{"_id":"5a00bcac4f1c1b97678b9b1c","slug":"111509997740-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रैक्टर को वाणिज्यिक वाहन का दर्जा दिए जाना किसान विरोधी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रैक्टर को वाणिज्यिक वाहन का दर्जा दिए जाना किसान विरोधी
Updated Tue, 07 Nov 2017 01:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत। खेतीबाड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर को केंद्र सरकार की नई परिवहन नीति में वाणिज्यिक वाहन का दर्जा मिलेगा। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। ट्रैक्टर पर लगने वाली जीएसटी 12 फीसदी से बढ़कर सीधे 28 फीसदी पर पहुंच जाएगी। किसानों का कहना है कि सरकार के इस कदम से उन्हें सीधा नुकसान हुआ। किसान हित में ट्रैक्टर को वाणिज्यिक वाहन से अलग रखा जाना चाहिए।
देशखाप बड़ौत के चौधरी सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि नई परिवहन नीति से किसानों को जोर का झटका लगेगा। किसान पर हजारों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। यह किसान विरोधी फैसला है और इस पर किसान एकजुट होंगे।
पूर्व विधायक डॉ. महक सिंह कहते हैं कि वेस्ट यूपी में ट्रैक्टर किसान का अभिन्न अंग बन चुका है। भैंसा रखने का चलन कम हो रहा है। छोटी जोत के किसान भी अब ट्रैक्टर पर निर्भर है, ऐसे में सरकार की नई नीति से किसान को बड़ी मुसीबत होगी और उस पर भार बढ़ेगा। इस नीति को वापस लिया जाना चाहिए।
विज्ञापन
सपा के जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी कहते हैं कि सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। किसान को बड़ा नुकसान होगा। पहले ही गन्ने के बकाया भुगतान की समस्या से किसान जूझ रहे हैं, ट्रैक्टर पर महंगाई दूसरी बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। सरकार को चाहिए कि ट्रैक्टर को पहले जैसा ही रहने दें, इसके नियमों में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर का कहना है कि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन किया जाएगा। किसान पर हजारों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इस पर फिर से करने की आवश्यकता है। एक आम किसान के पास भी ट्रैक्टर है, जिस पर बेवजह यह नई परेशानी खड़ी होने जा रही है।
चौबीसी खाप के चौधरी सुभाष का कहना है कि किसानों को सरकार की प्राथमिकता पहले बकाया भुगतान की होनी चाहिए। ट्रैक्टर को नई नीति में शामिल कर गलत कदम उठाया गया है। छोटी जोत के किसान को बड़ा झटका लगेगा।
क्या है नया नियम
परिवहन नीति के नए ड्राफ्ट के मुताबिक सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 में संशोधन किया जा रहा है। पहले ट्रैक्टर को गैर परिवहन वाहन में गिना जाता था, लेकिन अब नए ड्राफ्ट में इसे परिवहन वाहन माना जाएगा।
ट्रैक्टर पर निर्भर किसान
बागपत। किसान ट्रैक्टर पर आश्रित है। गन्ने की ढुलाई से लेकर खेती के कार्य ट्रैक्टर से किए जाते हैं। छोटी जोत के अधिकतर किसानों ने भी भैंसा-बुग्गी के बजाए अब ट्रैक्टर और ट्रॉलियां बना ली है। जिससे इन किसानों को जोर का झटका लगेगा।
विज्ञापन
देशखाप बड़ौत के चौधरी सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि नई परिवहन नीति से किसानों को जोर का झटका लगेगा। किसान पर हजारों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। यह किसान विरोधी फैसला है और इस पर किसान एकजुट होंगे।
विज्ञापन
पूर्व विधायक डॉ. महक सिंह कहते हैं कि वेस्ट यूपी में ट्रैक्टर किसान का अभिन्न अंग बन चुका है। भैंसा रखने का चलन कम हो रहा है। छोटी जोत के किसान भी अब ट्रैक्टर पर निर्भर है, ऐसे में सरकार की नई नीति से किसान को बड़ी मुसीबत होगी और उस पर भार बढ़ेगा। इस नीति को वापस लिया जाना चाहिए।
विज्ञापन
सपा के जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी कहते हैं कि सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। किसान को बड़ा नुकसान होगा। पहले ही गन्ने के बकाया भुगतान की समस्या से किसान जूझ रहे हैं, ट्रैक्टर पर महंगाई दूसरी बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। सरकार को चाहिए कि ट्रैक्टर को पहले जैसा ही रहने दें, इसके नियमों में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर का कहना है कि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन किया जाएगा। किसान पर हजारों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इस पर फिर से करने की आवश्यकता है। एक आम किसान के पास भी ट्रैक्टर है, जिस पर बेवजह यह नई परेशानी खड़ी होने जा रही है।
चौबीसी खाप के चौधरी सुभाष का कहना है कि किसानों को सरकार की प्राथमिकता पहले बकाया भुगतान की होनी चाहिए। ट्रैक्टर को नई नीति में शामिल कर गलत कदम उठाया गया है। छोटी जोत के किसान को बड़ा झटका लगेगा।
क्या है नया नियम
परिवहन नीति के नए ड्राफ्ट के मुताबिक सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 में संशोधन किया जा रहा है। पहले ट्रैक्टर को गैर परिवहन वाहन में गिना जाता था, लेकिन अब नए ड्राफ्ट में इसे परिवहन वाहन माना जाएगा।
ट्रैक्टर पर निर्भर किसान
बागपत। किसान ट्रैक्टर पर आश्रित है। गन्ने की ढुलाई से लेकर खेती के कार्य ट्रैक्टर से किए जाते हैं। छोटी जोत के अधिकतर किसानों ने भी भैंसा-बुग्गी के बजाए अब ट्रैक्टर और ट्रॉलियां बना ली है। जिससे इन किसानों को जोर का झटका लगेगा।