फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   1200 people left home without informing in five years

पांच साल में 1200 लोगों ने बिना बताए घर छोड़ा

Sun, 11 Jul 2021 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Jul 2021 11:21 PM IST
विज्ञापन
1200 people left home without informing in five years
बड़ौत (बागपत)। बच्चों ने जिद, युवाओं ने प्रेम-प्रसंग और बड़े-बुजुर्गों ने परिवार से सम्मान न मिलने पर अपने घर छोड़ दिए। बीते पांच साल में बागपत जनपद से करीब 1200 लोग बिना बताए घर से चले गए। इनमें से 410 नाबालिग लड़कियों में से 290 अभी नहीं मिली। 265 गायब महिलाओं में से 105 और 175 व्यक्तियों में से केवल 120 लोग ही मिल पाए। इसके अलावा 350 नाबालिग बच्चों में से केवल 95 को ही परिवार और पुलिस ढूंढ पाई। अभी तक 760 गायब लोगों को जमीन खा गई या फिर आसमां निकल गया, इस पर संदेह बरकरार है। गुमशुदगी के दो मामले ऐसे भी सामने आए, जिनमें नगर निवासी एक युवक व सिनौली गांव के एक बच्चे की हत्या कर दी गई थी।
विज्ञापन

ये पांच साल का रिकॉर्ड
वर्ष लापता
2016 165 लापता, 120 की तलाश बकाया
2017 195 लापता, 140 को नहीं तलाश पाई पुलिस
2018 210 लापता, 150 अभी नहीं मिले
2019 235 लापता, 170 की तलाश जारी
2020 250 लापता, 80 की तलाश बाकी
2021 जून माह तक लापता 145 लोगों में से अभी तक 45 को ढूंढना बाकी
लापता लोगों की हत्याएं भी हुई
केस नंबर एक : बड़ौत नगर की शताब्दी नगर कालोनी में रहने वाले राहुल की पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर उसकी हत्या कर शव नहर में फेंका दिया था। इस मामले में गुमशुदगी दर्ज करा दी थी।
विज्ञापन

केस नंबर दो : सिनौली गांव में तकरीबन तीन साल पहले एक बच्चे बंटी लापता हो गया था। जिसका शव गांव में ही एक मकान पर पड़ा मिला था।
केस नंबर तीन: तकरीबन छह माह पूर्व मलकपुर गांव में पुलिस को एक अधजली लाश मिली थी, काफी खोजबीन के बाद भी आज तक पुलिस का पहचान नहीं करा पाई।
जिस उम्मीद के साथ मा-बाप बच्चे को पालते है और बाद में बुढ़ापा आने पर बच्चे उम्मीद पूरी न करें, ऐसे में कोई नशे की लत, मान न मिलने, मानसिक तनाव के कारण घर छोड़ते हैं। ऐसे मामले में कमी लाने के लिए काउंसिलिंग आवश्यक है। परिवार के सदस्य एक-दूसरे का दर्द सांझा करें, अपना दिल खोलें। परेशान होने पर परिवार से बातचीत करें, ताकि परिवार के सदस्यों को लगे कि कोई अपना उनका ध्यान रखता है। तभी इस प्रकार के मामले में कमी आएगी। - डॉ. अंशु अग्रवाल, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष, दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज।
विज्ञापन
विज्ञापन

गुमशुदगी के केसों की जांच में सामने आया है कि आर्थिक, सामाजिक परेशानी झेलने में असमर्थ लोगों ने परिवार को छोड़कर जाना उचित माना। कुछ केसों में गुमशुदा लोगों के शव मिले, इनमें से 90 फीसद केस सुलझाकर आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। अनसुलझे केसों को सुलझाने की कोशिशें जारी हैं। - आलोक कुमार, सीओ बड़ौत।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed