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तहसील के चक्कर काट रहे फरियादी
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बड़ौत (बागपत)।
तहसील में कई साल से वादकारी परेशान हाल घूम रहे हैं, लेकिन उनके वाद का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। फरियादी तारीख की सूचना पर तहसील आते हैं, लेकिन वहां पर अगली तारीख मिली मिलती है। इससे क्षेत्र के सैकड़ों फरियादी तहसील के चक्कर लगाते परेशान हो चुके हैं।
तहसील में एसडीएम कोर्ट में 2010 से लेकर अब तक 250 से अधिक मामले विचाराधीन हैं। फरियादियों का वर्षों बीत जाने के बाद भी निरस्तारण नहीं हो पा रहा है। तहसील में आए फरियादी हुक्म सिंह, सुखवीर, मामचंद, राकेश ने बताया कि चकरोड संबंधित व डोल बंदी, पट्टे संबंधित, कुररे बंदी आदि के मामले चल रहे हैं, तहसील में आना पड़ता है, लेकिन उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। वहीं तहसीलदार न्यायालय में 541 मामले काफी समय से विचाराधीन हैं। यहां पर बैठे फरियादी दुले चंद, मुकेश, सौरभ ने बताया कि उन्हेें इस भीषण गर्मी के चलते तारीख पर आना पड़ता है, कभी न्यायालय की छुट्टी होती है तो कभी अधिकारी छुट्टी पर रहते हैं। इसको लेकर फरियादी परेशान हैं।
अधिकारी कम है वाद ज्यादा
बड़ौत। एसडीएम गुलशन कुमार ने बताया कि कई न्यायालय मेें अधिकारी खाली चल रहे हैं, हाल मेें ही लोकसभा चुनाव के कारण विचाराधीन मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है, इन्हें अब शीघ्र कराया जाएगा।
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कभी हड़ताल तो कभी चुनाव
बड़ौत। इस संबंध में तहसीलदार प्रदीप कुमार ने बताया कि कभी हड़ताल, कभी चुनाव व अन्य कार्यों के चलते कोर्ट नहीं चल पा रही है। इसके कारण वाद विचाराधीन है।
बार अधिकारियों से वादों के निस्तारण की मांग करेगी
बड़ौत। बड़ौत रेवेन्यू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मवीर सिंह तोमर ने बताया कि यहां वादों की संख्या ज्यादा है। जबकि अधिकारी कम हैं। अपर न्यायिक अब न्यायालय परगना की दो न्यायालय अधिकारी नहीं है। लोकसभा चुनाव में भी वादों का निस्तारण नहीं हुआ है। बार के सदस्यों की प्रतिनिधि मंडल अधिकारियों से विचाराधीन मामलों का शीघ्र निस्तारण कराने की मांग करेगा।
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तहसील में कई साल से वादकारी परेशान हाल घूम रहे हैं, लेकिन उनके वाद का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। फरियादी तारीख की सूचना पर तहसील आते हैं, लेकिन वहां पर अगली तारीख मिली मिलती है। इससे क्षेत्र के सैकड़ों फरियादी तहसील के चक्कर लगाते परेशान हो चुके हैं।
तहसील में एसडीएम कोर्ट में 2010 से लेकर अब तक 250 से अधिक मामले विचाराधीन हैं। फरियादियों का वर्षों बीत जाने के बाद भी निरस्तारण नहीं हो पा रहा है। तहसील में आए फरियादी हुक्म सिंह, सुखवीर, मामचंद, राकेश ने बताया कि चकरोड संबंधित व डोल बंदी, पट्टे संबंधित, कुररे बंदी आदि के मामले चल रहे हैं, तहसील में आना पड़ता है, लेकिन उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। वहीं तहसीलदार न्यायालय में 541 मामले काफी समय से विचाराधीन हैं। यहां पर बैठे फरियादी दुले चंद, मुकेश, सौरभ ने बताया कि उन्हेें इस भीषण गर्मी के चलते तारीख पर आना पड़ता है, कभी न्यायालय की छुट्टी होती है तो कभी अधिकारी छुट्टी पर रहते हैं। इसको लेकर फरियादी परेशान हैं।
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अधिकारी कम है वाद ज्यादा
बड़ौत। एसडीएम गुलशन कुमार ने बताया कि कई न्यायालय मेें अधिकारी खाली चल रहे हैं, हाल मेें ही लोकसभा चुनाव के कारण विचाराधीन मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है, इन्हें अब शीघ्र कराया जाएगा।
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कभी हड़ताल तो कभी चुनाव
बड़ौत। इस संबंध में तहसीलदार प्रदीप कुमार ने बताया कि कभी हड़ताल, कभी चुनाव व अन्य कार्यों के चलते कोर्ट नहीं चल पा रही है। इसके कारण वाद विचाराधीन है।
बार अधिकारियों से वादों के निस्तारण की मांग करेगी
बड़ौत। बड़ौत रेवेन्यू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मवीर सिंह तोमर ने बताया कि यहां वादों की संख्या ज्यादा है। जबकि अधिकारी कम हैं। अपर न्यायिक अब न्यायालय परगना की दो न्यायालय अधिकारी नहीं है। लोकसभा चुनाव में भी वादों का निस्तारण नहीं हुआ है। बार के सदस्यों की प्रतिनिधि मंडल अधिकारियों से विचाराधीन मामलों का शीघ्र निस्तारण कराने की मांग करेगा।