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बागपत में खाली पड़े 40 भूखंड निरस्त
Updated Sun, 22 Apr 2018 01:16 AM IST
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बागपत। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) ने भूखंड को लेकर उद्योग न लगाने पर औद्योगिक एरिया के करीब 40 भूखंड निरस्त कर दिए हैं। ऐसे सैकड़ों भूखंड हैं, जिन्हें आवंटन तो करा लिया गया है, लेकिन इन पर उद्योग का संचालन नहीं किया जा रहा है।
इनसेट
करीब डेढ़ दशक पहले यूपीएसआईडीसी बागपत के लिए 267.60 एकड जमीन का अधिग्रहण किया । औद्योगिक क्षेत्र में 268 भूखंड काटे, इनमें फरवरी तक 221 भूखंड आवंटित किए । इनमें छह भूखंड विवादित हैं। 41 भूखंड आवंटन के लिए उपलब्ध थे, लेकिन नए वित्तीय वर्ष में औद्योगिक विकास निगम ने ऐसे भूखंडों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी हैं, जिन्होंने भूखंड तो ले लिया, लेकिन उद्यम स्थापित नहीं किए हैं। कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें भूखंड सरेंडर किए गए हैं। यूपीएसआईडीसी के जेई धीरज मिश्रा बताते हैं कि अभी इसकी सूची तैयार की जा रही है। कुछ भूखंड सरेंडर हुए हैं और कुछ भूखंड रद किए गए हैं। नियमों में बदलाव किया है। पहले भूखंड लेकर उद्यमी यहां पर प्रोडक्शन शुरू नहीं कर रहे थे, लेकिन नया नियम है कि अब भूखंड लेने के एक साल के अंदर ही प्रोडक्शन शुरू करना होगा। नहीं तो भूखंड रद कर दिया जाएगा।
सुविधाएं नहीं तो बागपत में कैसे बढ़ेगा निवेश
बागपत। जिले में निवेश कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। सड़कों की बदहाली, कच्चे माल की उपलब्धता, कानून व्यवस्था और यूपीएसआईडीसी क्षेत्र से रेल मार्ग की दूरी के चलते जिला मुख्यालय पर उद्योग विकसित नहीं हो सके हैं। जिला बनने के करीब 21 साल बाद अब तक इस एरिया में केवल 35 भूखंड में ही उद्यम संचालित हैं। करीब तीस निर्माणाधीन है। अधिकतर भूखंड ऐसे हैं, जिनमें उद्यमियों ने खरीद लिए, लेकिन यहां पर बेहतर वातावरण के अभाव में काम शुरू नहीं किया गया। जो काम शुरू किए गए हैं, वह भी सीमित हैं।
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बागपत का संचालन ट्रोनिका सिटी से
बागपत। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के लिए जिला मुख्यालय बागपत पर एरिया घोषित किया । अधिकारियों के लिए भवन का निर्माण भी हुआ, लेकिन अभी भी प्रोजेक्ट मैनेजर और अन्य अधिकारी गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी से ही बागपत की योजनाओं का संचालन कर रहे हैं।
यूपी समिट से सिर्फ उम्मीद बंधी
बागपत। विगत दिनों लखनऊ में उद्यमियों के लिए दो दिवसीय समिट चली। इससे जनपद बागपत में निवेश की उम्मीद बंधी है, लेकिन धरातल पर अभी अधिक बदलाव नहीं दिख रहे हैं। यूपी स्टेट इंड्स्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जयपाल सिंह कहते हैं कि बेहतर व्यापार के लिए पहले माहौल देना होगा, जो फिलहाल अनुकूल नहीं है। उद्यम के लिए सबसे पहले कच्चे माल की उपलब्ध जरूरी है। इसके अलावा सुरक्षा और सड़कें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि एरिया का विकास नहीं हो सका है।
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इनसेट
करीब डेढ़ दशक पहले यूपीएसआईडीसी बागपत के लिए 267.60 एकड जमीन का अधिग्रहण किया । औद्योगिक क्षेत्र में 268 भूखंड काटे, इनमें फरवरी तक 221 भूखंड आवंटित किए । इनमें छह भूखंड विवादित हैं। 41 भूखंड आवंटन के लिए उपलब्ध थे, लेकिन नए वित्तीय वर्ष में औद्योगिक विकास निगम ने ऐसे भूखंडों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी हैं, जिन्होंने भूखंड तो ले लिया, लेकिन उद्यम स्थापित नहीं किए हैं। कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें भूखंड सरेंडर किए गए हैं। यूपीएसआईडीसी के जेई धीरज मिश्रा बताते हैं कि अभी इसकी सूची तैयार की जा रही है। कुछ भूखंड सरेंडर हुए हैं और कुछ भूखंड रद किए गए हैं। नियमों में बदलाव किया है। पहले भूखंड लेकर उद्यमी यहां पर प्रोडक्शन शुरू नहीं कर रहे थे, लेकिन नया नियम है कि अब भूखंड लेने के एक साल के अंदर ही प्रोडक्शन शुरू करना होगा। नहीं तो भूखंड रद कर दिया जाएगा।
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सुविधाएं नहीं तो बागपत में कैसे बढ़ेगा निवेश
बागपत। जिले में निवेश कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। सड़कों की बदहाली, कच्चे माल की उपलब्धता, कानून व्यवस्था और यूपीएसआईडीसी क्षेत्र से रेल मार्ग की दूरी के चलते जिला मुख्यालय पर उद्योग विकसित नहीं हो सके हैं। जिला बनने के करीब 21 साल बाद अब तक इस एरिया में केवल 35 भूखंड में ही उद्यम संचालित हैं। करीब तीस निर्माणाधीन है। अधिकतर भूखंड ऐसे हैं, जिनमें उद्यमियों ने खरीद लिए, लेकिन यहां पर बेहतर वातावरण के अभाव में काम शुरू नहीं किया गया। जो काम शुरू किए गए हैं, वह भी सीमित हैं।
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बागपत का संचालन ट्रोनिका सिटी से
बागपत। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के लिए जिला मुख्यालय बागपत पर एरिया घोषित किया । अधिकारियों के लिए भवन का निर्माण भी हुआ, लेकिन अभी भी प्रोजेक्ट मैनेजर और अन्य अधिकारी गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी से ही बागपत की योजनाओं का संचालन कर रहे हैं।
यूपी समिट से सिर्फ उम्मीद बंधी
बागपत। विगत दिनों लखनऊ में उद्यमियों के लिए दो दिवसीय समिट चली। इससे जनपद बागपत में निवेश की उम्मीद बंधी है, लेकिन धरातल पर अभी अधिक बदलाव नहीं दिख रहे हैं। यूपी स्टेट इंड्स्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जयपाल सिंह कहते हैं कि बेहतर व्यापार के लिए पहले माहौल देना होगा, जो फिलहाल अनुकूल नहीं है। उद्यम के लिए सबसे पहले कच्चे माल की उपलब्ध जरूरी है। इसके अलावा सुरक्षा और सड़कें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि एरिया का विकास नहीं हो सका है।