{"_id":"5af49faa4f1c1b3a0b8b9451","slug":"121525981098-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्वकर्मा जयंती का अवकाश किया जाए बहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्वकर्मा जयंती का अवकाश किया जाए बहाल
Updated Fri, 11 May 2018 01:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत। विश्वकर्मा एकता विकास सभा के सदस्यों ने कलक्ट्रेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन डीएम ऋषिरेंद्र कुमार को सौंपा। इसके साथ ही भगवान विश्वकर्मा को महापुरुष की संज्ञा देने पर रोष व्यक्त किया। साथ ही हरियाणा में विश्वकर्मा जयंती को मजदूर - श्रम दिवस के रूप में नहीं मनाने की मांग की।
बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट में विश्वकर्मा एकता विकास सभा के सदस्य एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले विश्वकर्मा श्रम सम्मान से विश्वकर्मा का नाम हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को हरियाणा सरकार ने श्रमिक - मजदूर दिवस के रूप में मनाने के आदेश को वापस लिया जाए। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रद्द किए अवकाश को बहाल किया जाए।
ज्ञापन में कहा कि विश्वकर्मा समाज को सरकारी नौकरी से लेकर लोकसभा विधानसभा में जनसंख्या के अनुसार भागीदारी दी जाए। भगवान विश्वकर्मा को महापुरुष, मजदूर और श्रमिक बताकर उनका अपमान किया जा रहा है। वहीं समाज के लोगों की आपराधिक घटनाएं बढ़ रही है। जल्द कोई कार्रवाई नहीं हुई तो विश्वकर्मा समाज आंदोलन करने को बाध्य होगा। इसमें एडवोकेट मनीष विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, प्रधान रोहताश, पंडित विनोद, प्रदीप, सचिन, महेंद्र सिंह, सुरेंद्र, राकेश, राजीव, परमजीत, विक्रम, नरेंद्र, प्रताप, जोनी, यशवीर, चिराग, गौरव, बाबूराम, पद्म सिंह, सचिन विश्वकर्मा आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट में विश्वकर्मा एकता विकास सभा के सदस्य एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले विश्वकर्मा श्रम सम्मान से विश्वकर्मा का नाम हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को हरियाणा सरकार ने श्रमिक - मजदूर दिवस के रूप में मनाने के आदेश को वापस लिया जाए। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रद्द किए अवकाश को बहाल किया जाए।
विज्ञापन
ज्ञापन में कहा कि विश्वकर्मा समाज को सरकारी नौकरी से लेकर लोकसभा विधानसभा में जनसंख्या के अनुसार भागीदारी दी जाए। भगवान विश्वकर्मा को महापुरुष, मजदूर और श्रमिक बताकर उनका अपमान किया जा रहा है। वहीं समाज के लोगों की आपराधिक घटनाएं बढ़ रही है। जल्द कोई कार्रवाई नहीं हुई तो विश्वकर्मा समाज आंदोलन करने को बाध्य होगा। इसमें एडवोकेट मनीष विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, प्रधान रोहताश, पंडित विनोद, प्रदीप, सचिन, महेंद्र सिंह, सुरेंद्र, राकेश, राजीव, परमजीत, विक्रम, नरेंद्र, प्रताप, जोनी, यशवीर, चिराग, गौरव, बाबूराम, पद्म सिंह, सचिन विश्वकर्मा आदि रहे।
विज्ञापन