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ब्रहमचारियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत
Updated Fri, 18 May 2018 01:00 AM IST
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बिनौली (बागपत)।
बरनावा के ज्ञान सागर गुरुकुल में चल रहे सर्वतोभद्र महा मंडल विधान में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से 358 अर्घ्य चढ़ाए। भक्ति संध्या में बाल कलाकारों और गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। जैन संत एलाचार्य प्रभावना भूषण महाराज ने कहा कि शाकाहार ही स्वस्थ सुखी जीवन का आधार है।
विधानाचार्य पंडित संतोष भैया के निर्देशन में सुबह नित्य नियम पूजन और अभिषेक के बाद विधान की पूजा शुरू हुई। इस दौरान पश्चिमी घातकी खंड दीप, भावी तीर्थंकर, एरावत क्षेत्र तीर्थंकर, विद्यमान 20 तीर्थंकर, नवदेवता, इष्काकार जिनालय, मंदर मेरु, पुष्करार्द्ध दीप पूजा, पुष्कर वृक्ष जिनालय, पुष्कर पर्वत सहित 15 पूजा हुई। विधान में श्रद्धालुओं ने मंत्र पाठ के साथ 358 अर्घ्य चढ़ाए। इस मौके पर जैन संत एलाचार्य प्रभावना भूषण महाराज ने कहा कि शाकाहार ही स्वस्थ सुखी जीवन का आधार है। शाकाहारी मनुष्य का चित्त हमेशा प्रसन्न रहता है, विचार और व्यवहार भी शुद्ध और श्रेष्ठ रहते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में सदा सुख समृद्धि बनी रहे इसके लिए शाकाहार ही सर्वोत्तम आहार है।
रात्रि में भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। इसमें बाल कलाकारों और गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने भगवान की भक्ति के गीत, कविता, भजन, नाटिका आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संगीत की धुनों पर प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। इसमें रविंद्र जैन, आगरा से पहुंचे निर्मल जैन, बड़ौत के शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के सदस्यों ने भी भाग लिया। ब्रह्मचारी अतुल भैया गुरुकुल कमेटी ने अतिथियों को सम्मानित किया।
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बरनावा के ज्ञान सागर गुरुकुल में चल रहे सर्वतोभद्र महा मंडल विधान में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से 358 अर्घ्य चढ़ाए। भक्ति संध्या में बाल कलाकारों और गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। जैन संत एलाचार्य प्रभावना भूषण महाराज ने कहा कि शाकाहार ही स्वस्थ सुखी जीवन का आधार है।
विधानाचार्य पंडित संतोष भैया के निर्देशन में सुबह नित्य नियम पूजन और अभिषेक के बाद विधान की पूजा शुरू हुई। इस दौरान पश्चिमी घातकी खंड दीप, भावी तीर्थंकर, एरावत क्षेत्र तीर्थंकर, विद्यमान 20 तीर्थंकर, नवदेवता, इष्काकार जिनालय, मंदर मेरु, पुष्करार्द्ध दीप पूजा, पुष्कर वृक्ष जिनालय, पुष्कर पर्वत सहित 15 पूजा हुई। विधान में श्रद्धालुओं ने मंत्र पाठ के साथ 358 अर्घ्य चढ़ाए। इस मौके पर जैन संत एलाचार्य प्रभावना भूषण महाराज ने कहा कि शाकाहार ही स्वस्थ सुखी जीवन का आधार है। शाकाहारी मनुष्य का चित्त हमेशा प्रसन्न रहता है, विचार और व्यवहार भी शुद्ध और श्रेष्ठ रहते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में सदा सुख समृद्धि बनी रहे इसके लिए शाकाहार ही सर्वोत्तम आहार है।
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रात्रि में भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। इसमें बाल कलाकारों और गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने भगवान की भक्ति के गीत, कविता, भजन, नाटिका आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संगीत की धुनों पर प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। इसमें रविंद्र जैन, आगरा से पहुंचे निर्मल जैन, बड़ौत के शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के सदस्यों ने भी भाग लिया। ब्रह्मचारी अतुल भैया गुरुकुल कमेटी ने अतिथियों को सम्मानित किया।
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