खुदाई में 17 किलो की ईंटों वाली दीवार मिली
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नगर क्षेत्र के जंगल से कुंडली पेरिफेरल हाईवे के निर्माण हेतु आस पास के खेतों से ठेकेदार मिट्टी खरीद कर मार्ग तैयार करने के लिए वहां डाल रहे हैं। नगर के मोहल्ला औरंगाबाद निवासी किसान जवाहर सिंह पुत्र बेद सिंह के परिवार ने भी अपने खेतों की मिट्टी खुदाई के लिए दे रखी है। बृहस्पतिवार को जब मशीनों से मिट्टी की खुदाई कर डंपर में भरी जा रही थी, तभी वी आकार की ईंटों का निकलना शुरू हो गया। जब मशीन को आगे कुछ दूरी पर ले जाकर लगाया तो वहां भी ईंटों की पुरानी दीवार मशीन से टकराने लगी। इससे मिट्टी खुदाई का कार्य वहां नहीं हो सका।
मौके पर आसपास के किसान भी एकत्र हो गए और मशीन से उन्होंने करीब दस मीटर तक मिट्टी को ईंटों के किनारे से हटवाया तो वहां प्राचीन कालीर्न इंटों से निर्मित दीवार मिलती चली गयी। इसके बाद मशीन से दीवार पर मिट्टी डलवाकर वहां खनन का कार्य बंद कर दूसरी जगह शुरू कराया।
लोगों के बीच खेत में मिली प्राचीन कालीन दीवार और ईंटें खासा चर्चा का विषय बना है। किसान सत्रह किलोग्राम वजन वाली वी आकार की दो ईंटें उठाकर लोगों को दिखाने के लिए शाम के समय अपने घर पर भी ले आये। ईंट की चौड़ाई करीब दस इंच और लंबाई डेढ़ फुट है और मोटाई करीब छह ईंट है।
प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. केके शर्मा ने दीवार से मिली ईंटों को देखने के बाद बताया वह बड़ागांव क्षेत्र में लंबे समय से हड़प्पा एवं महाभारत कालीन मिले बर्तनों आदि पर शोध कर रहे हैं। यहां पर इस तरह की ईंटों की पुरानी दीवार मिलने से यह साफ है कि महाभारत काल में क्षेत्र में विकसित आबादी वाली बस्ती रही है। इस तरह की ईंटों का हड़प्पा कालीन युग में प्रयोग होता था। जिनका बाद में कुओं के निर्माण में भी प्रयोग होने लगा।
यहां पर सघन निरीक्षण के साथ गहन अध्ययन किया जाना अत्यंत जरूरी है, क्योंकि इस क्षेत्र में लंबे समय से खुदाई के दौरान हड़प्पा एवं महाभारत कालीन बर्तन, ईंटे आदि मिलती आ रही है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह ईंटें और बस्ती किस काल की रही होंगी। वह जल्द ही यहां पहुंच पुन अध्ययन करेंगे।