{"_id":"598f56554f1c1b96558b4a73","slug":"111502565973-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाइवे पर मौत के गड्ढे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाइवे पर मौत के गड्ढे
Updated Sun, 13 Aug 2017 12:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईवे पर मौत के गड्ढे
बागपत। सड़कों के गड्ढे जानलेवा बन गए हैं। वाहन अनियंत्रित होने के कारण हादसों की संख्या रोज बढ़ रही है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे का बागपत की सीमा में 51 किमी के टुकड़ा लोगों की जिंदगी में नासूर बन गया है। पहले दिल्ली और फिर लखनऊ की सत्ता बदली, लेकिन हाईवे का जिन्न अब तक फाइलों से बाहर नहीं निकला। सियासत का सबसे बड़े मुद्दों में से एक यही हाईवे है। गौरीपुर मोड़ की तस्वीर देखें तो स्पष्ट हो जाता है कि सिस्टम को यहां मरने वाले लोगों की परवाह नहीं है। हादसों और गड्ढों का मामला विधानसभा में भी गूंज चुका है। असलियत में सरूरपुर कलां के पास वर्ष 2016 में हाईवे पर युवक की मौत हो गई थी। बड़ौत के तत्कालीन बसपा विधायक लोकेश दीक्षित ने इस मामले में बागपत कोतवाली में ठेकेदार कंपनी को हादसों का जिम्मेदार बताते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
यहां कब क्या हुआ
उत्तर प्रदेश राज्य राज मार्ग प्राधिकरण (उपशा) ने चार लेन के प्रस्तावित हाइवे पर कार्य की शुरूआत 30 मार्च 2012 को की थी। छह सितंबर 2016 तक हाईवे निर्माण होना था, लेकिन ठेकेदार कंपनी के निदेशकों समेत अन्य लोगों के खिलाफ 455 करोड़ के घपले का मुकदमा दर्ज हुआ। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद बागपत जिले में करीब सात हजार पेड़ काटे गए। सिसाना और सरूरपुर कलां जैसे गांवों में लोगों के मकानों पर बुलडोजर चला। हाईवे पर आखिरी बार गाजियाबाद के लोनी में फ्लाईओवर निर्माण का कार्य किया था। यही नहीं नवंबर 2013 में यहां भी काम रोक दिया, इसके बाद कोई कार्य नहीं किया । अब इस हाईवे को राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की कवायद चल रही है। प्रदेश सरकार ने एनओसी दे दी। जिले के प्रभारी मंत्री एसपी सिंह बघेल के अनुसार तीन-चार माह में काम शुरू हो जाएगा।
यहां से पलट गए थे गुस्साए बघेल
बागपत। हाईवे की हालत इतनी खस्ता है कि वीआईपी इस पर गुजरने से कतराते हैं। दिल्ली से बड़ौत जाने के लिए अधिकतर वीआईपी पहले सोनीपत पहुंचते हैं और फिर गौरीपुर मोड़ से होकर आगे बढ़ते हैं। गौरीपुर मोड़ पर ही हाईवे की हालत बेहद खस्ता हो गई है। करीब दो माह पहले जिले के दौरे पर आए प्रभारी मंत्री एसपी सिंह बघेल गौरीपुर मोड़ के जाम और गड्ढों में फंस गए थे। उन्हें अपना काफिला वापस मोड़ना पड़ा था। उन्होंने यहां टी-प्वाइंट बनाने के आदेश दिए थे। गौरीपुर मोड़ समेत हाईवे की बागपत की सीमा में मरम्मत के लिए करीब 15 करोड़ का बजट स्वीकृत किया, लेकिन इस पर अभी काम शुरू नहीं हो सका है।
विज्ञापन
केस-1
गाजियाबाद के गांव खिचरा निवासी दिलशाद अपनी छह साल की बेटी अलफिशां के साथ बाइक पर सवार होकर शहर के राष्ट्र वंदना चौक से गुजर रहे थे। मेरठ रोड के गड्ढों में बाइक अनियंत्रित हुई और दोनों की जान चली गई थी।
केस-2
शाहपुर बड़ौली गांव निवासी सतीश अपनी पत्नी और बच्चे के साथ गौरीपुर मोड़ से गुजर रहे थे। यहां गड्ढों के कारण उनकी पत्नी और बच्चा बाइक से गिर, इन्हें पीछे से आ रहे ट्रक ने कुचल दिया था। खुद सतीश भी घायल हो गए थे।
केस-3
रमाला गांव का विपिन अपने दोस्त के साथ बाइक से गुजर रहा था। हाईवे पर किशनपुर के निकट गड्ढे के कारण बाइक अनियंत्रित होकर फिसल गई, इस कारण वह ट्रक के नीचे कुचला गया और एक माह इलाज के बाद मौत हो गई।
विज्ञापन
बागपत। सड़कों के गड्ढे जानलेवा बन गए हैं। वाहन अनियंत्रित होने के कारण हादसों की संख्या रोज बढ़ रही है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे का बागपत की सीमा में 51 किमी के टुकड़ा लोगों की जिंदगी में नासूर बन गया है। पहले दिल्ली और फिर लखनऊ की सत्ता बदली, लेकिन हाईवे का जिन्न अब तक फाइलों से बाहर नहीं निकला। सियासत का सबसे बड़े मुद्दों में से एक यही हाईवे है। गौरीपुर मोड़ की तस्वीर देखें तो स्पष्ट हो जाता है कि सिस्टम को यहां मरने वाले लोगों की परवाह नहीं है। हादसों और गड्ढों का मामला विधानसभा में भी गूंज चुका है। असलियत में सरूरपुर कलां के पास वर्ष 2016 में हाईवे पर युवक की मौत हो गई थी। बड़ौत के तत्कालीन बसपा विधायक लोकेश दीक्षित ने इस मामले में बागपत कोतवाली में ठेकेदार कंपनी को हादसों का जिम्मेदार बताते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
यहां कब क्या हुआ
उत्तर प्रदेश राज्य राज मार्ग प्राधिकरण (उपशा) ने चार लेन के प्रस्तावित हाइवे पर कार्य की शुरूआत 30 मार्च 2012 को की थी। छह सितंबर 2016 तक हाईवे निर्माण होना था, लेकिन ठेकेदार कंपनी के निदेशकों समेत अन्य लोगों के खिलाफ 455 करोड़ के घपले का मुकदमा दर्ज हुआ। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद बागपत जिले में करीब सात हजार पेड़ काटे गए। सिसाना और सरूरपुर कलां जैसे गांवों में लोगों के मकानों पर बुलडोजर चला। हाईवे पर आखिरी बार गाजियाबाद के लोनी में फ्लाईओवर निर्माण का कार्य किया था। यही नहीं नवंबर 2013 में यहां भी काम रोक दिया, इसके बाद कोई कार्य नहीं किया । अब इस हाईवे को राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की कवायद चल रही है। प्रदेश सरकार ने एनओसी दे दी। जिले के प्रभारी मंत्री एसपी सिंह बघेल के अनुसार तीन-चार माह में काम शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन
यहां से पलट गए थे गुस्साए बघेल
बागपत। हाईवे की हालत इतनी खस्ता है कि वीआईपी इस पर गुजरने से कतराते हैं। दिल्ली से बड़ौत जाने के लिए अधिकतर वीआईपी पहले सोनीपत पहुंचते हैं और फिर गौरीपुर मोड़ से होकर आगे बढ़ते हैं। गौरीपुर मोड़ पर ही हाईवे की हालत बेहद खस्ता हो गई है। करीब दो माह पहले जिले के दौरे पर आए प्रभारी मंत्री एसपी सिंह बघेल गौरीपुर मोड़ के जाम और गड्ढों में फंस गए थे। उन्हें अपना काफिला वापस मोड़ना पड़ा था। उन्होंने यहां टी-प्वाइंट बनाने के आदेश दिए थे। गौरीपुर मोड़ समेत हाईवे की बागपत की सीमा में मरम्मत के लिए करीब 15 करोड़ का बजट स्वीकृत किया, लेकिन इस पर अभी काम शुरू नहीं हो सका है।
विज्ञापन
केस-1
गाजियाबाद के गांव खिचरा निवासी दिलशाद अपनी छह साल की बेटी अलफिशां के साथ बाइक पर सवार होकर शहर के राष्ट्र वंदना चौक से गुजर रहे थे। मेरठ रोड के गड्ढों में बाइक अनियंत्रित हुई और दोनों की जान चली गई थी।
केस-2
शाहपुर बड़ौली गांव निवासी सतीश अपनी पत्नी और बच्चे के साथ गौरीपुर मोड़ से गुजर रहे थे। यहां गड्ढों के कारण उनकी पत्नी और बच्चा बाइक से गिर, इन्हें पीछे से आ रहे ट्रक ने कुचल दिया था। खुद सतीश भी घायल हो गए थे।
केस-3
रमाला गांव का विपिन अपने दोस्त के साथ बाइक से गुजर रहा था। हाईवे पर किशनपुर के निकट गड्ढे के कारण बाइक अनियंत्रित होकर फिसल गई, इस कारण वह ट्रक के नीचे कुचला गया और एक माह इलाज के बाद मौत हो गई।