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शब-ए-बरात अकीदत और एहतराम के साथ मनाई

Fri, 04 May 2018 01:00 AM IST
Updated Fri, 04 May 2018 01:00 AM IST
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शब-ए-बरात अकीदत और एहतराम के साथ मनाई
बड़ौत (बागपत)। फूंस वाली मस्जिद के प्रांगण में देर रात्रि शब-ए-बरात अक़ीदत और ऐहतराम के साथ मनाई और कुरान हाफिज हुए अरबिया नूरियां मदरसे के छात्रों की दस्तार बंदी की गई।
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शब-ए-बरात पर पूरी रात मुसलमानों ने अल्लाह की इबादत की। बड़ी संख्या में लोग नवाफिल पढ़ने मस्जिदों और मगफिरत की दुआ करने कब्रिस्तानों में पहुंचे। रात में इशा की नमाज के बाद शहर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर दीनी जलसों का अहतिमाम किया । शब- ए- बरात के मौके पर हुए जलसे में दस्तार बंदी की। अलग-अलग जगहों से पहुंचे आलिम ने तकरीर की। इस मौके पर मरकजी मस्जिद फूंसवाली के इमाम मौलाना आरिफ उल हक ने शब-ए-बरात के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा शब-ए-बरात की रात मुसलमान रात भर इबादत करते हैं। शब-ए-बरात की रात गुनाह की माफ़ी और मरहूम के लिए दुआ की रात भी कही जाती है।
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इस मौके पर कुरआन पाक को हिफ्ज करने वाले 10 बच्चों की दस्तार बंदी भी की, इसमें शहर के कई उलेमा ने शिरकत की। वही उलेमा ने कहा कि इस दिन को इबादत के तौर पर मनाया जाए और मुल्क की तरक्की और अमन चैन की दुआ करें। इस मौके पर मौलाना रियाज ने कहा कि हर मुसलमान को बुराई से बचना चाहिए। यह रात इबादत की रात है, इसमें ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करनी चाहिए। मौलाना याकूब जलालाबादी ने कहा कि आतिशबाजी करना, शोर शराबा करना या दूसरों को तकलीफ पहुंचाना यह सब कुरान और इस्लाम की तालीम के खिलाफ है। आतिशबाजी का इस्लाम में कोई स्थान नहीं, यह सरासर शरीयत के खिलाफ है। हर मुसलमान आपसी भाईचारा बनाए रखे।
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मौलाना नसीम ने कहा कि शब-ए-बरात में साल में होने वाले हर अहम काम को बांट दिया जाता है। जुमला अहकाम, रिज्क, आजाल और तमाम साल के हवादिश तकसीम कर दिए जाते हैं और काम के फरिश्तों को उन की तामील पर लगा दिया जाता है। इस्लामी मान्यता के मुताबिक शब-ए-बरात की सारी रात इबादत का दौर चलता है। इस मौके पर मौलाना शफरुदीन, कारी मसूद, मौलाना अर्सलाम, मौलाना अब्दुल सत्तार, कारी शाहिद, कारी इदरीश आदि रहे।
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