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सोलर उपकरणों की स्थापना के लिए 37 लाख की प्रथम किश्त जारी
Updated Thu, 28 Jun 2018 01:12 AM IST
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बागपत। श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत सिलाना कलस्टर के आठ गांव में सोलर आरओ वाटर फिल्टर, सोलर पावर प्लांट और सोलर हाईमास्क लाइट के लिए 37 लाख रुपये अवमुक्त हो गए हैं। जल्द सभी गांवों में इनकी स्थापना के लिए कार्य शुरू होगा।
छपरौली ब्लॉक के सात और बड़ौत ब्लॉक के एक गांव का चयन श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत चयन हुआ है। सिलाना गांव को कलस्टर बनाया है। इन गांवों में विभिन्न कार्य प्रस्तावित है। विभिन्न कार्यों के लिए जहां बजट जारी हो गया है। कलस्टर के गांव बासौली, हलालपुर बरवाला, मुकंदपुर, लुहारा, शेरपुर, सिलाना और चांदनहेड़ी गांव में सोलर आरओ वाटर फिल्टर, सोलर पावर प्लांट और सोलर हाईमास्क लाइट लगेगी। इसके लिए लोकेशन और स्थल का भी चयन किया। इनके लगाने के लिए प्रथम किश्त के लिए 37.589 लाख रुपये अवमुक्त हो गए हैं। इन कार्यों के लिए 62.668 लाख वित्तीय स्वीकृति है। परियोजना निदेशक एमएल पटेल ने यूपी नेडा के परियोजना अधिकारी को निर्देशित किया यह धनराशि अन्य किसी कार्य के लिए खर्च नहीं की जाएगी। निर्धारित दिन में कार्य को पूरा करना है। अवमुक्त धनराशि के 75 प्रतिशत व्यय के बाद निष्पादित कार्य के फोटोग्राफ और कार्य की प्रगति उपलब्ध कराने के बाद ही अगली किश्त की मांग की जाएगी। विवादित भूमि पर कार्य नहीं किया जाएगा।
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छपरौली ब्लॉक के सात और बड़ौत ब्लॉक के एक गांव का चयन श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत चयन हुआ है। सिलाना गांव को कलस्टर बनाया है। इन गांवों में विभिन्न कार्य प्रस्तावित है। विभिन्न कार्यों के लिए जहां बजट जारी हो गया है। कलस्टर के गांव बासौली, हलालपुर बरवाला, मुकंदपुर, लुहारा, शेरपुर, सिलाना और चांदनहेड़ी गांव में सोलर आरओ वाटर फिल्टर, सोलर पावर प्लांट और सोलर हाईमास्क लाइट लगेगी। इसके लिए लोकेशन और स्थल का भी चयन किया। इनके लगाने के लिए प्रथम किश्त के लिए 37.589 लाख रुपये अवमुक्त हो गए हैं। इन कार्यों के लिए 62.668 लाख वित्तीय स्वीकृति है। परियोजना निदेशक एमएल पटेल ने यूपी नेडा के परियोजना अधिकारी को निर्देशित किया यह धनराशि अन्य किसी कार्य के लिए खर्च नहीं की जाएगी। निर्धारित दिन में कार्य को पूरा करना है। अवमुक्त धनराशि के 75 प्रतिशत व्यय के बाद निष्पादित कार्य के फोटोग्राफ और कार्य की प्रगति उपलब्ध कराने के बाद ही अगली किश्त की मांग की जाएगी। विवादित भूमि पर कार्य नहीं किया जाएगा।
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