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धूल के गुबार में फंसी जिंदगियां
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:00 AM IST
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बागपत। गौरीपुर मोड़ के गड्ढे जानलेवा हैं, यहां उड़ते धूल के गुबार बीमारी परोस रहे हैं। वाहनों की आवाजाही के चलते यहां गड्ढों से दिनभर धूल उड़ती रहती है। सिर्फ गौरीपुर मोड़ ही नहीं, इस धूल से सिसाना, निवाड़ा और गौरीपुर प्रभावित हैं। आंख की बीमारी लोगों को जकड़ रही है। त्वचा और पेट की बीमारी भी बढ़ी है। सांस और दमे की भी मरीज बढ़ रहे हैं। तिराहे पर गड्ढे , गंदगी और धूल के गुबार के कारण लोगों का व्यापार चौपट होने लगा है। फल और मिठाई की दुकानों पर ग्राहक नहीं ठहर रहे हैं। ढाबे बंद होने की कगार पर हैं। लोगों ने कहा बच्चों के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है। यहां से 24 घंटे वाहन गुजरते हैं, इसके कारण धूल लोगों के घरों तक पहुंचती है। ग्रामीण सवाल उठाते हैं कि तीन गांव की समस्या पर सिस्टम मौन क्यों हैं।
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर बागपत कलक्ट्रेट से निकलते ही गड्ढे और धूल के गुबार दिखे तो समझिए आप गौरीपुर मोड़ पर हैं। सोनीपत जाने वाला मार्ग यहां पर दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से जुड़कर टी-प्वाइंट बनाता है। हरियाणा, यूपी और दिल्ली के वाहनों का यहां सबसे ज्यादा आवागमन रहता है। यहां पर कई-कई फुट गहरे गड्ढे हैं, इनसे वाहनों का निकलना मुश्किल हैं। आए दिन यहां हादसे होते हैं, इनमें लोगों की जान भी जा चुकी है। जिला अस्पताल में कार्यरत मेडिकल अफसर डॉ. भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि धूल में अधिक समय तक रहने के कारण अस्थमा का खतरा रहता है। सांस और एलर्जी समेत अन्य बीमारियां भी हो सकती है। धूल से बचाव जरूरी है।
निवाड़ा के नजीर का कहना है कि धूल के चलते आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही है। उसकी वेल्डिंग की दुकान पर भी तिराहा बदहाल होने के कारण ग्राहक नहीं आते हैं। गौरीपुर निवासी सुमित्रा यहां चाय की दुकान चलाती है। वह कहती है कि दुकानदारी प्रभावित हो रही है, यहां ग्राहक नहीं आते हैं। दिनभर वह भी दुकान की सफाई ही करती है। ढाबा संचालक साजिद का कहना है कि धूल के गुबार और गड्ढों के कारण तीन गांव के लोग परेशानी झेल रहे हैं। यहां दुकानों पर ग्राहक रुकने बंद हो गए हैं, इससे आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। महबूब का कहना है कि प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर समस्या का समाधान करना चाहिए। धूल के कारण गांवों में बीमारी फैल रही है। बच्चों के लिए यह धूल बेहद खतरनाक है। जिले के प्रभारी मंत्री एसपी सिंह बघेल खुद इस टी प्वाइंट के निर्माण की बात कह चुके हैं, लेकिन अभी तक बजट स्वीकृत होकर फाइलों में ही अटका हुआ है।
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दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर बागपत कलक्ट्रेट से निकलते ही गड्ढे और धूल के गुबार दिखे तो समझिए आप गौरीपुर मोड़ पर हैं। सोनीपत जाने वाला मार्ग यहां पर दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से जुड़कर टी-प्वाइंट बनाता है। हरियाणा, यूपी और दिल्ली के वाहनों का यहां सबसे ज्यादा आवागमन रहता है। यहां पर कई-कई फुट गहरे गड्ढे हैं, इनसे वाहनों का निकलना मुश्किल हैं। आए दिन यहां हादसे होते हैं, इनमें लोगों की जान भी जा चुकी है। जिला अस्पताल में कार्यरत मेडिकल अफसर डॉ. भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि धूल में अधिक समय तक रहने के कारण अस्थमा का खतरा रहता है। सांस और एलर्जी समेत अन्य बीमारियां भी हो सकती है। धूल से बचाव जरूरी है।
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निवाड़ा के नजीर का कहना है कि धूल के चलते आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही है। उसकी वेल्डिंग की दुकान पर भी तिराहा बदहाल होने के कारण ग्राहक नहीं आते हैं। गौरीपुर निवासी सुमित्रा यहां चाय की दुकान चलाती है। वह कहती है कि दुकानदारी प्रभावित हो रही है, यहां ग्राहक नहीं आते हैं। दिनभर वह भी दुकान की सफाई ही करती है। ढाबा संचालक साजिद का कहना है कि धूल के गुबार और गड्ढों के कारण तीन गांव के लोग परेशानी झेल रहे हैं। यहां दुकानों पर ग्राहक रुकने बंद हो गए हैं, इससे आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। महबूब का कहना है कि प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर समस्या का समाधान करना चाहिए। धूल के कारण गांवों में बीमारी फैल रही है। बच्चों के लिए यह धूल बेहद खतरनाक है। जिले के प्रभारी मंत्री एसपी सिंह बघेल खुद इस टी प्वाइंट के निर्माण की बात कह चुके हैं, लेकिन अभी तक बजट स्वीकृत होकर फाइलों में ही अटका हुआ है।
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