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चर्म शोधन इकाइयों को लेकर टकराव के आसार
Updated Fri, 05 Oct 2018 01:16 AM IST
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दोघट (बागपत)।
भड़ल गांव में चर्म शोधन इकाइयों के स्थानांतरण को लेकर ग्रामीण और इकाई संचालक आमने-सामने आ गए हैं। इकाइयों को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर ग्रामीणों 25 दिन से धरने पर बैठे हैं। जबकि बृहस्पतिवार से इकाई संचालकों ने भी गांव में अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया। इसको लेकर दोनों पक्षों में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। सूचना पर कानूनगो और लेखपाल ने गांव पहुंचकर दोनों पक्षों से बातचीत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। शुक्रवार को ग्रामीण पंचायत कर बड़ौत-बुढ़ाना मार्ग जाम करेंगे।
गांव में चर्म शोधन इकाइयों के विरोध में धरने पर बैठे ग्रामीणों ने कहा 25 दिन से वे धरना दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने अभी तक कोई समाधान नहीं किया। डीएम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों की सुध तक नहीं ली। ग्रामीण कैसे जी रहे हैं, इसके बारे में नहीं सोचा। जब तक चर्म शोधन इकाइयों को स्थानांतरित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन को चार अक्तूबर तक का समय दिया है। प्रशासन को दिया समय खत्म हो गया है। पांच अक्तूबर को धरना स्थल पर पंचायत होगी। इसके बाद ग्रामीण बड़ौत-बुढ़ाना मार्ग पर पशुओं को बांधकर जाम लगा देंगे।
दूसरी तरफ चर्म शोधन इकाइयों के संचालकों ने भी अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया है। वक्ताओं ने कहा कि चर्म शोधन इकाई बंद होने से 110 परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। दो हजार के लगभग लोगों का रोजगार छिन गया है। ग्राम समाज ने चर्म शोधन इकाइयों को जमीन दी, वह दशकों पहले मुर्दा मवेशियों के अवशेष डालने के लिए छोड़ी गई है। प्रत्येक इकाई को करीब एक सौ मीटर भूमि चाहिए, तभी इकाइयां स्थानांतरित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कुछ ग्रामीण उन्हें इकाई बंद न करने पर मारने की धमकी दे रहे हैं। उनके परिवार भयभीत है। उन्होंने डीएम से मांगी कि बंद इकाइयों को चालू करने की अनुमति दी जाए। जब तक पर्याप्त मात्र भूमि नहीं मिलेगी, तब तक वे इकाइयों को स्थानांतरित नहीं करेंगे।
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शुक्रवार को एसडीएम बड़ौत आशीष कुमार के आदेश पर कानूनगो दीपक कुमार, लेखपाल धर्मेंद्र और कृष्णपाल शर्मा ने गांव में पहुंचकर दोनों पक्षों से वार्ता की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। दोनों पक्षों ने कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन चलता रहेगा। ग्रामीणों के धरने पर देवेंद्र प्रधान, रमेश राणा, विक्रम राणा, विनोद, सुखवीर, कालूराम, तेजपाल, भोपाल, कर्ण सिंह, आनंद पाल, डॉ. यशपाल, ईश्वर सिंह, कृष्णपाल, राजवीर, कल्लू सिंह, बिल्लू आदि रहे। दूसरी तरफ चर्म शोधन इकाइयों के संचालकों के धरने पर आनंद पाल, सुखपाल, शिवकुमार, मदन पाल, रामदास, ऋषिपाल, ओमपाल, इलम, प्रकाश, सोमपाल, राजबाला, मुन्नी, शशि, श्यामो, फुल्लो देवी, ममता, बाला, रविता, लक्ष्मी आदि रहे।
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भड़ल गांव में चर्म शोधन इकाइयों के स्थानांतरण को लेकर ग्रामीण और इकाई संचालक आमने-सामने आ गए हैं। इकाइयों को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर ग्रामीणों 25 दिन से धरने पर बैठे हैं। जबकि बृहस्पतिवार से इकाई संचालकों ने भी गांव में अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया। इसको लेकर दोनों पक्षों में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। सूचना पर कानूनगो और लेखपाल ने गांव पहुंचकर दोनों पक्षों से बातचीत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। शुक्रवार को ग्रामीण पंचायत कर बड़ौत-बुढ़ाना मार्ग जाम करेंगे।
गांव में चर्म शोधन इकाइयों के विरोध में धरने पर बैठे ग्रामीणों ने कहा 25 दिन से वे धरना दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने अभी तक कोई समाधान नहीं किया। डीएम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों की सुध तक नहीं ली। ग्रामीण कैसे जी रहे हैं, इसके बारे में नहीं सोचा। जब तक चर्म शोधन इकाइयों को स्थानांतरित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन को चार अक्तूबर तक का समय दिया है। प्रशासन को दिया समय खत्म हो गया है। पांच अक्तूबर को धरना स्थल पर पंचायत होगी। इसके बाद ग्रामीण बड़ौत-बुढ़ाना मार्ग पर पशुओं को बांधकर जाम लगा देंगे।
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दूसरी तरफ चर्म शोधन इकाइयों के संचालकों ने भी अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया है। वक्ताओं ने कहा कि चर्म शोधन इकाई बंद होने से 110 परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। दो हजार के लगभग लोगों का रोजगार छिन गया है। ग्राम समाज ने चर्म शोधन इकाइयों को जमीन दी, वह दशकों पहले मुर्दा मवेशियों के अवशेष डालने के लिए छोड़ी गई है। प्रत्येक इकाई को करीब एक सौ मीटर भूमि चाहिए, तभी इकाइयां स्थानांतरित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कुछ ग्रामीण उन्हें इकाई बंद न करने पर मारने की धमकी दे रहे हैं। उनके परिवार भयभीत है। उन्होंने डीएम से मांगी कि बंद इकाइयों को चालू करने की अनुमति दी जाए। जब तक पर्याप्त मात्र भूमि नहीं मिलेगी, तब तक वे इकाइयों को स्थानांतरित नहीं करेंगे।
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शुक्रवार को एसडीएम बड़ौत आशीष कुमार के आदेश पर कानूनगो दीपक कुमार, लेखपाल धर्मेंद्र और कृष्णपाल शर्मा ने गांव में पहुंचकर दोनों पक्षों से वार्ता की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। दोनों पक्षों ने कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन चलता रहेगा। ग्रामीणों के धरने पर देवेंद्र प्रधान, रमेश राणा, विक्रम राणा, विनोद, सुखवीर, कालूराम, तेजपाल, भोपाल, कर्ण सिंह, आनंद पाल, डॉ. यशपाल, ईश्वर सिंह, कृष्णपाल, राजवीर, कल्लू सिंह, बिल्लू आदि रहे। दूसरी तरफ चर्म शोधन इकाइयों के संचालकों के धरने पर आनंद पाल, सुखपाल, शिवकुमार, मदन पाल, रामदास, ऋषिपाल, ओमपाल, इलम, प्रकाश, सोमपाल, राजबाला, मुन्नी, शशि, श्यामो, फुल्लो देवी, ममता, बाला, रविता, लक्ष्मी आदि रहे।