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%सरकार जानती हैं दर्द, फिर क्यों नहीं बनवाती हाईवे’

Wed, 30 Aug 2017 01:15 AM IST
Updated Wed, 30 Aug 2017 01:15 AM IST
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%सरकार जानती हैं दर्द, फिर क्यों नहीं बनवाती हाईवे’
बागपत। मंडौला गांव से बागपत की दूरी करीब 16 किमी है। यात्रा का स्वागत गड्ढे करते हैं। सिर्फ मंडौला से डूंडाहेड़ा चेकपोस्ट तक ही गाजियाबाद और बागपत को जोड़ने वाली सीमा में ही कई सौ गड्ढे हैं। हाईवे पर गड्ढे होने से आए दिन रोज वाहन पलटते हैं, धूल उड़ती है। हादसे होते हैं, लेकिन सिस्टम की नींद नहीं टूटती।
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डूंडाहेड़ा से बागपत तक के टुकड़े की बात करें तो प्रत्येक गांव के सामने हाईवे में जानलेवा गड्ढे बन गए हैं। हसनपुर मसूरी के किसान चमन लाल बताते हैं कि एक गड्ढा भरवाने की फुर्सत प्रशासन को नहीं है। बाइक सवाल उछलकर गिर जाते हैं, कार क्षतिग्रस्त होती है। कई लोगों की मौत हो चुकी है, रोजाना वाहन चालक घायल होता है। ग्रामीण राजन शर्मा कहते हैं कि किसी को लोगों का दर्द जानने की फुर्सत नहीं है। खेकड़ा पाठशाला के इलाके में गड्ढों की बदौलत वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। मवी कलां, काठा और नंगला बहलोलपुर के ग्रामीण हाईवे के गड्ढे दिखाने लगते हैं। कहते हैं यहां आने वाले अधिकारियों को बार-बार निर्माण कराने की बात कही जाती है, लेकिन सिस्टम नकारा है। हसनपुर मसूरी में हाईवे किनारे बैठे लोगों ने कहा यहां हादसे होते हैं। भयावह गड्ढे हैं, लेकिन निर्माण तो दूर इन गड्ढों को नहीं भरवाया जा रहा है। संतोष कुमार, सूरज और राजू का कहना है कि राजनीतिक लोगों को अपने वादे याद करने चाहिए।
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पढ़िए, लोगों ने क्या कहा?
बड़ौत के डॉ दिलावर सिंह कहते हैं कि कांवड़ यात्रा से पहले ही बजट पास होने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक निर्माण क्या मरम्मत तक नहीं हुई।
काठा गांव के मोहित कुमार का कहना है कि रोजाना यहां वाहन पलटते हैं। प्रशासन को सूचना दी जाती है, लेकिन गड्ढे तक नहीं भरे जाते।
काठा के सतेंद्र चौधरी कहते हैं कि हाइवे का निर्माण शीघ्र होना चाहिए, जिससे यहां से गुजरने वाले लोगों को राहत मिल जाए।

जहां बस पलटी, भरवा दी गई ईंटें
बागपत। अमर उजाला ने लोगों की समस्या उठाई। 29 अगस्त के अंक में हाईवे की बदहाली का समाचार प्रकाशित होते ही लोक निर्माण विभाग हरकत में आया। काठा गंाव में जहां बस पलटी , इसके आसपास के गड्ढे भरवाकर खानापूर्ति करा दी गई। लोगों ने कहा जहां ईंटें और मिट्टी भरवाई, वह बरसात होते ही खाली हो जाती है, जिससे फिर परेशानी होती है।
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दिल्ली किनारे, लेकिन दिल्ली से दूर
बागपत। कहने के लिए खेकड़ा और डूंडाहेड़ा दिल्ली से कुछ ही किमी दूर है, लेकिन दिल्ली-सहारनपुर हाईवे की खस्ता हालत के चलते कम दूरी पार करना भी आसान नहीं है। बागपत, मंडौला और फिर लोनी को पार करना आसान नहीं है। इसके चलते दिल्ली से कम दूरी का सफर भी कई-कई घंटे में पूरा हो रहा है।


राजनीतिक मंचों पर हावी रहा हाईवे
लोकसभा चुनाव से पहले बड़ौत रैली में आए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था हाईवे के दर्द से लोग परेशान हैं, इसका निर्माण कराएंगे। बागपत का विकास कराया जाएगा। दो माह पहले ही केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने कहा जल्द ही निर्माण शुरू होगा। सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह ने कई बार निर्माण कराने की बात कही, लेकिन फिलहाल वह यूपी सरकार से एनओसी मिलने की बात कह रहे हैं। निर्माण कब होगा, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी हाईवे निर्माण के लिए पैदल मार्च कर चुके हैं, लेकिन हालात नहीं सुधरे।
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