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वर्मी कंपोस्ट खाद है बनाना है आसान
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बागपत। अच्छी खेती के लिए किसान तरह-तरह के उपाय कर रहा है। जिससे उसे कम लागत में अच्छी सफलता मिले। ऐसे में किसानों के लिए वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करके अच्छी फसल का उत्पादन कर सकते हैं। वर्मी कंपोस्ट से खेती करने से कृषकों को ज्यादा लाभ मिलेगा।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि खाद बनाने के लिए आजकल कई विधियां प्रचलन में हैं। इनमें से कंपोस्ट, नाडेप या वर्मी कंपोस्ट प्रमुख हैं। वर्मी कंपोस्ट विधि का प्रचलन अन्य विधियों की तुलना में कही अधिक हैं। इस विधि में खाद का निर्माण अपेक्षाकृत कम समय में हो जाता है। इस विधि से प्राप्त खाद की गुणवत्ता भी अधिक होती है। गोबर को पोषण का सर्वाधिक श्रेष्ठ विकल्प माना जाता हैं, जिसमें पौधों के लिए आवश्यक सभी सूक्ष्म तत्व संतुलित मात्रा में उपलब्ध रहते हैं। इन तत्वों को पौधे या फसलों में बड़ी आसानी से अवशोषित कर लेती हैं। गोबर में उपस्थित सूक्ष्मजीव मृदा में उपस्थित जैव भार के विघटन का भी कार्य करते हैं। प्लास्टिक की बोरी या तिरपाल से बांस के माध्यम से टटिया बनाकर वर्मी कंपोस्ट का निर्माण किया जाता है। इस विधि में प्लास्टिक की बोरियों को खोलकर कई को मिलाकर सिलाई की जाती है। फिर बांस या लट्ठे के सहारे चारों ओर से सहारा देकर गोलाई में रखकर उसमें गोबर डाल दिया जाता है। गोबर में केंचुएं डालकर टटिया विधि से वर्मी कंपोस्ट का निर्माण किया जाता है। छायादार जगह पर जमीन के ऊपर तीन-चार फुट की चौड़ाई और अपनी आवश्यकता के अनुरूप लंबाई के बेड बनाए जाते हैं। इन बेड़ों का निर्माण गाय-भैंस के गोबर, जानवरों के नीचे बिछाए गए घास फूस और खरपतवार के अवशेष आदि से किया जाता है। ढेर की ऊंचाई लगभग एक फुट तक रखी जाती है।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि खाद बनाने के लिए आजकल कई विधियां प्रचलन में हैं। इनमें से कंपोस्ट, नाडेप या वर्मी कंपोस्ट प्रमुख हैं। वर्मी कंपोस्ट विधि का प्रचलन अन्य विधियों की तुलना में कही अधिक हैं। इस विधि में खाद का निर्माण अपेक्षाकृत कम समय में हो जाता है। इस विधि से प्राप्त खाद की गुणवत्ता भी अधिक होती है। गोबर को पोषण का सर्वाधिक श्रेष्ठ विकल्प माना जाता हैं, जिसमें पौधों के लिए आवश्यक सभी सूक्ष्म तत्व संतुलित मात्रा में उपलब्ध रहते हैं। इन तत्वों को पौधे या फसलों में बड़ी आसानी से अवशोषित कर लेती हैं। गोबर में उपस्थित सूक्ष्मजीव मृदा में उपस्थित जैव भार के विघटन का भी कार्य करते हैं। प्लास्टिक की बोरी या तिरपाल से बांस के माध्यम से टटिया बनाकर वर्मी कंपोस्ट का निर्माण किया जाता है। इस विधि में प्लास्टिक की बोरियों को खोलकर कई को मिलाकर सिलाई की जाती है। फिर बांस या लट्ठे के सहारे चारों ओर से सहारा देकर गोलाई में रखकर उसमें गोबर डाल दिया जाता है। गोबर में केंचुएं डालकर टटिया विधि से वर्मी कंपोस्ट का निर्माण किया जाता है। छायादार जगह पर जमीन के ऊपर तीन-चार फुट की चौड़ाई और अपनी आवश्यकता के अनुरूप लंबाई के बेड बनाए जाते हैं। इन बेड़ों का निर्माण गाय-भैंस के गोबर, जानवरों के नीचे बिछाए गए घास फूस और खरपतवार के अवशेष आदि से किया जाता है। ढेर की ऊंचाई लगभग एक फुट तक रखी जाती है।
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