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चंदायन पुरा स्थल में दोबारा मिले 5000 वर्ष प्राचीन पुरावशेष
Updated Tue, 29 May 2018 01:04 AM IST
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बड़ौत/ बिनौली (बागपत)।
विश्व प्रसिद्ध गांव चंदायन पुरा स्थल से करीब 500 मीटर आगे प्रेम सिंह किसान के खेत से मिट्टी उठवाते समय पुरावशेषों के अवशेष प्राप्त हो रहे हैं। इसकी सूचना किसानों ने शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन को दी। सोमवार को उन्होंने चंदायन गांव के इस पुरा स्थल का दौरा कर वहां से प्राप्त टेराकोटा (मिट्टी) के मृदभांडों के अवशेषों को एकत्रित किया और मिल रहे पुरावशेषों के प्रारंभिक अध्ययन के बाद दावा किया कि यह सब अवशेष भारत की प्राचीनतम मानव सभ्यता के प्रमाण हैं, इनको अभी तक हुई वैज्ञानिक अनुसंधान के बाद प्राप्त कार्बन डेटझिंग में करीब 3000 बीसी से 5000 बीसी तक माना गया है।
जैन का कहना है कि चंदायन में एक जून 2014 को एक खेत से ईंट पथाई के लिए मिट्टी खुदाई करते समय मजदूरों को एक मानव कंकाल मिला था। इस कंकाल के माथे पर लगा एक धातु का मुकुट, मिट्टी के बर्तन भी मजदूरों को मिले थे, अगले ही दिन शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने मौका मुआयना कर खेत से प्राप्त अवशेषों को निरीक्षण कर एक रिपोर्ट एएसआई को भेज दी। इसी श्रृंखला में अब फिर से चंदायन उत्खनन स्थल के बेहद नजदीक के खेत से पुरातत्व विदों को जो पुरा सामग्री प्राप्त हुई है, वह अत्यंत दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण है। प्राप्त सामग्री में मृद भांडों के अवशेष जिनमें लघु मृण पात्र, वृहद वृतुलाकार मृण पात्र, खेलने की गोटियां, टेराकोटा मनका। उसकी विधिवत फोटोग्राफी कर उस स्थल का भौगोलिक स्थिति भी नोट कर एएसआई उत्खनन शाखा द्वितीय व महानिदेशक कार्यालय को भेजी जा रही है। उन्होंने कहा यहां भी बरनावा, सिनौली की भांति पुन: वृहद उत्खनन करने की आवश्यकता है, ताकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक प्राचीनतम केंद्र जनपद बागपत समग्र विश्व में अपनी संस्कृति और सभ्यता को कायम कर सके।
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विश्व प्रसिद्ध गांव चंदायन पुरा स्थल से करीब 500 मीटर आगे प्रेम सिंह किसान के खेत से मिट्टी उठवाते समय पुरावशेषों के अवशेष प्राप्त हो रहे हैं। इसकी सूचना किसानों ने शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन को दी। सोमवार को उन्होंने चंदायन गांव के इस पुरा स्थल का दौरा कर वहां से प्राप्त टेराकोटा (मिट्टी) के मृदभांडों के अवशेषों को एकत्रित किया और मिल रहे पुरावशेषों के प्रारंभिक अध्ययन के बाद दावा किया कि यह सब अवशेष भारत की प्राचीनतम मानव सभ्यता के प्रमाण हैं, इनको अभी तक हुई वैज्ञानिक अनुसंधान के बाद प्राप्त कार्बन डेटझिंग में करीब 3000 बीसी से 5000 बीसी तक माना गया है।
जैन का कहना है कि चंदायन में एक जून 2014 को एक खेत से ईंट पथाई के लिए मिट्टी खुदाई करते समय मजदूरों को एक मानव कंकाल मिला था। इस कंकाल के माथे पर लगा एक धातु का मुकुट, मिट्टी के बर्तन भी मजदूरों को मिले थे, अगले ही दिन शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने मौका मुआयना कर खेत से प्राप्त अवशेषों को निरीक्षण कर एक रिपोर्ट एएसआई को भेज दी। इसी श्रृंखला में अब फिर से चंदायन उत्खनन स्थल के बेहद नजदीक के खेत से पुरातत्व विदों को जो पुरा सामग्री प्राप्त हुई है, वह अत्यंत दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण है। प्राप्त सामग्री में मृद भांडों के अवशेष जिनमें लघु मृण पात्र, वृहद वृतुलाकार मृण पात्र, खेलने की गोटियां, टेराकोटा मनका। उसकी विधिवत फोटोग्राफी कर उस स्थल का भौगोलिक स्थिति भी नोट कर एएसआई उत्खनन शाखा द्वितीय व महानिदेशक कार्यालय को भेजी जा रही है। उन्होंने कहा यहां भी बरनावा, सिनौली की भांति पुन: वृहद उत्खनन करने की आवश्यकता है, ताकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक प्राचीनतम केंद्र जनपद बागपत समग्र विश्व में अपनी संस्कृति और सभ्यता को कायम कर सके।
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