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भूतपूर्व सैनिक ने खोली ओडीएफ गांव की पोल
Updated Sun, 16 Sep 2018 01:20 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
बिनौली क्षेत्र का गांव मुकीमपुरा के लोग आज भी अपनी जन सुविधाओं से वंचित है। आलम यह है कि आज भी गांव की महिलाओं को खुले में खेतों मेें शौच करने के लिए कई कई मील तक जाना पड़ता है। पेयजल संकट के लिए भी गांव की महिलाओं को नलकूपों से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। समस्याओं से क्षुब्ध पुरुषों और महिलाओं ने शनिवार को गांव पहुंचे भूतपूर्व सैनिक व समाजसेवी सुभाष चंद कश्यप को समस्याओं से अवगत कराया तो उन्होंने प्रदर्शन कर प्रशासनिक अफसरों से गांव को जन सुविधाएं देने की मांग की।
शनिवार को गांव में प्रदर्शन कर भूतपूर्व सैनिक और समाजसेवी सुभाष चंद कश्यप ने बताया कि गांव में न तो चलने लायक रास्ते हैं और न ही बिजली और पानी की सुविधाएं। आज भी गांव की महिलाओं को पेयजल की व्यवस्था करने के लिए गांव से दूर जंगलों में लगे नलकूपों पर पानी लाना पड़ता है। पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण पूरा गांव जल भराव की समस्या से जूझ रहा है। आलम यह है कि जनपद के अफसरों ने पूरे जनपद को कागजों में ओडीएफ घोषित कर दिया, लेकिन आज भी गांव की महिलाएं जंगलों मेें खेतों में शौच जाने को मजबूर हैं। इस कारण महिलाओं और युवतियों के साथ छेड़खानी का डर बना रहता है। उन्होंने प्रशासनिक अफसरों से गांव के लोगों को जन सुविधा दिलाने की मांग को लेकर गांव मेें अधूरे पडे़ शौचालय के गड्ढों में घुसकर प्रदर्शन किया और आक्रोश जताते हुए जल्द से जल्द मांग पूरी करने की मांग उठाई। साथ ही मांग पूरी न होने पर आंदोलन चलाने की चेतावनी दी। प्रदर्शन मेें संजीव, अशोक, प्रमोद, आकाश, जयवीर, बबीता, उर्मिला, संगीता, राजकली, उमा, देवी, शिमला, अंजु, बरखा आदि रहे।
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बिनौली क्षेत्र का गांव मुकीमपुरा के लोग आज भी अपनी जन सुविधाओं से वंचित है। आलम यह है कि आज भी गांव की महिलाओं को खुले में खेतों मेें शौच करने के लिए कई कई मील तक जाना पड़ता है। पेयजल संकट के लिए भी गांव की महिलाओं को नलकूपों से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। समस्याओं से क्षुब्ध पुरुषों और महिलाओं ने शनिवार को गांव पहुंचे भूतपूर्व सैनिक व समाजसेवी सुभाष चंद कश्यप को समस्याओं से अवगत कराया तो उन्होंने प्रदर्शन कर प्रशासनिक अफसरों से गांव को जन सुविधाएं देने की मांग की।
शनिवार को गांव में प्रदर्शन कर भूतपूर्व सैनिक और समाजसेवी सुभाष चंद कश्यप ने बताया कि गांव में न तो चलने लायक रास्ते हैं और न ही बिजली और पानी की सुविधाएं। आज भी गांव की महिलाओं को पेयजल की व्यवस्था करने के लिए गांव से दूर जंगलों में लगे नलकूपों पर पानी लाना पड़ता है। पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण पूरा गांव जल भराव की समस्या से जूझ रहा है। आलम यह है कि जनपद के अफसरों ने पूरे जनपद को कागजों में ओडीएफ घोषित कर दिया, लेकिन आज भी गांव की महिलाएं जंगलों मेें खेतों में शौच जाने को मजबूर हैं। इस कारण महिलाओं और युवतियों के साथ छेड़खानी का डर बना रहता है। उन्होंने प्रशासनिक अफसरों से गांव के लोगों को जन सुविधा दिलाने की मांग को लेकर गांव मेें अधूरे पडे़ शौचालय के गड्ढों में घुसकर प्रदर्शन किया और आक्रोश जताते हुए जल्द से जल्द मांग पूरी करने की मांग उठाई। साथ ही मांग पूरी न होने पर आंदोलन चलाने की चेतावनी दी। प्रदर्शन मेें संजीव, अशोक, प्रमोद, आकाश, जयवीर, बबीता, उर्मिला, संगीता, राजकली, उमा, देवी, शिमला, अंजु, बरखा आदि रहे।
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