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पेट्रोल डीजल के रेट बढ़ने बिगड़ा बजट
Updated Mon, 10 Sep 2018 01:33 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
पेट्रोल और डीजल की दर में बेतहाशा बढ़ोत्तरी केवल गाड़ी चलाने में भारी नहीं पड़ रही है, बल्कि लोगों का बजट भी बिगाड़ने लगी है। छह माह मेें ही लोगों का वाहन और घर खर्च मेेें एक से डेढ़ हजार रुपये तक अतिरिक्त बढ़ गए। लगातार मूल्य वृद्धि लोगों में नाराजगी है।
जून 2017 से डीजल और पेट्रोल का प्रतिदिन मूल्य नियंत्रण का अधिकार पेट्रोलियम कंपनियों के हाथ में है। प्रतिदिन सुबह पांच बजे कंपनी से उस दिन की दर जारी कर पेट्रोल पंप पर भेजी जाती है। दिल्ली बस स्टैंड स्थित पेट्रोल पंप के मालिक सुनील जैन ने बताया कि एक अप्रैल को पेट्रोल के दाम 75.20 रुपये थे, जो 20-40 पैसे प्रतिदिन बढ़ते बढ़ते अब 80.46 रुपये तक पहुंच चुकी है। इससे लोग अजीज आ चुके है। युवा अमित तोमर का कहना था कि पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। हर दिन 50 रुपये जेब पर बोझ पड़ रहा है। युवा सुमित तोमर का कहना था कि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू कर दिया है, लेकिन पेट्रोलियम इससे बाहर है। तेल कंपनियां और राज्य सरकार इसका फायदा उठाकर मनमाना टैक्स वसूल रही है। अखिलेश का कहना था कि तेल की कीमतों मेें वृद्धि से सिर्फ जनता को लूटा जा रहा है। अब सरकार डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने का बहना बना रही है। जबकि कच्चा तेल सस्ता होने पर भी दाम नहीं घटाए गए। मोहित तोमर का कहना था कि महंगाई केवल जनता पर ही क्यों थोपी जा रही है। अगर कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं तो केन्द्र और राज्य सरकार अपने टैक्स क्यों नहीं घटा रही है। जनता 2019 मेें इसका जवाब देगी।
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पेट्रोल और डीजल की दर में बेतहाशा बढ़ोत्तरी केवल गाड़ी चलाने में भारी नहीं पड़ रही है, बल्कि लोगों का बजट भी बिगाड़ने लगी है। छह माह मेें ही लोगों का वाहन और घर खर्च मेेें एक से डेढ़ हजार रुपये तक अतिरिक्त बढ़ गए। लगातार मूल्य वृद्धि लोगों में नाराजगी है।
जून 2017 से डीजल और पेट्रोल का प्रतिदिन मूल्य नियंत्रण का अधिकार पेट्रोलियम कंपनियों के हाथ में है। प्रतिदिन सुबह पांच बजे कंपनी से उस दिन की दर जारी कर पेट्रोल पंप पर भेजी जाती है। दिल्ली बस स्टैंड स्थित पेट्रोल पंप के मालिक सुनील जैन ने बताया कि एक अप्रैल को पेट्रोल के दाम 75.20 रुपये थे, जो 20-40 पैसे प्रतिदिन बढ़ते बढ़ते अब 80.46 रुपये तक पहुंच चुकी है। इससे लोग अजीज आ चुके है। युवा अमित तोमर का कहना था कि पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। हर दिन 50 रुपये जेब पर बोझ पड़ रहा है। युवा सुमित तोमर का कहना था कि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू कर दिया है, लेकिन पेट्रोलियम इससे बाहर है। तेल कंपनियां और राज्य सरकार इसका फायदा उठाकर मनमाना टैक्स वसूल रही है। अखिलेश का कहना था कि तेल की कीमतों मेें वृद्धि से सिर्फ जनता को लूटा जा रहा है। अब सरकार डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने का बहना बना रही है। जबकि कच्चा तेल सस्ता होने पर भी दाम नहीं घटाए गए। मोहित तोमर का कहना था कि महंगाई केवल जनता पर ही क्यों थोपी जा रही है। अगर कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं तो केन्द्र और राज्य सरकार अपने टैक्स क्यों नहीं घटा रही है। जनता 2019 मेें इसका जवाब देगी।
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