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जैविक खेती की ओर कदम नहीं बढ़ाया तो परिणाम घातक
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बागपत। हिंडन और कृष्णा नदी क्षेत्र के गांवों के हालात सुधारने के लिए किसानों को जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाना होगा। इससे पर्यावरण शुद्ध होगा और लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
जिले के 55 से अधिक गांव के किसानों के लिए हिंडन और कृष्णा नदी मुसीबत बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। त्वचा रोग तो यहां आम है। प्रशासन ने जांच कराई तो जानलेवा रोग से गांव से 50 से अधिक लोग ग्रस्त मिले। स्वास्थ्य विभाग नदी के जल को मौत का कारण नहीं मानकर, फसलों में रासायनिक खादों के अत्यधिक इस्तेमाल को जिम्मेदार मान रहा है। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि किसानों को लगातार जैविक खेती करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत भी पूर्व में प्रशिक्षण दिए गए। उन्होंने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से भूमि की भी उर्वरा शक्ति निरंतर कम होती जा रही है। लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका विपरीत असर पड़ता है। खुद कृषक भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
वर्मी कंपोस्ट के गड्ढे भी हो गए बेकार
निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत हिंडन और कृष्णा नदी क्षेत्र के 55 गांवों में कृषि विभाग ने जैविक कृषि के प्रचार-प्रसार के तहत वर्मी कंपोस्ट के गड्ढे खुदवाए थे, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं किया गया। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि विभाग तो कृषकों को योजना के लाभ बता रहे हैं।
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जिले के 55 से अधिक गांव के किसानों के लिए हिंडन और कृष्णा नदी मुसीबत बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। त्वचा रोग तो यहां आम है। प्रशासन ने जांच कराई तो जानलेवा रोग से गांव से 50 से अधिक लोग ग्रस्त मिले। स्वास्थ्य विभाग नदी के जल को मौत का कारण नहीं मानकर, फसलों में रासायनिक खादों के अत्यधिक इस्तेमाल को जिम्मेदार मान रहा है। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि किसानों को लगातार जैविक खेती करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत भी पूर्व में प्रशिक्षण दिए गए। उन्होंने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से भूमि की भी उर्वरा शक्ति निरंतर कम होती जा रही है। लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका विपरीत असर पड़ता है। खुद कृषक भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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वर्मी कंपोस्ट के गड्ढे भी हो गए बेकार
निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत हिंडन और कृष्णा नदी क्षेत्र के 55 गांवों में कृषि विभाग ने जैविक कृषि के प्रचार-प्रसार के तहत वर्मी कंपोस्ट के गड्ढे खुदवाए थे, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं किया गया। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने बताया कि विभाग तो कृषकों को योजना के लाभ बता रहे हैं।
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