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वृष लग्न के पूजन का रहेगा खास महत्व
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आजमगढ़। दीपावली पर बृहस्पतिवार को श्रीणेश-लक्ष्मी का विधि-विधान के साथ पूजन किया जाएगा। दीपावली का पूजन स्थिर लग्न में करना चाहिए। वृष और सिंह आदि स्थिर लग्न में पूजन करना श्रेयष्कर होता है।
ज्योतिषाचार्य प्रभुनाथ सिंह मंयक ने बताया कि समुंद-मंथन के समय में वृष लग्न थी, इसी मुहूर्त में वैभव की देवी महालक्ष्मी अवतरित हुई थीं। बृहस्पतिवार को दीपावली के दिन वृष लग्न शाम 6 बजकर 17 मिनट से रात्रि 8 बजकर 17 मिनट तक है, जो बेहद शुभ और कल्याणकारी है। पूरे दिन इससे उपयुक्त और दूूसरा कोई समय नहीं है। ऐसे में इसी दो घंटे में पूजन करना श्रेष्कर होगा। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी-गणेश के पूजन के पहले गज का पूजन करना होगा। हाथी शुभता का प्रतीक होता है। आसन पर मां लक्ष्मी और प्रथम पूज्य श्री गणेश को स्थापित करें और मूर्ति के पीछे हाथी की तस्वीर जरूर रखें। इसके बाद आटे से बने दीपों में 16 घी के दीपक जलाए। यह दीपों की पूजन भी कही जाती है इसके बाद मिट्टी के बने दीपक जलाए जाने चाहिए। इसके बाद पूरे विधि विधान से परम्परागत तरीकों से पूजन अर्चन व आरती का पाठ करना चाहिए और ईश्वर से मंगलकामना और खुुशहाली का आशीर्वाद मांगे। उन्होंने बताया कि दीपावली के दिन अर्द्घरात्रि में महानिशा की पूजा तांत्रिकों द्वारा किया जाता है। इन्होंने वृष लग्न में पूजन करना सभी के लिए कल्याणकारी है, जो आने वाले दिनों में आपको वैभव संपदा से परिपूर्ण करेगा।
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ज्योतिषाचार्य प्रभुनाथ सिंह मंयक ने बताया कि समुंद-मंथन के समय में वृष लग्न थी, इसी मुहूर्त में वैभव की देवी महालक्ष्मी अवतरित हुई थीं। बृहस्पतिवार को दीपावली के दिन वृष लग्न शाम 6 बजकर 17 मिनट से रात्रि 8 बजकर 17 मिनट तक है, जो बेहद शुभ और कल्याणकारी है। पूरे दिन इससे उपयुक्त और दूूसरा कोई समय नहीं है। ऐसे में इसी दो घंटे में पूजन करना श्रेष्कर होगा। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी-गणेश के पूजन के पहले गज का पूजन करना होगा। हाथी शुभता का प्रतीक होता है। आसन पर मां लक्ष्मी और प्रथम पूज्य श्री गणेश को स्थापित करें और मूर्ति के पीछे हाथी की तस्वीर जरूर रखें। इसके बाद आटे से बने दीपों में 16 घी के दीपक जलाए। यह दीपों की पूजन भी कही जाती है इसके बाद मिट्टी के बने दीपक जलाए जाने चाहिए। इसके बाद पूरे विधि विधान से परम्परागत तरीकों से पूजन अर्चन व आरती का पाठ करना चाहिए और ईश्वर से मंगलकामना और खुुशहाली का आशीर्वाद मांगे। उन्होंने बताया कि दीपावली के दिन अर्द्घरात्रि में महानिशा की पूजा तांत्रिकों द्वारा किया जाता है। इन्होंने वृष लग्न में पूजन करना सभी के लिए कल्याणकारी है, जो आने वाले दिनों में आपको वैभव संपदा से परिपूर्ण करेगा।
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