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झूठे शपथ पत्र देना पड़ा महंगा, होगा मुकदमा
Updated Fri, 13 Jul 2018 01:32 AM IST
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बागपत। पांच अफसर, राशन डीलर और झूठे शपथ पत्र देने वाले 17 लोगों पर सीजेएम ने बागपत कोतवाली को रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए है। राशन की काला बाजारी को लेकर सरूरपुर कलां गांव निवासी राजेंद्र ने न्यायालय में इसकी पैरवी की थी।
सरूरपुर कलां गांव निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में राशन की दुकान वैशू के नाम से है, लेकिन बिल्लू इसे संचालित कर रहा था। आपूर्ति विभाग और तहसील प्रशासन की साठगांठ से राशन की कालाबाजारी की जा रही थी। गरीबों का राशन उपलब्ध नहीं कराया जाता है। झूठे कागजों से सस्ता गल्ला विक्रेता की दुकान को गैर कानूनी रूप से कब्जे में ले लिया। आरटीआई से जो सूचना मांगी, इसमें तत्कालीन तहसीलदार ने सूचना दी कि वीरसैन उर्फ वैशू उर्फ बिल्लू एक ही व्यक्ति के तीन नाम है, जबकि वैशु और बिल्लू दो अलग-अलग व्यक्ति है। इस मामले में उच्चाधिकारियों को झूठे शपथ पत्र दिए। अफसरों को भी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई।
राजेंद्र सिंह ने बताया कि न्यायालय में वाद दायर कराया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूर्व के अफसर एसडीएम, तहसीलदार, डीएसओ, उपनिरीक्षक सहित पूर्व प्रधान, वेशु उर्फ यशपाल, बिल्लू उर्फ वीरेसैन, बिट्टू कुमार अंतिल, सुभाष, शाहिद, निजामुद्दीन, गुलाब, जहूर, मेहरबान, संजीव, विनय, राजेश, श्यामवीर, शकील, सतेंद्र, विशम्बर, विष्णु के खिलाफ थानाध्यक्ष बागपत को 24 घंटे में रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। राजेंद्र ने बताया लंबित लड़ाई के बाद जीत मिली। वादी के अधिवक्ता एडवोकेट पवन तिवारी ने बताया कि 2013 से वाद की शुरूआत हुई। पांच वर्ष बाद कामयाबी मिली है। राशन की काला बाजारी के लिए अभी अभियान जारी रहेगा।
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सरूरपुर कलां गांव निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में राशन की दुकान वैशू के नाम से है, लेकिन बिल्लू इसे संचालित कर रहा था। आपूर्ति विभाग और तहसील प्रशासन की साठगांठ से राशन की कालाबाजारी की जा रही थी। गरीबों का राशन उपलब्ध नहीं कराया जाता है। झूठे कागजों से सस्ता गल्ला विक्रेता की दुकान को गैर कानूनी रूप से कब्जे में ले लिया। आरटीआई से जो सूचना मांगी, इसमें तत्कालीन तहसीलदार ने सूचना दी कि वीरसैन उर्फ वैशू उर्फ बिल्लू एक ही व्यक्ति के तीन नाम है, जबकि वैशु और बिल्लू दो अलग-अलग व्यक्ति है। इस मामले में उच्चाधिकारियों को झूठे शपथ पत्र दिए। अफसरों को भी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई।
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राजेंद्र सिंह ने बताया कि न्यायालय में वाद दायर कराया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूर्व के अफसर एसडीएम, तहसीलदार, डीएसओ, उपनिरीक्षक सहित पूर्व प्रधान, वेशु उर्फ यशपाल, बिल्लू उर्फ वीरेसैन, बिट्टू कुमार अंतिल, सुभाष, शाहिद, निजामुद्दीन, गुलाब, जहूर, मेहरबान, संजीव, विनय, राजेश, श्यामवीर, शकील, सतेंद्र, विशम्बर, विष्णु के खिलाफ थानाध्यक्ष बागपत को 24 घंटे में रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। राजेंद्र ने बताया लंबित लड़ाई के बाद जीत मिली। वादी के अधिवक्ता एडवोकेट पवन तिवारी ने बताया कि 2013 से वाद की शुरूआत हुई। पांच वर्ष बाद कामयाबी मिली है। राशन की काला बाजारी के लिए अभी अभियान जारी रहेगा।
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