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मन की शांति के लिये मन के कषाय दूर रखों- अरूण मुनि
Updated Sun, 09 Jul 2017 12:47 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
अरुण मुनि ने कहा कि मन की शांति के लिए मन के कषाय दूर करने पड़ेंगे। जब मन बदल जाता है तभी कषाय दूर होते हैं।
वे जैन स्थानक शहर में चौमासी पर्व के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज चौमासी पर्व है। आज का दिन त्याग व तपस्या का दिन है। आज के दिन अधिक से अधिक तप करना चाहिए। चौमासी पर्व को अद्धवार्षिक परीक्षा मानी जाती है और सवंत्सरि पर्व वार्षिक परीक्षा की श्रेणी है। उन्होंने कहा कि श्रमण भगवान महावीर का जीवन दर्शन है। संयम की भावना, साधना, जिसका मुख्य ध्येय होता है आत्मा है। आत्मा सिद्धि ही उनका परम लक्ष्य है। जीवन के साथ परमार्थ व कषाय जुड़े हुए हैं। यदि किसी के मन में एक वर्ष तक दूसरों के प्रति कषाय की भावना जमी रही तो उसका जैन धर्म से रजिस्ट्रेशन ही समाप्त हो जाता है। आज के दिन साधक ने अपने सभी पापों के लिए क्षमा मांगता है। अपने जीवन की किताब को गुरु के आगे खोलकर रख देता है कि मुझसे जो भी पाप हुआ मैं क्षमा मांगता हूं। उन्होंने कहा कि मन की हर गतिविधि को जानने वाला सच्चा साधू होता है। धर्मसभा में जयप्रकाश जैन, सोहनपाल, संजीव जैन, हंसकुमार जैन, भारतभूषण, वीरसैन, दीपक जैन, सुभाषचंद, सुखमाल चंद, डीके जैन, महीपाल जैन, शैलबाला, इंद्राणी, मधु, सविता, रुचि आराधना आदि उपस्थित रहे।
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अरुण मुनि ने कहा कि मन की शांति के लिए मन के कषाय दूर करने पड़ेंगे। जब मन बदल जाता है तभी कषाय दूर होते हैं।
वे जैन स्थानक शहर में चौमासी पर्व के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज चौमासी पर्व है। आज का दिन त्याग व तपस्या का दिन है। आज के दिन अधिक से अधिक तप करना चाहिए। चौमासी पर्व को अद्धवार्षिक परीक्षा मानी जाती है और सवंत्सरि पर्व वार्षिक परीक्षा की श्रेणी है। उन्होंने कहा कि श्रमण भगवान महावीर का जीवन दर्शन है। संयम की भावना, साधना, जिसका मुख्य ध्येय होता है आत्मा है। आत्मा सिद्धि ही उनका परम लक्ष्य है। जीवन के साथ परमार्थ व कषाय जुड़े हुए हैं। यदि किसी के मन में एक वर्ष तक दूसरों के प्रति कषाय की भावना जमी रही तो उसका जैन धर्म से रजिस्ट्रेशन ही समाप्त हो जाता है। आज के दिन साधक ने अपने सभी पापों के लिए क्षमा मांगता है। अपने जीवन की किताब को गुरु के आगे खोलकर रख देता है कि मुझसे जो भी पाप हुआ मैं क्षमा मांगता हूं। उन्होंने कहा कि मन की हर गतिविधि को जानने वाला सच्चा साधू होता है। धर्मसभा में जयप्रकाश जैन, सोहनपाल, संजीव जैन, हंसकुमार जैन, भारतभूषण, वीरसैन, दीपक जैन, सुभाषचंद, सुखमाल चंद, डीके जैन, महीपाल जैन, शैलबाला, इंद्राणी, मधु, सविता, रुचि आराधना आदि उपस्थित रहे।