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ईश्वर का स्मरण करने से मनुष्य का होता है कल्याण
Updated Fri, 30 Mar 2018 12:36 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
जैनाचार्य रमेश मुनि ने कहा कि वर्तमान भौतिक युग में जहां व्यक्ति हिंसा, अन्याय, अनीति व अधर्म की गोद मेें बैठा है, उसके लिए महावीर की शिक्षाएं बहुत जरूरी है।
बृहस्पतिवार को स्थानक मंडी में धर्मसभा मेें उन्होंने कहा कि महावीर का युग विषमताओं से भरा युग था, जिसमें धर्म रुढ़ी बनकर रह गया था। जहां जातिवाद का बोलबाला अहंकार भरा था, शुद्ध की छाया भी व्यक्ति सहन नहीं कर सकता था। हिंसा का तांडव हो रहा था। नारी जाति की स्थिति भी खराब थी। ऐसे विषमताओं से भरे समय में महावीर ने जीवन निर्माण के नवीन सूत्र दिए, जहां जातिवाद को कोई स्थान नही था। प्रत्येक व्यक्ति को धर्म सुनने का अधिकार दिया। नारी जाति को बराबर का अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। तभी उसके जीवन का कल्याण हो सकता है। धर्मसभा में जयप्रकाश जैन, सुशील जैन, हेमचंद जैन, गौरव जैन, सुदेश जैन, कामता प्रसाद जैन शामिल रहे।
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जैनाचार्य रमेश मुनि ने कहा कि वर्तमान भौतिक युग में जहां व्यक्ति हिंसा, अन्याय, अनीति व अधर्म की गोद मेें बैठा है, उसके लिए महावीर की शिक्षाएं बहुत जरूरी है।
बृहस्पतिवार को स्थानक मंडी में धर्मसभा मेें उन्होंने कहा कि महावीर का युग विषमताओं से भरा युग था, जिसमें धर्म रुढ़ी बनकर रह गया था। जहां जातिवाद का बोलबाला अहंकार भरा था, शुद्ध की छाया भी व्यक्ति सहन नहीं कर सकता था। हिंसा का तांडव हो रहा था। नारी जाति की स्थिति भी खराब थी। ऐसे विषमताओं से भरे समय में महावीर ने जीवन निर्माण के नवीन सूत्र दिए, जहां जातिवाद को कोई स्थान नही था। प्रत्येक व्यक्ति को धर्म सुनने का अधिकार दिया। नारी जाति को बराबर का अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। तभी उसके जीवन का कल्याण हो सकता है। धर्मसभा में जयप्रकाश जैन, सुशील जैन, हेमचंद जैन, गौरव जैन, सुदेश जैन, कामता प्रसाद जैन शामिल रहे।
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