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खपराणा के घर में घुसा सल्लू सांप
Updated Fri, 21 Jul 2017 01:19 AM IST
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खपराणा के घर में घुसा सल्लू सांप
- इसे देखने के लिए लोगों में रही उत्सुकता
फोटो संख्या- दो की सीरीज
अमर उजाला ब्यूरो
बिनौली (बागपत)। खपराणा गांव के एक घर में सल्लू सांप यानी पैंगोलिन घुस गया। पहले ग्रामीण इससे भयभीत हो गए। लेकिन वन विभाग की टीम ने पहुंचकर लोगों को बताया कि इससे किसी तरह का खतरा नहीं है। ग्रामीणों के सहयोग से वन विभाग की टीम ने इसे जंगल में छुड़वा दिया है। चींटी खोर के नाम की पहचान रखने वाला यह जीव अब बहुत कम देखने को मिलता है।
बृहस्पतिवार को खपराणा गांव के एक घर में सल्लू सांप घुसा तो विचित्र जीव को देखकर परिवार के लोग डर गए। शोर मचाने पर ग्रामीण एकत्र हुए और वन विभाग को मामले की जानकारी दी। वन क्षेत्राधिकारी बड़ौत राजपाल सिंह, वन रक्षक मनोज कुमार, ओम सिंह और संजय कुमार गांव पहुंचे। इन्होंने ग्रामीणों को बताया कि यह जीव चींटी और दीमक खाता है। ग्रामीणों के सहयोग से बोरे में बंद कर वन विभाग के अधिकारियों ने पैंगोलिन को बरनावा वन क्षेत्र में छुड़वा दिया। इससे किसी तरह का खतरा नहीं होता है।
इनसेट
विलुप्त होने की कगार पर हैं चींटी खोर
डीएफओ सुधीर कुमार बताते हैं कि पैंगोलिन विलुप्तप्राय जीवों में शामिल हैं। कुछ लोग इसे उदबिलाऊ भी कहते हैं। इसका शिकार प्रतिबंधित है और आरोपियों को सात साल की सजा तक हो सकती है। भारतीय पैंगोलिन की आठ प्रजातियां है, जो संकटग्रस्त है। यह ऐसा जीव है जो अकेला रहता है। प्रजनन के समय ही यह सिर्फ मादा के संपर्क में आता है, इसके अलावा जंगल या नदी किनारे अकेला रहना पसंद करता है।
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पैंगोलिन हमेशा का अंदेशा होते ही फुटबाल की तरह गोल हो जाता है। इसके शल्क काफी मजबूत होते हैं और उन पर किसी हमले का कोई असर नहीं हो पाता है। कुछ लोग भ्रांतियों के कारण इसका शिकार भी करते हैं, जिस कारण इस जीव के अस्तित्व पर संकट के बादल हैं।
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- इसे देखने के लिए लोगों में रही उत्सुकता
फोटो संख्या- दो की सीरीज
अमर उजाला ब्यूरो
बिनौली (बागपत)। खपराणा गांव के एक घर में सल्लू सांप यानी पैंगोलिन घुस गया। पहले ग्रामीण इससे भयभीत हो गए। लेकिन वन विभाग की टीम ने पहुंचकर लोगों को बताया कि इससे किसी तरह का खतरा नहीं है। ग्रामीणों के सहयोग से वन विभाग की टीम ने इसे जंगल में छुड़वा दिया है। चींटी खोर के नाम की पहचान रखने वाला यह जीव अब बहुत कम देखने को मिलता है।
बृहस्पतिवार को खपराणा गांव के एक घर में सल्लू सांप घुसा तो विचित्र जीव को देखकर परिवार के लोग डर गए। शोर मचाने पर ग्रामीण एकत्र हुए और वन विभाग को मामले की जानकारी दी। वन क्षेत्राधिकारी बड़ौत राजपाल सिंह, वन रक्षक मनोज कुमार, ओम सिंह और संजय कुमार गांव पहुंचे। इन्होंने ग्रामीणों को बताया कि यह जीव चींटी और दीमक खाता है। ग्रामीणों के सहयोग से बोरे में बंद कर वन विभाग के अधिकारियों ने पैंगोलिन को बरनावा वन क्षेत्र में छुड़वा दिया। इससे किसी तरह का खतरा नहीं होता है।
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विलुप्त होने की कगार पर हैं चींटी खोर
डीएफओ सुधीर कुमार बताते हैं कि पैंगोलिन विलुप्तप्राय जीवों में शामिल हैं। कुछ लोग इसे उदबिलाऊ भी कहते हैं। इसका शिकार प्रतिबंधित है और आरोपियों को सात साल की सजा तक हो सकती है। भारतीय पैंगोलिन की आठ प्रजातियां है, जो संकटग्रस्त है। यह ऐसा जीव है जो अकेला रहता है। प्रजनन के समय ही यह सिर्फ मादा के संपर्क में आता है, इसके अलावा जंगल या नदी किनारे अकेला रहना पसंद करता है।
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पैंगोलिन हमेशा का अंदेशा होते ही फुटबाल की तरह गोल हो जाता है। इसके शल्क काफी मजबूत होते हैं और उन पर किसी हमले का कोई असर नहीं हो पाता है। कुछ लोग भ्रांतियों के कारण इसका शिकार भी करते हैं, जिस कारण इस जीव के अस्तित्व पर संकट के बादल हैं।