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प्रदेश में किसान और भूतपूर्व सैनिक परेशान
Updated Thu, 22 Feb 2018 01:32 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
राष्ट्रीय लोकदल सैनिक प्रकोष्ठ की बैठक अर्जुनपुरम में हुई। इसमें किसानों की दुर्दशा और भूतपूर्व सैनिकों की समस्याओं पर विचार किया। इसमें वक्ताओं ने कहा प्रदेश में किसान और भूतपूर्व सैनिक परेशान हैं।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्योदान सिंह तोमर ने कहा कि जनपद का किसान केंद्र एवं राज्य सरकार की उपेक्षा का शिकार है। क्योंकि किसानों के गन्ने का भुगतान न होने पर किसान भूखे मरने की कगार पर है। वह अपनी रोजी रोटी के लिए मिल मालिकों की ओर मुंह ताक रहा है। जबकि सरकार ने गन्ने का भुगतान 14 दिन में करने का वायदा किया । प्रदेश सरकार किसानों को छल कर रही है। उन्होंने कहा जनपद बागपत बनने के लगभग 20 वर्ष बाद भी भी भूतपूर्व सैनिकों के लिए सीएसडी कैंटीन नहीं खुली है। इस कारण सैनिकों को सीएसडी से सामान लाने के लिए मेरठ और सोनीपत जाना पड़ता है और न ही भूतपूर्व सैनिकों के लिए जनपद में कोई अस्पताल भी नहीं है। गंभीर बीमारी की स्थिति में उन्हें दिल्ली या मेरठ रेफर जाना पड़ता है। इसमें तेजपाल तोमर, बिजेंद्र सिंह, बलजोर सिंह, कृष्णपाल सिंह, राजपाल सिंह, ओमप्रकाश आदि ने विचार व्यक्त किए।
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राष्ट्रीय लोकदल सैनिक प्रकोष्ठ की बैठक अर्जुनपुरम में हुई। इसमें किसानों की दुर्दशा और भूतपूर्व सैनिकों की समस्याओं पर विचार किया। इसमें वक्ताओं ने कहा प्रदेश में किसान और भूतपूर्व सैनिक परेशान हैं।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्योदान सिंह तोमर ने कहा कि जनपद का किसान केंद्र एवं राज्य सरकार की उपेक्षा का शिकार है। क्योंकि किसानों के गन्ने का भुगतान न होने पर किसान भूखे मरने की कगार पर है। वह अपनी रोजी रोटी के लिए मिल मालिकों की ओर मुंह ताक रहा है। जबकि सरकार ने गन्ने का भुगतान 14 दिन में करने का वायदा किया । प्रदेश सरकार किसानों को छल कर रही है। उन्होंने कहा जनपद बागपत बनने के लगभग 20 वर्ष बाद भी भी भूतपूर्व सैनिकों के लिए सीएसडी कैंटीन नहीं खुली है। इस कारण सैनिकों को सीएसडी से सामान लाने के लिए मेरठ और सोनीपत जाना पड़ता है और न ही भूतपूर्व सैनिकों के लिए जनपद में कोई अस्पताल भी नहीं है। गंभीर बीमारी की स्थिति में उन्हें दिल्ली या मेरठ रेफर जाना पड़ता है। इसमें तेजपाल तोमर, बिजेंद्र सिंह, बलजोर सिंह, कृष्णपाल सिंह, राजपाल सिंह, ओमप्रकाश आदि ने विचार व्यक्त किए।
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