{"_id":"5cb2389abdec2239135ecbe2","slug":"101555183770-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अष्टमी पर महागौरी का पूजन, श्रद्धालुओं ने खोले व्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अष्टमी पर महागौरी का पूजन, श्रद्धालुओं ने खोले व्रत
विज्ञापन
बागपत। अष्टमी पर शनिवार को श्रद्धालुओं ने महागौरी का पूजन किया। कन्याओं को भोजन कराकर व्रत खोले। मंदिरों में अष्टमी पर हवन किया। इसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां दी। परिवार में सुख शांति और समृद्धि की कामनाएं की। माता महा गौरी और सिद्ध दात्री की उपासना की गई। हवन और कीर्तनों का आयोजन हुआ।
जिलेभर में नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर एक ही दिन होने के कारण श्रद्धालुओं ने अपने उपवास खोले। घरों में मां दुर्गा के आठवें और नौंवे स्वरूप महागौरी और सिद्धदात्री की श्रद्धालुओं ने आराधना की उसके बाद कन्याओं को भोजन कराया। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि मां दुर्गा के आठवे स्वरूप माता महागौरी और नौवे स्वरूप सिद्धदात्री की विधि विधान के साथ आराधना की गई। पूजा अर्चना करने से अखंड सौभाग्य और सुख, शांति की प्राप्ति होती है। पूजा में चमेली के फूल, सेब, पंचमेवा, लोंग का जोड़ा अतिप्रिय है। कन्याओं को पूजा करने से उत्तम फल प्राप्त होता है। मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के सभी रूपों की अराधना की गई। शहर के शालिगराम मंदिर और बाबा जानकीदास मंदिर में दुर्गाष्टमी पर हवन का आयोजन किया गया। भक्तों ने हवन में आहुतियां डाली। शहर के पक्का घाट मंदिर नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर देवी कन्याओं का भोजन कराया। यहां पर मंदिर के प्रभारी ब्रह्मचारी दिव्यानंद महाराज के सानिध्य में कन्याओं को भोजन कराया गया। उन्होंने कहा कि नवरात्र में कन्याओं को घर में भोजन कराने से सुखों की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
जिलेभर में नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर एक ही दिन होने के कारण श्रद्धालुओं ने अपने उपवास खोले। घरों में मां दुर्गा के आठवें और नौंवे स्वरूप महागौरी और सिद्धदात्री की श्रद्धालुओं ने आराधना की उसके बाद कन्याओं को भोजन कराया। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि मां दुर्गा के आठवे स्वरूप माता महागौरी और नौवे स्वरूप सिद्धदात्री की विधि विधान के साथ आराधना की गई। पूजा अर्चना करने से अखंड सौभाग्य और सुख, शांति की प्राप्ति होती है। पूजा में चमेली के फूल, सेब, पंचमेवा, लोंग का जोड़ा अतिप्रिय है। कन्याओं को पूजा करने से उत्तम फल प्राप्त होता है। मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के सभी रूपों की अराधना की गई। शहर के शालिगराम मंदिर और बाबा जानकीदास मंदिर में दुर्गाष्टमी पर हवन का आयोजन किया गया। भक्तों ने हवन में आहुतियां डाली। शहर के पक्का घाट मंदिर नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर देवी कन्याओं का भोजन कराया। यहां पर मंदिर के प्रभारी ब्रह्मचारी दिव्यानंद महाराज के सानिध्य में कन्याओं को भोजन कराया गया। उन्होंने कहा कि नवरात्र में कन्याओं को घर में भोजन कराने से सुखों की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन