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बंद पड़े कैपेसिटर बैंक के नाम पर किसानों से वसूले 16 करोड़

Thu, 02 Jun 2022 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jun 2022 11:24 PM IST
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16 crore recovered from farmers in the name of closed capacitor bank
6.5 लाख किसानों की होती रही कैपेसिटर चार्ज वसूलने के नाम पर हर माह वसूली
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15 प्रतिशत कैपेसिटर चार्ज वसूलते थे निगम अधिकारी नलकूप बिजली बिल पर
2014-15 में लगाए गए थे कैपेसिटर, 2021 में निगम चार्ज वसूलना किया बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। भले ही पश्चिमांचल के 14 जनपदों के 680 बिजलीघरों पर लगे कैपेसिटर बैंक खराब पडे़ हो। मगर, इसके बावजूद ऊर्जा निगम हर माह लगभग साढ़े छह लाख किसानों से खराब पड़े कैपेसिटर बैंक के नाम पर चार्ज वसूलता रहा। वर्ष 2014-15 में कैपेसिटर लगाए गए थे। वर्ष 2021 में ही नलकूप बिजली बिल पर 15 प्रतिशत लगने वाले कैपेसिटर चार्ज पर रोक लगाई गई है। इसी बीच निगम किसानों से लगभग 16 करोड़ रुपये मात्र कैपेसिटर चार्ज के नाम पर ही वसूल चुका है। मामला उजागर होने पर किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे है।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014-2015 में बिजली की सप्लाई में लो वोल्टेज की समस्या के समाधान, लाइन लॉस कम कर बिजली बचाने और बिजलीघरों की मशीनें लंबे समय तक काम करें, इस मकसद से इन्हें लगवाया था। कुछ माह चलने के बाद इनमें तकनीकी खराबी आई और ये बंद होते चले गए। पीवीवीएनएल के अंतर्गत आने वाले मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, नोएडा, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, बिजनौर और अमरोहा जिलों में 830 बिजलीघरों पर इन्हें लगाया गया था। फिलहाल 150 बिजलीघरों पर ही ये चालू हैं।
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ऊर्जा निगम के रिकार्ड के अनुसार पश्चिमांचल के 14 जिलों में करीब 60 लाख उपभोक्ताओं में से किसानों के बिजली कनेक्शनों की संख्या लगभग नौ लाख है। इन किसानों में से लगभग 70 प्रतिशत यानी साढ़े छह लाख किसानों के नलकूपों पर कैपेसिटर लगा हुआ है। एक तरह जहां बिजलीघरों पर लाखों रुपयों की कीमत से लगाए गए कैपेसिटर बैंक खराब पड़े है, वहीं ऊर्जा निगम किसानों से कैपेसिटर बैंक के चार्ज के नाम पर हर माह प्रति बिल लगभग 245 रुपये वसूलता रहा। यानि 2014-15 से वर्ष 2021 तक करीब 16 करोड़ रुपये ऊर्जा निगम ने किसानों से वसूले। (संवाद)
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ये है नियम
ऊर्जा निगम के अफसरों के अनुसार जो भी किसान नलकूप का बिल जमा करता है, उसके बिल पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त कैपेसिटर चार्ज लगता है। वर्ष 2014-2015 से लेकर वर्ष 2021 तक एक औसत नलकूप का बिल 1650 रुपये होता था। इस बिल में लगभग 245 रुपये अतिरिक्त किसानों से कैपेसिटर चार्ज के नाम पर वसूला जाता था।
पहले से ही किसान बकाया गन्ना भुगतान, बढ़ी विद्युत दरों सहित आवारा पशुओं की समस्याओं से दुखी है, ऊपर से ऊर्जा निगम खराब पड़े कैपेसिटर बैंक के नाम पर चार्ज वसूलता रहा, यह बिल्कुल गलत है। प्रदेश सरकार को किसानों की हालत को देखते हुए वसूले गए कैपेसिटर चार्ज को वापस करना चाहिए। - राजेन्द्र चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष, भाकियू

ऊर्जा निगम के अफसरों ने प्रत्येक नलकूप धारक किसान से बिजली बिल पर 15 प्रतिशत कैपेसिटर चार्ज वसूलने का आदेश दिया था। इसके तहत कार्रवाई अमल में लाई गई। फिलहाल वर्ष 2021 से कैपेसिटर चार्ज किसानों से नहीं लिया जा रहा है। - प्रथम गोपाल सिंह, एक्सईएन
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