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मासूम से दुष्कर्म करने वाले को दस साल की सजा
Updated Tue, 18 Dec 2018 01:01 AM IST
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बागपत। अपर जिला सत्र न्यायाधीश प्रथम रमेश चंद्र दिवाकर की कोर्ट ने रमाला थाना क्षेत्र के एक गांव में तीन साल पहले दो साल की मासूम से दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को दस साल की सजा सुनाई।
अपर शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र यादव ने बताया कि रमाला थाना क्षेत्र के एक गांव में 19 मार्च 2016 को शाम साढ़े सात बजे उधम पुत्र महेंद्र निवासी मोहम्मदपुर राय सिंह थाना भौंरा कला जनपद मुजफ्फरनगर दो वर्षीय मासूम को घुमाने के बहाने घर से लग गया। बच्ची का परिवार ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता था। काफी देर तक जब वह बच्ची को वापस लेकर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने उसकी तलाश की। रात्रि साढ़े 11 बजे के लगभग जंगल में आरोपी को बच्ची से दुष्कर्म कर परिजनों ने पकड़ लिया और पुलिस को सौंपा। रमाला थाने पर ऊधम के खिलाफ धारा 376 और बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज कराया। यह मामला प्रथम जिला अपर सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर की कोर्ट में चल रहा था। अभियोजन पक्ष की तरफ से छह गवाह पेश किए। सोमवार को सजा के प्रश्न पर सुनाई हुई। अभियुक्त को धारा 376 में दस साल की सजा, 25 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। पॉक्सो एक्ट में साल साल की सजा और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। दोनों सजाए साथ-साथ चलेगा।
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अपर शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र यादव ने बताया कि रमाला थाना क्षेत्र के एक गांव में 19 मार्च 2016 को शाम साढ़े सात बजे उधम पुत्र महेंद्र निवासी मोहम्मदपुर राय सिंह थाना भौंरा कला जनपद मुजफ्फरनगर दो वर्षीय मासूम को घुमाने के बहाने घर से लग गया। बच्ची का परिवार ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता था। काफी देर तक जब वह बच्ची को वापस लेकर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने उसकी तलाश की। रात्रि साढ़े 11 बजे के लगभग जंगल में आरोपी को बच्ची से दुष्कर्म कर परिजनों ने पकड़ लिया और पुलिस को सौंपा। रमाला थाने पर ऊधम के खिलाफ धारा 376 और बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज कराया। यह मामला प्रथम जिला अपर सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर की कोर्ट में चल रहा था। अभियोजन पक्ष की तरफ से छह गवाह पेश किए। सोमवार को सजा के प्रश्न पर सुनाई हुई। अभियुक्त को धारा 376 में दस साल की सजा, 25 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। पॉक्सो एक्ट में साल साल की सजा और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। दोनों सजाए साथ-साथ चलेगा।
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