{"_id":"5ab801374f1c1be73f8b4f11","slug":"151522008375-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अष्ठमी-नवमी पर कन्याओं को कराया भोजन, उपवास खोले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अष्ठमी-नवमी पर कन्याओं को कराया भोजन, उपवास खोले
Updated Mon, 26 Mar 2018 01:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत। रविवार को नवरात्र की अष्टमी और नवमी एक होने पर श्रद्धालुओं ने अपने उपवास खोले। माता महा गौरी और सिद्ध दात्री की उपासना की । देवी रूपी कन्याओं का घरों में भोजन कराया। मंदिरों में पूजा अर्चना की । इस दौरान हवन और कीर्तनों का आयोजन हुआ। मां भगवती से घर परिवार में सुख समृद्धि की कामनाएं की।
एक नवरात्र कम होने के कारण रविवार को अष्टमी और नवमी जिलेभर में एक साथ मनाई गई। मां दुर्गा के स्वरूप महागौरी और सिद्धदात्री की श्रद्धालुओं ने आराधना की गई। लोगों ने अपने उपवास खोले। घरों में कन्याओं को भोजन कराया। विभिन्न फलों के साथ उपहार भी भेंट किए । ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि मां दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी और नौवें स्वरूप सिद्धदात्री की पूजा की। इनकी पूजा अर्चना करने से अखंड सौभाग्य और सुख, शांति की प्राप्ति होती है। कन्याओं को पूजा करने से उत्तम फल प्राप्त होता है। कन्याओं को भोजन कराया जाता है, इससे घर और परिवार में खुशी का भंडार एकत्र हो जाते हैं। शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के सभी रूपों की आराधना की गई। शहर के सालिगराम मंदिर और बाबा जानकीदास मंदिर में दुर्गाष्टमी पर हवन किया। भक्तों ने हवन में आहुतियां डाली। बागेश्वर महादेव मंदिर, ठाकुर द्वारा, हनुमान, शुगर मिल के दुर्गा मंदिर, शिव मंदिर, अग्रवाल मंडी टटीरी के टटीरी राधा-कृष्ण मंदिर, देवी मंदिर, अमीनगर सराय के मंशा देवी मंदिर, बालैनी के पुरा महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। दाहा, रमाला के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
श्रीराम दरबार की प्रतिमाएं स्थापित
बागपत। डौला गांव के शिव मंदिर में मंत्रोचार के बाद पुरुषोत्तम श्रीराम के दरबार की मूर्ति की स्थापना की गई। इस दौरान भजन, कीर्तन का आयोजन किया । इसमें बतौर मुख्य अतिथि जेएमसीई के प्रेसिडेंट कपिलदेव राठी और लता शिशौदिया रही। इसके आयोजन में राजीव शर्मा, पुष्पेंद्र, विमलेश देवी, विनय, विमला शर्मा का सहयोग रहा।
विज्ञापन
मेले का हुआ समापन
दाहा (बागपत)। कान्हड़ गांव में चल रहे देवी मां के मंदिर में तीन दिवसीय मेले का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन भी मेले में सैकड़ों लोग पहुंचे और देवी मां की पूजा अर्चना की गई। इस दौरान बच्चों और महिलाओं ने मेले में लगी दुकानों से जमकर खरीददारी की।
विज्ञापन
एक नवरात्र कम होने के कारण रविवार को अष्टमी और नवमी जिलेभर में एक साथ मनाई गई। मां दुर्गा के स्वरूप महागौरी और सिद्धदात्री की श्रद्धालुओं ने आराधना की गई। लोगों ने अपने उपवास खोले। घरों में कन्याओं को भोजन कराया। विभिन्न फलों के साथ उपहार भी भेंट किए । ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि मां दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी और नौवें स्वरूप सिद्धदात्री की पूजा की। इनकी पूजा अर्चना करने से अखंड सौभाग्य और सुख, शांति की प्राप्ति होती है। कन्याओं को पूजा करने से उत्तम फल प्राप्त होता है। कन्याओं को भोजन कराया जाता है, इससे घर और परिवार में खुशी का भंडार एकत्र हो जाते हैं। शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के सभी रूपों की आराधना की गई। शहर के सालिगराम मंदिर और बाबा जानकीदास मंदिर में दुर्गाष्टमी पर हवन किया। भक्तों ने हवन में आहुतियां डाली। बागेश्वर महादेव मंदिर, ठाकुर द्वारा, हनुमान, शुगर मिल के दुर्गा मंदिर, शिव मंदिर, अग्रवाल मंडी टटीरी के टटीरी राधा-कृष्ण मंदिर, देवी मंदिर, अमीनगर सराय के मंशा देवी मंदिर, बालैनी के पुरा महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। दाहा, रमाला के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
विज्ञापन
श्रीराम दरबार की प्रतिमाएं स्थापित
बागपत। डौला गांव के शिव मंदिर में मंत्रोचार के बाद पुरुषोत्तम श्रीराम के दरबार की मूर्ति की स्थापना की गई। इस दौरान भजन, कीर्तन का आयोजन किया । इसमें बतौर मुख्य अतिथि जेएमसीई के प्रेसिडेंट कपिलदेव राठी और लता शिशौदिया रही। इसके आयोजन में राजीव शर्मा, पुष्पेंद्र, विमलेश देवी, विनय, विमला शर्मा का सहयोग रहा।
विज्ञापन
मेले का हुआ समापन
दाहा (बागपत)। कान्हड़ गांव में चल रहे देवी मां के मंदिर में तीन दिवसीय मेले का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन भी मेले में सैकड़ों लोग पहुंचे और देवी मां की पूजा अर्चना की गई। इस दौरान बच्चों और महिलाओं ने मेले में लगी दुकानों से जमकर खरीददारी की।