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किसानों का शोषण बर्दाश्त नहीं करेगी भाकियू : राकेश टिकैत
Updated Fri, 22 Dec 2017 12:53 AM IST
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दोघट(बागपत)। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि बढ़ी विद्युत दरों एवं बकाया गन्ना भुगतान को लेकर भाकियू लड़ाई लड़ रही है। इसको लेकर मार्च माह में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
बृहस्पतिवार को दोघट कस्बे में चौधरी राजेंद्र सिंह के आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार ने बिजली के बिलों में दो गुना से भी अधिक वृद्धि कर जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। सरकार को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। बढ़ाई गई विद्युत दरों का सच मार्च तक सामने आ जाएगा। ग्रामीण घरेलू बिजली के बिल 800 रुपये प्रति माह हो जाएगा। जिसे जनता अभी समझ नहीं पा रही है। बढ़ी विद्युत दरों से किसान ही नहीं बल्कि भूमिहीन लोग भी त्रस्त हैं। इसके लिए किसानों को संगठित होकर लड़ना पड़ेगा, अन्यथा सरकार किसानों का यूं ही शोषण करती रहेगी। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उप्र का किसान बकाया गन्ना भुगतान न होने से आर्थिक तंगी झेल रहा है। गन्ना मिल सरकार के इशारे पर चल रहे हैं। मिल मालिक व सरकार साठगांठ कर किसानों का शोषण कर रही है और उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है। मिल चालू हुए दो माह से भी अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी तक सामान्य प्रजाति के गन्ने की पर्चियां नहीं भेजी जा रही है। खेत खाली न होने से किसान गेहूं की फसल की बुवाई तक नहीं कर पा रहा है। इसे भाकियू कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। इसको लेकर 27 दिसंबर को मंडल स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। 9 जनवरी 2018 को प्रत्येक ब्लॉक मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे और मार्च माह में बड़े स्तर पर सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस मौके पर राजेंद्र चौधरी, गौरव राठी, उपेंद्र मुखिया आदि।
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बृहस्पतिवार को दोघट कस्बे में चौधरी राजेंद्र सिंह के आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार ने बिजली के बिलों में दो गुना से भी अधिक वृद्धि कर जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। सरकार को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। बढ़ाई गई विद्युत दरों का सच मार्च तक सामने आ जाएगा। ग्रामीण घरेलू बिजली के बिल 800 रुपये प्रति माह हो जाएगा। जिसे जनता अभी समझ नहीं पा रही है। बढ़ी विद्युत दरों से किसान ही नहीं बल्कि भूमिहीन लोग भी त्रस्त हैं। इसके लिए किसानों को संगठित होकर लड़ना पड़ेगा, अन्यथा सरकार किसानों का यूं ही शोषण करती रहेगी। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उप्र का किसान बकाया गन्ना भुगतान न होने से आर्थिक तंगी झेल रहा है। गन्ना मिल सरकार के इशारे पर चल रहे हैं। मिल मालिक व सरकार साठगांठ कर किसानों का शोषण कर रही है और उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है। मिल चालू हुए दो माह से भी अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी तक सामान्य प्रजाति के गन्ने की पर्चियां नहीं भेजी जा रही है। खेत खाली न होने से किसान गेहूं की फसल की बुवाई तक नहीं कर पा रहा है। इसे भाकियू कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। इसको लेकर 27 दिसंबर को मंडल स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। 9 जनवरी 2018 को प्रत्येक ब्लॉक मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे और मार्च माह में बड़े स्तर पर सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस मौके पर राजेंद्र चौधरी, गौरव राठी, उपेंद्र मुखिया आदि।
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