एवं राजस्थान से आए किसान संगठनों के नेताओं ने किसानों की समस्याओं को उठाने के लिए किसान अधिकार समन्वय मंच की स्थापना की। इसके संयोजक चौधरी नरेंद्र राणा को बनाया । इस मंच के माध्यम से पूरे भारत के किसानों की समस्याओं को उठाया जाएगा। इसकी आगामी बैठक 23 और 24 अक्तूबर को गोंडा में होगी। इसकी अध्यक्षता शिवाजी राय देवरिया ने की। संचालन जिया लाल हरियाणा ने किया। इसमें नरेंद्र राणा, ईश्वर सिंह चहल हरियाणा, रणधीर सिंह हरियाणा, अनिरुद्ध मुखिया, संजय कुमार अमेठी, उमेश मिश्रा लखनऊ, सतेंद्र बालियान, महेश सिंह गोंडा, रमनदीप सिंह मान दिल्ली, कृष्णपाल दिल्ली, दीवान सिंह दिल्ली आदि ने विचार व्यक्त किए।
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