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काल सर्प दोष शांति महायज्ञ का शुभारंभ
Updated Wed, 26 Jul 2017 01:06 AM IST
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बागपत। शहर के श्री जानकीदास मंदिर में रुद्राभिषेक और काल सर्प दोष शांति महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। नागपंचमी के दिन यज्ञ का समापन होगा।
ज्योतिषाचार्य राज कुमार शास्त्री ने बताया मंगलवार से सनातन धर्म समिति के तत्वावधान में बाबा जानकी दास मंदिर में रुद्राभिषेक और काल सर्प दोष शांति महायज्ञ का शुभारंभ हो गया है। काल सर्प योग के बारे में बताया जन्मपत्री में राहुल - केतु के मध्य अन्य सात ग्रह जब आ जाते हैं, तब काल सर्प दोष उत्पन्न होता है। महर्षि पाराशर एवं मिहिर के शास्त्रों के साथ मान सागरी के चौथे अध्याय के दसवें श्लोक में इस योग का वर्णन है। ज्योति शास्त्र में राहुल के अधि देवता काल हैं, और केतु के प्रत्यधि देवता सर्प है। इन दोनों के कारण ही काल सर्प दोष बनता है। 27 जुलाई को नागपंचमी के दिन नागों को यमुना में विसर्जित किया जाएगा। उन्होंने कहा श्रद्धा और विश्वास के साथ जो पूजा की जाती है वह निश्चित रूप से सफल होती है और मन वांछित फल की प्राप्ति हो जाती है।
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ज्योतिषाचार्य राज कुमार शास्त्री ने बताया मंगलवार से सनातन धर्म समिति के तत्वावधान में बाबा जानकी दास मंदिर में रुद्राभिषेक और काल सर्प दोष शांति महायज्ञ का शुभारंभ हो गया है। काल सर्प योग के बारे में बताया जन्मपत्री में राहुल - केतु के मध्य अन्य सात ग्रह जब आ जाते हैं, तब काल सर्प दोष उत्पन्न होता है। महर्षि पाराशर एवं मिहिर के शास्त्रों के साथ मान सागरी के चौथे अध्याय के दसवें श्लोक में इस योग का वर्णन है। ज्योति शास्त्र में राहुल के अधि देवता काल हैं, और केतु के प्रत्यधि देवता सर्प है। इन दोनों के कारण ही काल सर्प दोष बनता है। 27 जुलाई को नागपंचमी के दिन नागों को यमुना में विसर्जित किया जाएगा। उन्होंने कहा श्रद्धा और विश्वास के साथ जो पूजा की जाती है वह निश्चित रूप से सफल होती है और मन वांछित फल की प्राप्ति हो जाती है।