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टीले की दीवारों की वीडियोग्राफी, पुरावशेष मिले
Updated Sun, 28 Jan 2018 01:13 AM IST
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बिनौली (बागपत)। बरनावा में हिंडन नदी किनारे चल रहे उत्खनन कार्य में कई महत्वपूर्ण पुरावशेष मिले हैं। चित्रित धूसर मृदभांड के अवशेष मिलने से यहां करीब चार हजार साल पुरानी संस्कृति का अनुमान लगाया जा रहा है। टीले से बाहर दिख रही दीवारों की वीडियोग्राफी भी कराई गई। माना जा रहा है कि यहां भी उत्खनन किया जाएगा।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बरनावा में उत्खनन की मंजूरी दी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल के नेतृत्व में यहां उत्खनन कर रही है। शनिवार को भी उत्खनन कार्य जारी रहा। पुराने समय के मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं, जिनके काल क्रम का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। मिट्टी के बर्तनों को पॉटरी यार्ड में रखवा दिया गया है। यहां बरामद कुछ पुरावशेष चार हजार साल से भी अधिक पुराने हैं। जिनसे इस टीले पर महाभारतकालीन सभ्यता की पुष्टि होती है। कुषाण कालीन, मौर्य कालीन, सल्तनत कालीन सभ्यता के भी यहां से प्रमाण प्राप्त हुए हैं। पुरातत्वविदों की टीम ने कई जगह ट्रायल ट्रेंच लगाए हैं।
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केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बरनावा में उत्खनन की मंजूरी दी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल के नेतृत्व में यहां उत्खनन कर रही है। शनिवार को भी उत्खनन कार्य जारी रहा। पुराने समय के मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं, जिनके काल क्रम का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। मिट्टी के बर्तनों को पॉटरी यार्ड में रखवा दिया गया है। यहां बरामद कुछ पुरावशेष चार हजार साल से भी अधिक पुराने हैं। जिनसे इस टीले पर महाभारतकालीन सभ्यता की पुष्टि होती है। कुषाण कालीन, मौर्य कालीन, सल्तनत कालीन सभ्यता के भी यहां से प्रमाण प्राप्त हुए हैं। पुरातत्वविदों की टीम ने कई जगह ट्रायल ट्रेंच लगाए हैं।
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