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दलित परिवारों ने बौद्ध धर्म अपनाया
Updated Mon, 25 Jun 2018 12:53 AM IST
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अमीनगर सराय (बागपत)। सिंघावली अहीर गांव के आधा दर्जन दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया। बौद्ध संत प्रियंतीस भंते ने इन्हें दीक्षा दी। वहीं धर्म में शामिल करने के प्रमाणपत्र भी सौंपे। धर्म परिवर्तन करने वाले परिवारों का कहना है कि दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। इसी की वजह से यह कदम उठाया गया है।
रविवार को सिंघावली अहीर गांव में दलित समाज के आधा दर्जन परिवार ने धर्मपरिवर्तन करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया। धर्म परिवर्तन करने वाले मुन्ना लाल, बाबू, अजीत, अजय, मोनू, सोनू ने कहा कि समाज पर हर रोज अत्याचार हो रहे हैं। आज भी उन्हें छूआछूत की नजरों से देखा जाता है। कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं होती। ऊंची जाति के लोग उन्हें हीन भावना से देखते हैं। हर जगह केवल उनका इस्तेमाल किया जाता है। चाहे चुनाव हो या दंगा। अब वह इन घृणाभरी जिंदगी से ऊपर उठकर अपने समाज को नए मुकाम तक पहुंचाएंगे। अभी तक छह परिवार ने बौद्ध धर्म अपनाया है। पूजा पाठ से भी मोह भंग हो गया है। इसके लिए गांव में अपने सभी समाज के लोगों को इसके लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्हें बौद्ध धर्म की दीक्षा संत प्रियंतीस भंते ने दिलाई। उनकी ओर से बौद्ध धर्म में शामिल होने के प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए।
दलितों से हमेशा रहा हमारा मेल : प्रधान
ग्राम प्रधान सतवीर यादव ने बताया कि बौद्ध धर्म दलितों ने क्यों अपनाया है इसकी जानकारी नहीं है। गांव में तो आज तक कोई उन पर अत्याचार भी नहीं हुआ है। वह हमेशा उनके पक्ष में खड़े रहे हैं। शनिवार को दूसरे समुदाय के व्यक्ति से मामूली विवाद में झगड़ा हो गया था, जिसको शांत कराया। वैसे यहां पर दलितों को करीब 200 परिवार रहते हैं।
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रविवार को सिंघावली अहीर गांव में दलित समाज के आधा दर्जन परिवार ने धर्मपरिवर्तन करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया। धर्म परिवर्तन करने वाले मुन्ना लाल, बाबू, अजीत, अजय, मोनू, सोनू ने कहा कि समाज पर हर रोज अत्याचार हो रहे हैं। आज भी उन्हें छूआछूत की नजरों से देखा जाता है। कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं होती। ऊंची जाति के लोग उन्हें हीन भावना से देखते हैं। हर जगह केवल उनका इस्तेमाल किया जाता है। चाहे चुनाव हो या दंगा। अब वह इन घृणाभरी जिंदगी से ऊपर उठकर अपने समाज को नए मुकाम तक पहुंचाएंगे। अभी तक छह परिवार ने बौद्ध धर्म अपनाया है। पूजा पाठ से भी मोह भंग हो गया है। इसके लिए गांव में अपने सभी समाज के लोगों को इसके लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्हें बौद्ध धर्म की दीक्षा संत प्रियंतीस भंते ने दिलाई। उनकी ओर से बौद्ध धर्म में शामिल होने के प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए।
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दलितों से हमेशा रहा हमारा मेल : प्रधान
ग्राम प्रधान सतवीर यादव ने बताया कि बौद्ध धर्म दलितों ने क्यों अपनाया है इसकी जानकारी नहीं है। गांव में तो आज तक कोई उन पर अत्याचार भी नहीं हुआ है। वह हमेशा उनके पक्ष में खड़े रहे हैं। शनिवार को दूसरे समुदाय के व्यक्ति से मामूली विवाद में झगड़ा हो गया था, जिसको शांत कराया। वैसे यहां पर दलितों को करीब 200 परिवार रहते हैं।
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