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बकाया गन्ना भुगतान नहीं होने पर फीकी रही किसानों की होली
Updated Fri, 02 Mar 2018 12:48 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
होली चाहे हर वर्ग के लिए ढेरों खुशियां लेकर आई हो, लेकिन इस बार भी होली पर किसानों के चेहरों पर मायूस छाई हुई है, क्योंकि वर्षों से क्षेत्र में स्थित चीनी मिलें हजारों किसानों का करोड़ों रुपये बकाया गन्ना भुगतान दबाएं बैठी हैं। दूसरी तरफ समस्या से क्षुब्ध होकर किसान और भाकियू कार्यकर्ता जगह-जगह सभाएं कर आंदोलन शुरू करने की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह प्रधान का कहना है कि बकाया गन्ना भुगतान न होने के कारण क्षेत्र के हजारों किसानों की स्थिति दयनीय हो चुकी है। गन्ना भुगतान नहीं मिलने के कारण न तो किसान अपने परिवार का खर्च चला पा रहा है और न ही समय पर बच्चों की फीस जमा हो पा रही है और न ही बेटा व बेटी की शादी। परिवार के बीमार सदस्य का इलाज भी रिश्तेदारों, साहूकारों से ब्याज पर पैसे लेकर कराना पड़ रहा है। सैकड़ों बार बकाया गन्ना भुगतान दबाने वाली मिलों के खिलाफ हंगामा-प्रदर्शन हो चुका है, लेकिन हर बार उग्र आंदोलन की चलते प्रशासनिक अधिकारी बीच-बचाव कर देते हैं और बाद मेें हुए समझौते को भी पूरा नहीं किया जाता है।
ग्राम प्रधान छछरपुर अनिल कुमार एडवोकेट और गुराना प्रधान रणवीर सिंह का कहना है कि अपने स्तर पर सैकड़ों शिकायतें एसडीएम से लेकर गन्ना आयुक्त लखनऊ और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह से लेकर मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा यदि जल्द ही भुगतान नहीं हुआ तो इस बार जरूर उग्र आंदोलन शुरू होगा। इसकी जिम्मेदार प्रशासन की होगी। इसके अलावा नरेंद्र मास्टर, रविंद्र, सुरेंद्र, हरवीर, जयपाल, अमरपाल, देवेंद्र, जयवीर, यशवीर तोमर, जसवीर तोमर आदि ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई।
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होली चाहे हर वर्ग के लिए ढेरों खुशियां लेकर आई हो, लेकिन इस बार भी होली पर किसानों के चेहरों पर मायूस छाई हुई है, क्योंकि वर्षों से क्षेत्र में स्थित चीनी मिलें हजारों किसानों का करोड़ों रुपये बकाया गन्ना भुगतान दबाएं बैठी हैं। दूसरी तरफ समस्या से क्षुब्ध होकर किसान और भाकियू कार्यकर्ता जगह-जगह सभाएं कर आंदोलन शुरू करने की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह प्रधान का कहना है कि बकाया गन्ना भुगतान न होने के कारण क्षेत्र के हजारों किसानों की स्थिति दयनीय हो चुकी है। गन्ना भुगतान नहीं मिलने के कारण न तो किसान अपने परिवार का खर्च चला पा रहा है और न ही समय पर बच्चों की फीस जमा हो पा रही है और न ही बेटा व बेटी की शादी। परिवार के बीमार सदस्य का इलाज भी रिश्तेदारों, साहूकारों से ब्याज पर पैसे लेकर कराना पड़ रहा है। सैकड़ों बार बकाया गन्ना भुगतान दबाने वाली मिलों के खिलाफ हंगामा-प्रदर्शन हो चुका है, लेकिन हर बार उग्र आंदोलन की चलते प्रशासनिक अधिकारी बीच-बचाव कर देते हैं और बाद मेें हुए समझौते को भी पूरा नहीं किया जाता है।
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ग्राम प्रधान छछरपुर अनिल कुमार एडवोकेट और गुराना प्रधान रणवीर सिंह का कहना है कि अपने स्तर पर सैकड़ों शिकायतें एसडीएम से लेकर गन्ना आयुक्त लखनऊ और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह से लेकर मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा यदि जल्द ही भुगतान नहीं हुआ तो इस बार जरूर उग्र आंदोलन शुरू होगा। इसकी जिम्मेदार प्रशासन की होगी। इसके अलावा नरेंद्र मास्टर, रविंद्र, सुरेंद्र, हरवीर, जयपाल, अमरपाल, देवेंद्र, जयवीर, यशवीर तोमर, जसवीर तोमर आदि ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई।
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