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अनशनकारियों की किसी अधिकारी ने सुध नहीं ली
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बड़ौत (बागपत)।
चकबंदी समस्या हल कराने की मांग को लेकर बामनौली के लोगों का तहसील परिसर में आमरण अनशन दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रहा। किसी भी अधिकारी ने अनशनकारियों की सुध नहीं ली। मौसम खराब होने ने कई महिला अनशनकारियों की तबियत भी खराब हो गई।
तहसील परिसर में सोमवार को कमल पुत्र राम कुमार, सतेंद्र पुत्र परशुराम, गुलबीर पुत्र जीत सिंह, नीरज पुत्र कृष्ण, प्रकाशी, प्रमिला, कमला, नीटू निवासी बामनौली आमरण अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने कहा चकबंदी प्रक्रिया में काफी समस्याएं हो रही है, लेकिन बार-बार शिकायत के बाद उचित समाधान नहीं हुआ। वे अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। अब उनकी उम्मीद समाप्त हो चुकी है, उनका कानून व्यवस्था से विश्वास उठ चुका है, हम तभी उठेंगे, जब हमारी समस्याओं का समाधान होगा। दूसरे दिन भी मंगलवार को पीड़ितों का आमरण अनशन जारी रहा, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनकी सुध नहीं लगी। उनका कहना था कि महिलाओं की तबियत बिगड़ने लगी है और न ही किसी ने चिकित्सकों का प्रबंध किया। उन्होंने कहा अधिकारी ग्रामीणों की समस्या हल कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा पनप रहा है। ग्रामीणों का गुस्सा कभी भी उग्र आंदोलन का रुप ले सकता है।
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चकबंदी समस्या हल कराने की मांग को लेकर बामनौली के लोगों का तहसील परिसर में आमरण अनशन दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रहा। किसी भी अधिकारी ने अनशनकारियों की सुध नहीं ली। मौसम खराब होने ने कई महिला अनशनकारियों की तबियत भी खराब हो गई।
तहसील परिसर में सोमवार को कमल पुत्र राम कुमार, सतेंद्र पुत्र परशुराम, गुलबीर पुत्र जीत सिंह, नीरज पुत्र कृष्ण, प्रकाशी, प्रमिला, कमला, नीटू निवासी बामनौली आमरण अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने कहा चकबंदी प्रक्रिया में काफी समस्याएं हो रही है, लेकिन बार-बार शिकायत के बाद उचित समाधान नहीं हुआ। वे अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। अब उनकी उम्मीद समाप्त हो चुकी है, उनका कानून व्यवस्था से विश्वास उठ चुका है, हम तभी उठेंगे, जब हमारी समस्याओं का समाधान होगा। दूसरे दिन भी मंगलवार को पीड़ितों का आमरण अनशन जारी रहा, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनकी सुध नहीं लगी। उनका कहना था कि महिलाओं की तबियत बिगड़ने लगी है और न ही किसी ने चिकित्सकों का प्रबंध किया। उन्होंने कहा अधिकारी ग्रामीणों की समस्या हल कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा पनप रहा है। ग्रामीणों का गुस्सा कभी भी उग्र आंदोलन का रुप ले सकता है।
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