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गल्हैता के किसानों का कृषि दफ्तर पर प्रदर्शन
Updated Fri, 03 Nov 2017 01:02 AM IST
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बागपत। गल्हैता गांव के किसानों ने जिला कृषि कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा ऋण मोचन योजना में उन्हें सम्मलित नहीं किया, जबकि वह पात्र हैं। बैंक और लेखपाल ने मिलीभगत कर उन्हें अपात्र घोषित कराया है। इसकी जांच कराकर उनका ऋण माफ कराया जाना चाहिए।
गल्हैता के किसानों ने बताया कि फसली ऋण मोचन योजना के लिए सभी दस्तावेज बैंक और अफसरों को जमा कराए, करीब 10 किसान है जिन पर करीब साढ़े नौ या दस लाख के करीब बैंक का कर्ज है। पहली सूची में उन्हें बाहर कर दिया । दूसरी ओर तीसरी सूची देखी तो उसमें भी नाम नहीं था। आरोप लगाया कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से बाहर किया है। कृषि विभाग के अफसरों को अवगत कराया कि इसकी जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और उनका एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाए।
उन्होंने कहा यदि उनकी मांग नहीं मानी तो वह डीएम कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करेंगे, वहां भी न्याय नहीं मिला तो मुख्यमंत्री से शिकायत करने के लिए मजबूर होंगे। इसमें ऋषिपाल, होराम, बाबू, कमला देवी, रमेश कुमार, अमित, प्रेमदास, किरण पाल, तुलसी, सुरेंद्र आदि रहे। जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग से कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। यहां तो प्रमाण पत्र की जिम्मेदारी थी। लेखपाल और बैंक के कर्मचारियों ने जो सत्यापन किया, उसी के आधार पर किसानों के कर्ज माफ हुआ है।
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गल्हैता के किसानों ने बताया कि फसली ऋण मोचन योजना के लिए सभी दस्तावेज बैंक और अफसरों को जमा कराए, करीब 10 किसान है जिन पर करीब साढ़े नौ या दस लाख के करीब बैंक का कर्ज है। पहली सूची में उन्हें बाहर कर दिया । दूसरी ओर तीसरी सूची देखी तो उसमें भी नाम नहीं था। आरोप लगाया कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से बाहर किया है। कृषि विभाग के अफसरों को अवगत कराया कि इसकी जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और उनका एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाए।
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उन्होंने कहा यदि उनकी मांग नहीं मानी तो वह डीएम कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करेंगे, वहां भी न्याय नहीं मिला तो मुख्यमंत्री से शिकायत करने के लिए मजबूर होंगे। इसमें ऋषिपाल, होराम, बाबू, कमला देवी, रमेश कुमार, अमित, प्रेमदास, किरण पाल, तुलसी, सुरेंद्र आदि रहे। जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग से कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। यहां तो प्रमाण पत्र की जिम्मेदारी थी। लेखपाल और बैंक के कर्मचारियों ने जो सत्यापन किया, उसी के आधार पर किसानों के कर्ज माफ हुआ है।
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