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बागपत में न गन्ने की छिलाई, न गेहूं की बुआई, आखिर क्या करें किसान भाई

Tue, 04 Dec 2018 01:20 AM IST
Updated Tue, 04 Dec 2018 01:20 AM IST
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बागपत में न गन्ने की छिलाई, न गेहूं की बुआई, आखिर क्या करें किसान भाई
बागपत। सीजन तो किसानों की बेहद व्यस्तता का चल रहा है, लेकिन जिले के अधिकतर किसान इंडेंट न मिलने और खातों में संशोधन न होने के कारण परेशान हैं। पर्चियां ही नहीं तो गन्ने की छिलाई नहीं और अगर खेत ही खाली नहीं तो गेहूं की बुआई ने अभी तक तेजी नहीं पकड़ी है। जबकि गेहूं की बुआई का यह सबसे अच्छा मौसम है। दिसंबर के बाद गेहूं की बुआई को अच्छा नहीं माना जाता। सोमवार को भी बागपत गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में समस्याएं लेकर पहुंचे किसानों की कतार लगी रही। किसानों का कहना है कि गलत तरीके से खाते दर्शाए हैं। किसी के खाते में पर्चियां कम हैं, किसी के खेत में अगेती प्रजाति का गन्ना खड़ा है, लेकिन एक भी पर्ची अभी तक जारी नहीं की जा सकी है। अब्दुल्लापुर मेवला के किसान देवेंद्र का कहना है कि खाते में सही पर्चियां नहीं दिखाई, इससे वह परेशान हैं। सरूरपुर कलां, मवी खुर्द, बसी समेत समिति क्षेत्र के दर्जनभर से अधिक गांवों के किसान सुबह से ही यहां पर कतार में लगे थे। किसानों ने कहा इंडेंट जारी नहीं करने, खातों में संशोधन, पर्ची कम दर्शाने सहित कई समस्याएं हैं। जो समय उनके खेत में काम करने का है, उस समय में वह दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं।
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किसने क्या कहा
प्रभारी डीसीओ विनीत कुमार का कहना है कि उनके स्तर की जो भी समस्याएं हैं, उनका समाधान प्राथमिकता के साथ कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
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युवा किसान क्लब के अध्यक्ष सुभाष नैन का कहना है कि किसानों के यदि खेत ही खाली नहीं होंगे तो आखिर वह गेहूं की बुआई कैसे करेगा। समय पर इंडेंट जारी किया जाना चाहिए।
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रालोद नेता नीरज पंडित का कहना है कि इस वक्त किसानों को गेहूं बुआई के लिए खेत खाली करने की चिंता है, लेकिन गन्ने की सप्लाई के लिए इंडेंट ही जारी नहीं किया जा रहा है।
गन्ना विकास समिति के चेयरमैन कृष्णपाल का कहना है कि बागपत मिल में खराबी के चलते इंडेंट जारी नहीं किया। मिल का संचालन रूटीन पर आते ही समस्याओं का समाधान हो जाएगा।



अब तक 10 फीसदी गेहूं की हो सकी बुआई
बागपत। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार का कहना है कि जिले में करीब 55 हजार हेक्टेयर रकबे पर गेहूं की बुआई होती है। फिलहाल सिर्फ 10 फीसदी गेहूं की बुआई ही हुई है।
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